कोरोनावायरस के कारण हम सभी ज्‍यादातर समय अपने घर में रहते है और इसके चलते हमारी मूवमेंट भी बहुत लिमिटेड हो गई है। घर के सारे काम के बीच खुद के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल होता जा रहा है, जिससे वजन और फैट बढ़ रहा है। इतना ही नहीं घर में तरह-तरह की चीजें जैसे समोसा, मोमोज, चाट, पिज्‍जा आदि भी बन रहे है जिसका सीधा असर हमारे वेट पर पड़ रहा है। अगर बढ़ता वजन और फैट आपको भी परेशान कर रहा है तो हमारी ये आसान योग गाइड आपको 21 दिन में प्रभावी ढंग से वजन कम करने में काफी काम आ सकती है। अगर आप इस गाइड को फॉलो करेंगे तो आपको 21 दिन में वेट लॉस करने में बहुत हेल्प मिलेगी और आप अपनी बॉडी में बदलाव भी देख पाएंगी।

इसकी शुरुआत आप आसान आसनों से कर सकती हैं। हर दिन एक आसन का अभ्यास करें और परिणाम खुद महसूस करें। इन योगासन के बारे में हमें योग संस्थान के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर हंसाजी जयदेव योगेंद्र जी बता रहे हैं। 

हंसाजी जयदेव योगेंद्र जी का कहना हैं कि ''योग सिर्फ भौतिक शरीर ही नहीं, बल्कि आपके संपूर्ण अस्तित्‍व के लिए काम करता है। यह सिर्फ एक्‍सरसाइज नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विज्ञान है। विश्व के मौजूदा हालात को देखते हुए हम योग को हमारे भीतर कुछ सकारात्मक और शारीरिक बदलावों के लिए इस्तेमाल कर सकते है, जैसे कि अतिरिक्त वजन कम करना।'' 

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पहला दिन: पर्वतासन

आप पहले दिन की शुरुआत पर्वतासन के सभी अभ्यासों के साथ कर सकते हैं, क्योंकि ये आपके शरीर को खोलते हैं और आपको योगाभ्यास के लिए तैयार करते हैं। इसमें सभी अभ्यासों को जैसे ऊपर की ओर तथा बाद वाला स्‍ट्रेच और घुमाव वाला अभ्यास शामिल करें। यह आसन 40 की उम्र की महिलाओं को रेगुलर करना चाहिए। इस आसन में हाथ ऊपर उठाने से कांख में खिंचाव होता है, जिससे शरीर में हल्कापन और आराम महसूस होता है। इसके अलावा इससे वजन कम होता है पेट की चर्बी घटती है, रीढ़ की हड्डी और हाथ और उंगालियां मजबूत होती है और पीठ और कंधों का दर्द ठीक होता है।

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पर्वतासन करने का तरीका

  • इसे करने के लिए सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। 
  • फिर दोनों हाथों को नमस्कार की मुद्रा में जोड़ें और सांस लेते हुए उन्हें सिर के ऊपर ले जाएं। 
  • शरीर को ऊपर की तरफ खींचें। इस आसन को करने पर फेफड़े फैल जाते हैं। चार-पांच बार गहरी सांस लेने के बाद मुद्रा बदलें।

दूसरा दिन: अर्धमत्स्येन्द्रासन

दूसरे दिन आपको अर्धमत्स्येन्द्रासन करना है। यह आपकी मुख्य मांसपेशियों को टोन करता है और पेट की चर्बी कम करता है। इसके अलावा इस योगासन को रोजाना करने से आपके शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ती है। यह डायबिटीज को कंट्रोल में करता है और कंधों और गर्दन में स्‍ट्रेच आने के कारण, इसे मजबूत बनाता है। इसे रोजाना करने से आपका डाइजेस्टिव सिस्‍टम भी ठीक रहता है जिससे कब्‍ज की समस्‍या नहीं होती है और वजन कम होता है।

अर्धमत्‍स्‍येन्‍द्रासन करने का तरीका

  • इस योगासन को करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं।
  • फिर बाएं पैर को मोड़ें और बाएं पैर को दाएं घुटने के ऊपर से सामने रखें।
  • अपने धड़ को धीरे से बायीं तरफ मोड़ें।
  • फिर दाएं हाथ को बाएं घुटने पर रखें और बायां हाथ पीछे रखें।
  • करीब 20 से 40 सेकंड तक इस पोजिशन में बने रहें।
  • सांस छोड़ते हुए पहले दाहिने हाथ, फिर कमर, फिर चेस्‍ट और अंत में गर्दन को को ढीला छोड़ें।
  • अब आराम से सीधे बैठ जाएं।
  • दूसरी तरफ से इस प्रक्रिया को दोहराएं। 

तीसरा दिन: भुजंगासन

भुजंग को अंग्रेजी में कोबरा कहते हैं और चूंकि यह दिखने में फन फैलाए एक सांप जैसे आकार का आसन है, इसलिए इस आसन का नाम भुजंगासन रखा गया है। भुजंगासन करने से वजन कम होने के साथ-साथ पेट की चर्बी भी तेजी से कम होती है। यह न सिर्फ पेट की मांसपेशियों को टोन करता है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। इसके अलावा यह आपकी बॉडी को फ्लैक्सिबल बनाती है। इसके अलावा चेहरे में ब्‍लड सर्कुलेशन ठीक तरह से करता है जिससे त्वचा टाइट होती है। इस योगासन को करने से चेहरे की नसों में कई तरह के स्‍ट्रेच आते है जिससे चेहरे की झुर्रियां कम होती है। अगर आप वजन कम करने के साथ चेहरे की झुर्रियों को भी दूर करना चाहती हैं तो इस योगासन को तीसरे दिन करें।

भुजंगासन करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
  • इसके बाद हथेली को कंधे की सीध में रखें।
  • दोनों पैरों के बीच की दूरी को कम करें और पैरों को सीधा और स्‍ट्रेच करें।
  • अब सांस लेते हुए शरीर के अगले हिस्‍से को नाभि तक उठाएं।
  • ध्‍यान रहें कि कमर पर ज्‍यादा खिंचाव न आएं।
  • कुछ सेकंड्स इसी पॉजिशन में बने रहें।
  • फिर गहरी सांस छोड़ते हुए नॉर्मल पॉजिशन में आ जाएं।
  • शुरुआत में इसे 3 से 4 बार करें।

चौथा दिन: धनुरासन 

यह आसन आपके पेट के हिस्‍से पर काफी प्रेशर डालता है, क्योंकि आपके पूरे शरीर का संतुलन नाभि के आसपास के क्षेत्र से होता है। धनुरासन को भी पावर योग ही माना जाता है। इसे करने से बॉडी अच्‍छे से डिटॉक्‍स हो जाती है, जिससे मुंहासों का आना कम होता है और स्किन पर गजब का निखार आने लगता है। यानि इस योगासन को करने से वेट लॉस के साथ-साथ चेहरे पर ग्‍लो भी आता है।

धनुरासन करने का तरीका

  • इस योग को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाए। 
  • फिर दोनों पैरों को मिलाकर घुटनों से मोड़ें। 
  • अब दोनों हाथों को पीछे ले जाकर दोनों पैरों को टखनों से पकड़ें और सांस बाहर छोड़ते हुए पैरों को खींचें। 
  • साथ-साथ सिर को पीछे की ओर ले जाने की कोशिश करें। 
  • शरीर का सारा वजन आपकी नाभि पर होना चाहिए। सांस खींचते हुए पकड़ ढीली करें। 
  • यह क्रिया, कई बार करें।
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पाचवां दिन: गरूड़ासन

यह पैरों की मसल्‍स को मजबूत बना कर टोन करता है और शरीर का संतुलन कायम रखता है। इसके अलावा यह आसन न सिर्फ नसों को ठीक करता है, बल्कि शरीर के कसे हुए जोड़ों को भी खोलता है। कंधों की जकड़न दूर करने के साथ यह दिमाग को भी स्थिर बनाता है और तनाव को दूर करता है। इसके अलावा यह जांघों के फैट को भी कम करता है।

गरूड़ासन करने का तरीका

  • इसे करने के लिए सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं।
  • फिर दाएं पांव को बाएं पांव के ऊपर से दूसरी ओर ले जाएं।  
  • बाहों को रस्सी के तरह एक दूसरे में उलझा दें। 
  • आपस में उलझे हुए हाथों को गरुड़ की चोंच के समान छाती के आगे रखें। 
  • घुटने को मोड़कर बैलेंस बनाएं।
  • बाएं पांव को दाएं पांव के ऊपर से ले जाकर इसे दूसरी ओर भी करें। यह आधा चक्र हुआ।
  • फिर दूसरे तरफ से करें। अब एक चक्र हुआ। 
  • इस तरह से आप तीन से पांच चक्र करें।

छठा दिन: हस्तपादांगुष्ठासन

यह आसन कटि प्रदेश को प्रभावित करता है और पेट और पीछे की मांसपेशियों में लचीलापन और बेहतर आकार लाता है। जी हां यह आसन पेट को शेप में लाने के साथ-साथ हाथ एवं पैर को मजबूत करता है और हाथ एवं पैर की बीमारियों को दूर करता है। साथ ही यह जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

हस्तपादांगुष्ठासन करने का तरीका

  • इस योगासन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और पैर सीधा रखें। 
  • हाथों को टी पॉजिशन की तरह रखें। 
  • दायें पैर को ऊपर की तरफ उठायें। 
  • संभव हो तो पैर के पंजे को दायें हाथ से पकड़ें और इस अवस्था में अपनी क्षमतानुसार जितनी देर हो उतनी देर रहें। 
  • अब पैर को दोबारा पहले की अवस्था में ले आयें। 
  • इस योग को दूसरे पैर से भी दोहराएं।

सातवां दिन: कोणासन तृतीय

यह उदर की मांसपेशियों का आकार बेहतर करता है और मेरूदण्ड का लचीलापन बढ़ाता है। यह कटि प्रदेश के आसपास जमा वसा को कम करने का बहुत कारगर आसन है। पीठ के दर्द से निजात, रीढ़ की हड्डी को लचीला, कब्ज़ में राहत देने के साथ ही साइटिका रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।

कोणासन तृतीय करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए पैरों के बीच में 2 फ़ीट का अंतर रखें। 
  • दोनों पैर पर बराबर भार संतुलित करें।
  • सांस लेते हुए दोनों हाथों को फैलाते हुए सिर के ऊपर ले जाये और हथेलियों को जोड़ें। 
  • उंगलियो को आपस में जोड़कर रखें। ध्यान रहें कि हाथ कान से छूते हुए जाये।
  • सांस बाहर छोड़ते हुए दाहिने ओर झुकें। यह ध्यान दें कि हाथ कोहनियो से मुड़े नहीं। 
  • ज़मीन पर पैर से प्रेशर बनाएं रखें। 
  • इस स्थिति में बने रहे। शरीर में झुकते हुए खिंचाव बनाये रहे। इस स्थिति में रहते हुए गहरी सांस लें और छोड़ें।
  • सांस लेते हुए दोबारा नॉर्मल पॉजिशन में खड़े हो।
  • सांस छोडते हुए दोनों हाथ नीचे लाये।
  • बाये ओर यही प्रक्रिया दोहराये।

आठवां दिन: पवनमुक्तासन

यह शुरुआत करने वालों के लिए बहुत सरल आसन है जो न सिर्फ शरीर को कई फायदे देता है, बल्कि दिमाग के लिए भी अच्छा है। उदर पर पड़ने वाले प्रेशर के साथ यह एक्‍स्‍ट्रा फैट बर्न करता है और उदर में गैस की समस्या भी खत्म करता है। जी हां योग यह मानता है कि शरीर में अगर वायु हो तो वह खाली जगह पर अपना घर बना लेती है और जोड़ों के दर्द को बढ़ा देती है। पवनमुक्‍तासन से इस वायु को शरीर से बाहर फेंका जा सकता है।

पवनमुक्‍तासन करने का तरीका

  • इस योग को करने के लिए जमीन पर सीधे लेट जाएं। 
  • फिर पैरों को मोड़ते हुए अपने घुटने को चेस्‍ट के पास लाने का प्रयास करें।
  • अपने हाथों से पैरों को दबाएं, पेट पर दबाव बनायें एकदम इस तरह कि आप अपने आपको गले लगा रहे हों।
  • इसी तरह कुछ देर आराम से सांस लेते रहें।
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नौंवा दिन: पश्चिमोत्तासन

इस योग को पेट को सिकोड़ने से पेट में जमा चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा इस योगासन को करने से आप रोजमर्रा के तनाव को भी आसानी से दूर कर सकती हैं। नौंवे दिन आप पश्चिमोत्तासन करें।

पश्चिमोत्तासन करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर वज्रासन की पोज में बैठ जाएं।
  • अब अपनी बॉडी को सीधा तान कर अपने दोनों पैरों को आपस में मिला लें।
  • अब सांस अंदर लेते हुए हाथों को सिर से ऊपर की ओर लेकर जाएं।
  • फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुक जाएं और अपने दोनों हाथों से अपने पैरों के तलवों को पकड़ने की कोशिश करें।
  • इसे करते हुए अपने पैरों को बिल्‍कुल सीधा रखें।
  • अब 3 बार धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ दें।
  • आखिर में नॉर्मल पोजीशन में आ जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराएं।

दसवां दिन: सर्वांगासन

यह थायराइड ग्रंथि के काम को बेहतर करता है जो शरीर में वजन को नियमित करने का काम करती है। इस आसन में बॉडी के सारे अंगों की एक्‍सरसाइज एक साथ हो जाती है इसलिए इसे सर्वांगासन का नाम दिया गया है। जी हां अगर आप दसवें दिन इस आसन को करेंगे तो वजन कम होने के साथ आपका ब्‍लड सर्कुलेशन सही रहता है और एनर्जी का लेवल भी बना रहता है। इसके अलावा यह आसन आपके बालों और चेहरे की सुंदरता को भी कई गुणों बढ़ा देता है।

सर्वांगासन करने का तरीका

  • इसे करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को शरीर के साइड में रखें।
  • दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाइए।
  • पूरा शरीर गर्दन से समकोण बनाते हुए सीधा लगाएं और ठोड़ी को सीने से लगाएं।
  • इस पोजीशन में 10 बार गहरी सांस लें और फिर धीरे-धीरे नीचे आएं।

11वां दिन: त्रिकोणासन

यह आसन शरीर की कोमलता और लचीलेपन के लिए सबसे अच्छी मुद्रा है। यह आपकी कमर की मांसपेशियों और उदर की दीवारो को टोन करता है। जी हां त्रिकोण' का अर्थ होता है त्रिभुज और आसन का अर्थ योग है। यानि इस आसन में शरीर त्रिकोण की आकृति का हो जाता है, इसीलिए इसका नाम त्रिकोणासन रखा गया है। इस आसन को करने से आप अपनी हड्डियों को मजबूत रख सकते हैं। इसके अलावा इस योग को करने से कमर दर्द को कम करने और मोटापा कम करने के साथ-साथ डायबिटीज को काबू करने में बड़ी भूमिका निभाता है

त्रिकोणासन करने का तरीका

  • इस योग को करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। 
  • अब अपने पैरों में 2 से 3 फिट की दूरी रखें।
  • अब अपनी बांहों को कंधों तक फैला दें।
  • फिर इसी पोजिशन में धीरे-धीरे बायीं तरफ झुक जाएं।
  • उंगलियों से जमीन को छूने की कोशिश करें।
  • इस दौरान आपकी नजरें छत की तरफ ही रहने दें।
  • अब अपना दाहिना हाथ नीचे लेते हुए इस तरह पीछे मुड़कर इस पोजिशन में आ जाएं।
  • अपनी उंगलियों से जमीन को छूने की कोशिश करें।
  • यही क्रिया आप दूसरी तरफ से भी करें।
  • अब नॉर्मल पोजिशन में आ जाएं।

12वां दिन: उष्ट्रासन

आपको योग रुटीन के 12वें दिन उष्‍ट्रासन करना है। इस आसन को करने से न सिर्फ आपके पेट, बल्कि जांघों की चर्बी भी कम होगी। इसके अलावा इस योगासन को करने से पीठ, कंधे मजबूत होंगे और लचीलेपन में सुधार होता है, डाइजेशन बढ़ता है, सीना मजबूत होता है और पीठ और कंधों को मजबूती देता है। साथ ही पीठ के निचले हिस्से में दर्द से छुटकारा दिलाता है। रीढ़ की हड्डी में लचीलेपन एवं मुद्रा में सुधार भी लाता है। महिलाओं की पीरियड्स की प्रॉब्‍लम्‍स को दूर करता है।

  • उष्ट्रासन करने का तरीका
  • इस योग को करने के लिए सबसे पहले आप वज्रासन में बैठे।
  • ध्यान रहें जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें, पंजे पीछे की ओर हो और फर्श पर जमे हों।
  • घुटनों तथा पैरों के बीच करीब 1 फुट की दूरी रखें।
  • अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं।
  • सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें और अब दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर तथा बाईं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें।
  • ध्‍यान रहे कि पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे।
  • शरीर का वजन बांहों तथा पांवों पर समान रूप से होना चाहिए।
  • धीरे-धीरे सांस ले और धीरे-धीरे सांस छोड़े। 
  • जब तक हो सके अपनी क्षमतानुसार पॉजिशन को मेन्टेन करें।
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13वां दिन: उत्कटासन

पैरों की मासंपेशियों को बेहतर करने के लिए शरीर की मुख्य मांसपेशियों को बेहतर बनाए रखता है। जी हां इसे चेयर पोज के नाम से भी जाना जाता है। इसमें आप एक काल्पनिक कुर्सी पर बैठते हैं। इससे आपके जांघों के साथ-साथ आपके कूल्हे और पिंडली भी मज़बूत होती है। आपकी बॉडी का वेट पैरों पर पड़ता है, खासकर हिप्‍स और थाई की मसल्‍स पर। इससे ना ही आपके पैर टोन होंगे बल्कि उस पूरे हिस्‍से की मसल्‍स भी मजबूत होंगी और फैट भी कम होगा।

उत्कटासन करने का तरीका

  • इसे करने के लिए अब अपने दोनों हाथों को कंधों के बराबर में जमीन के समांतर रखें। 
  • अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए घुटनों को मोड़कर इस अवस्था में बैठ जाएं जैसे कुर्सी पर बैठते हैं। 
  • इसी स्थिति में कुछ देर के लिए बने रहें। अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे फिर से पहली अवस्था में खड़े हो जाएं। 
  • अब आप ये आसन अपने घर पर कभी भी 10 मिनट निकालकर करें। 

14वां दिन: चक्रासन

यह मुख्य मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और मस्तिष्क का संतुलन बेहतर रखता है। जी हां 14 वें दिन आपको इस आसन को करना है। इस आसन से आपके हाथ, सीने और हिप्स की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यह आपके दिल के लिए अच्छा है और अस्थमा में फायदेमंद है। यह थायरॉइड और पिट्यूटरी ग्लैंड को स्टिम्युलेट करता है और डिप्रेशन को कम करता है। इस आसन को करने पर आपकी मुद्रा चक्र के तरह हो जाती है इसलिए इसे चक्रासन कहा जाता है। जी हां चक्रासन या व्हील पोज में शरीर को पीछे की तरफ स्ट्रेच करने की जरूरत होती है। इसमें आप किसी पहिये की शेप में अपने शरीर की स्ट्रेचिंग करते हैं। इस योगासन को सुबह खाली पेट और रात में खाने-पीने के 4-6 घंटे बाद करें।

चक्रासन करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं।
  • फिर पैरों को घुटने से मोड़ें जिससे एड़ी हिप्स को छुए और पंजे जमीन पर हो। 
  • अब गहरी सांस लेते हुए कंधे, कमर और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। 
  • इस प्रक्रिया के दौरान गहरी सांस लें और छोड़ें। 
  • फिर हिप्स से लेकर कंधे तक के भाग को जितना हो सके ऊपर उठाने का प्रयास करें। 
  • कुछ देर बाद नीचे आ जाएं और अपनी सांसों को नॉर्मल कर लें।

15वां दिन: गोमुखासन

यह कूल्हों, जांघों, एडियों, छाती, कंधों, बांहों और कलाइयों को लचीला बनाते हुए इन्हें और खोलने का काम करता है।

गोमुखासन करने का तरीका

  • इस आसन जमीन पर बैठें और अपनी कमर सीधी रखें। 
  • फिर अपने एक पैर को दूसरे पैर पर रखें। 
  • लेकिन ध्‍यान रखें कि आपकी एक थाई दूसरी के ऊपर हो। 
  • इसके बाद बाएं हाथ को उठाकर कोहनी की तरफ से मोड़ें और पीछे की ओर कंधों से नीचे ले जाएं। 
  • उसके बाद दाएं हाथ को कोहनी से मोड़ें और ऊपर की ओर ले जाकर पीछे पीठ पर ले जाएं। 
  • दोनों हाथों की अंगुलियों को पीठ के पीछे इस तरह से रखें कि एक दूसरे को आपस में इंटरलॉक हो जाए। 
  • अब सिर को कोहनी पर टिकाकर पीछे की ओर करने की कोशिश करें।
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16वां दिन: शवासन

वजन कम करने के लिए शरीर और मस्तिष्क को शांत रखना भी बहुत जरूरी है, और शवासन आपको इसी राह पर ले जाता है। शवासन से नर्वस व मस्कुलर सिस्टम बैलेंस होता है, किसी भी प्रकार की चिड़चिड़ापन दूर करता है। ये सभी आसन में सबसे आसान है जो तनाव को दूर करने में हेल्‍प करता है। तनाव एक ऐसी परेशानी है, जो आपके वजन को भी बढ़ाता है!

शवासन करने का तरीका

  • इसे करने के लिए सबसे पहले अपनी पीठ के सहारे लेट जाएं। 
  • लेकिन इस अवस्था में आपके पैर ज़मीन पर बिल्कुल सीधे होने चाहिए। 
  • अब अपने दोनों हाथों को शरीर से कम से कम 5 इंच की दूरी पर रखें। 
  • हाथों को इस तरह रखें कि दोनों हाथ की हथेलियां आसमान की दिशा में हो। 
  • अब शरीर के हर अंग को आपको ढीला और आंखों को बंद करना है। 
  • हल्की-हल्की सांसे लें। इस समय आपका पूरा ध्‍यान सांसों पर होना चाहिए।

17वां दिन: सूर्य नमस्कार

यह पावर योग है जो एक साथ पूरी बॉडी पर काम करता है। इसे करने से पूरे शरीर की चर्बी को खत्म करने के लिए प्राचीन और बहुत अच्छे व्यायाम सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें। सूर्य नमस्‍कार को सुबह के समय सूरज की ओर चेहरे करके ही करना चाहिये क्‍योंकि सूरज हमें एनर्जी प्रदान करता है। ऐसा माना जाता है कि रोज 5-10 मिनट सूर्य नमस्कार करने के बाद आपको कोई आसन करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। रोजाना सूर्य नमस्कार करने से आप कई बीमारियों को दूर रह सकती हैं। हेल्‍थ के प्रति जागरूक महिलाओं के लिए सूर्य नमस्‍कार एक वरदान है। इससे न केवल बॉडी की एक्‍स्‍ट्रा कैलोरी बर्न होती है बल्कि पेट की मसल्‍स भी सही शेप में आ जाती है। इसके अलावा सूर्य नमस्‍कार रेगुलर करने से महिलाओं के पीरियड्स से जुड़ी सभी प्रॉब्‍लम दूर होती है, शरीर में लचीलापन आता है, पेट ठीक रहता है, चेहरे पर गजब का निखार आता है और यह झुर्रियां आने से रोकता है जिससे आप लंबे समय तक जवां और खूबसूरत दिखती है।

सूर्य नमस्‍कार करने का तरीका

  • सूर्य नमस्कार में बारह आसनों का समूह है। इन बारह आसनों को करने से शरीर निरोग, स्‍वस्‍थ और रीढ़ की हड्डी मजबूत रहती है। 
  • इसमें सबसे पहले प्रणाम मुद्रा आती है, दूसरी हस्त उत्तानासन, तीसरी पाद हस्तासन, चौथी अश्व संचालन आसन है। 
  • पांचवी अवस्‍था में पर्वतासन, छठी में अष्टांग नमस्कार, सातवीं में भुजंगासन, आठवीं में पर्वतासन, नौवीं अश्व संचालन आसन शामिल है। 
  • दसवीं अवस्था में पाद हस्तासन ग्यारहवीं अवस्था में हस्त उत्तानासन और बारहवीं अवस्‍था में प्रणाम मुद्रा शामिल हैं। 
  • ये 12 अवस्थाएं सूर्य नमस्कार का चक्र है। आप इस वीडियो को देखकर इसे आसानी से कर सकती हैं।  

18वां दिन: वक्रासन

यह कटि को घुमाने का एक सरल आसन है, जो कमर के पीछे की चर्बी को दूर करता है। इसके अलावा इस आसन को लगातार करने से वेट बैलेंस में रहता है। रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है शरीर में लचीलापन आता है। वक्रासन के निरंतर अभ्यास से हमारे शरीर में नर्वस सिस्‍टम मजबूत हो जाता है और स्फूर्ति प्रदान करता है और इसके साथ-साथ गर्दन का दर्द कमर कब्ज बाद में फायदेमंद होता है। वक्रासन करने से लीवर, किडनी, पेनक्रियाज पर असर होता हैं जिससे यह अंग हेल्‍दी रहते हैं। इसे रेगुलर करने से स्पाइनल कार्ड मजबूत होता है। हर्निया के रोगियों को भी इस आसन से बहुत फायदा मिलता है।

वक्रासन करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए किसी साफ जगह पर बैठ जाएंगे।
  • फिर अपने पैरों को सामने की ओर फैला दें। पैरों के बीच में कोई गैप नहीं होना चाहिए।  
  • अब बाएं पैर को मोड़ते हुए दाहिने पैर के घुटने के बगल ले जाएं। 
  • फिर बाएं हाथ को पीठ के पीछे 1 फुट की दूरी पर जमीन पर स्पर्श करते हुए रखें। 
  • इसके बाद दाहिने हाथ से दाहिने पैर के बाई साइड से हाथ को डालते हुए दाहिने पैर के घुटने को छूने की कोशिश करें।  
  • ऐसा करने पर पेट में खिंचाव आता है। इस स्थिति में सांसों की गति सामान्य रहेगी।
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19वां दिन: शलभासन

19 वें दिन आपको शलभासन करना है। यह वजन कम करने के साथ पेट की चर्बी को कम और जांघों को सही आकार देता है। साथ ही पेट की गुहिका पर दबाव डालता है। साथ ही यह आसन पीठ, हाथों और कंधों की मजबूती व लचीलापन बढ़ाता है। गर्दन और कंधों की नसों को आराम और मजबूती देता है। डाइजेशन को सुधारता है और पेट के अंगों को भी मजबूत बनाता है।

शलभासन करने का तरीका 

  • इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।
  • फिर अपनी हथेलियों को हिप्‍स के नीचे रखें।
  • अब सांस अंदर लेते हुए अपना बायां पैर उठाएं।
  • पैर को सीधा रखें। फिर सांस छोड़ें और अपने बाएं पैर को नीचे लेकर आएं।
  • यही प्रक्रिया अपने दाएं पैर से भी करें।
  • फिर सांस लेते हुए अपने दोनों पैरों को जितना हो सके उतना ऊपर ले जाएं।
  • आखिर में सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे लाएं।
  • इस तरह से आप 3 से 5 बार करें।

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20वां दिन: विपरीतकर्णी

वजन कम करने की प्रक्रिया के लिए अच्छा प्रवाह भी जरूरी है और यह आसन इसी में आपकी पूरी हेल्‍प करता है। आप मेनोपॉज की तरफ बढ़ रही हैं, यानि अगर आपकी उम्र 45 के पार है तो इस आसन को जरूर करें। इससे प्रजनन सिस्टम में ब्‍लड सर्कुलेशन होगा और सेहत में सुधार होगा। इसके अलावा इससे पेट, लीवर, किडनी, पैनक्रियाज, अग्नाशय, मूत्राशय और वेरिकोज वेंस रोगों में फायदा मिलता है। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है और सभी अंग सुचारु रूप से काम करते है। साथ ही इस आसन को करने से चेहरे का ग्‍लो भी बढ़ता है। 

विपरीतकर्णी आसन करने का तरीका 

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले फर्श पर लेट जाएं। 
  • फिर पैरों को सीधा और हाथों को शरीर से सटाकर रखें। 
  • धीरे-धीरे पैरों और पीठ के पिछले हिस्से को उठाएं। 
  • अब चाहे तो पीठ के पिछले हिस्से को हाथों से सहारा दे सकते हैं। 
  • या आप दीवार के सहारे भी इस योगासन को कर सकते हैं।
  • पैरों को ऊपर उठाते हुए अंगूठे को आंखों की सीध में लाएं। 
  • 5-6 बार सामान्य तरीके से सांस लेकर शरीर को ढीला छोड़ दें।

21वां दिन: ओम का उच्चारण

मस्तिष्क को शांत करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह बहुत ही उपयोगी आसन है। ओम सिर्फ एक पवित्र ध्वनि ही नहीं बल्कि अनन्त शक्ति का प्रतीक है। ‘ॐ’ शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है..अ उ और म। अ का मतलब होता है उत्पन्न होना, उ का मतलब होता है उठना यानी विकास और म का मतलब होता है मौन हो जाना यानि कि ब्रह्मलीन हो जाना। ‘ॐ’ शब्द का उच्चारण करने से हार्ट और पाचन तंत्र दोनों ही ठीक रहते है। जिससे वेट लॉस में आसानी होती है। यहां तक इसे रोजाना करने से नींद ना आने की समस्या कुछ समय में ही दूर हो जाती है। इसलिए सोने से पहले भी ‘ॐ’ शब्द का उच्चारण करना चाहिए।

ॐ उच्चारण करने का तरीका

  • रोज सुबह सूर्योदय के समय उठ जाए।
  • इसके बाद एक शांत जगह पर बैठकर ‘ॐ’ शब्द का उच्चारण करें। 
  • अगर आप चाहें तो शुरू के दिनों में 11 बार भी ‘ॐ’ शब्द का उच्चारण कर सकते हैं। 

वजन तेजी से कम करने के लिए यह जरूरी है कि योग का नियमित अभ्यास किया जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्यप्रद भोजन और अच्छी नींद भी जरूरी है। हर रोज अभ्यास करें और खुद को एक नए स्वरूप में प्रस्तुत करें! तो देर किस बात की आज से ही इन योगासन को अपने रुटीन में शामिल करें। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़े रहें।