हेल्‍दी रहने के लिए हमारी बॉडी को विटामिन और मिनरल की जरूरत होती है। विटामिन डी हमारी हेल्‍थ के लिए एक ऐसा ही जरूरी विटामिन हैं क्‍योंकि इससे हमारी मसल्‍स और हड्डियों को मजबूती मिलती हैं और यह उनके विकास को भी बढ़ावा देता है। लेकिन जिस तरह विटामिन डी अच्‍छी हेल्‍थ को बढ़ावा देता है, इसकी कमी से हेल्‍थ संबंधी समस्‍याएं भी हो सकती है। जी विटामिन डी फैट में घुल जाने वाले विटामिन के समूह में आता है। यह बॉडी में कैल्शियम और फॉस्फेट को एब्जॉर्ब करने की क्षमता को बढ़ाता है। सूरज की रोशनी में बॉडी कोलेस्ट्रॉल से विटामिन डी का निर्माण भी करता है। इसलिए इसे सनशाइन विटामिन भी कहा जाता हैं।

साथ ही पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी लेने से कई गंभीर बीमारियों से आप सुरक्षित रहती हैं जैसे कैंसर, रिकेट्स, ऑस्टियोपोरोसिस, हार्ट डिजीज, किडनी रोग, अस्थमा आदि। इसके अलावा मोटापा, बालों का झड़ना और डिप्रेशन जैसी प्रॉब्लम्स में भी विटामिन डी के सेवन से फायदा होता है। साथ ही विटामिन डी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, सर्दी, फ्लू और निमोनिया से सुरक्षा देता है। अब तो आपको समझ में आ ही गया होगा कि इसकी कमी से आपको कितनी तरह की परेशानी हो सकती है। आइए ऐसी ही 5 समस्‍याओं के बारे में जानें, जो विटामिन-डी की कमी से महिलाओं को हो सकती हैं।

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हार्ट की समस्‍या

सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने से बॉडी को विटामिन डी के रूप में मिलने वाला विटामिन क्षतिग्रस्त कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को ठीक करने में हेल्‍प करता है। अमेरिका की ओहिओ यूनिवर्सिटी में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन डी3 कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को कई बीमारियों से बचाता है व उन रोगों के उपचार में भी हेल्‍प करता है। बॉडी में इसकी कमी से आपको हार्ट की समस्‍या हो सकती हैं।

हड्डियों में कमजोरी

हड्डियों में मजबूती के लिए कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन डी की भी जरूरत होती है। जी हां विटामिन-डी हड्डियों की हेल्‍थ के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। बॉडी में विटामिन-डी की कमी होने से कैल्शियम की भी कमी हो सकती है, क्योंकि विटामिन-डी की हेल्‍प से ही कैल्शियम का बॉडी में अवशोषण होता है और यह कैल्शियम को पचाने में हेल्‍प करता है। इसकी कमी से आपकी हड्डियों में कमजोरी आने लगती है।

पीरियड्स में प्रॉब्‍लम

अगर आप अपने पीरियड्स से संबंधित किसी भी समस्‍या का सामना करती हैं, तो आपको अपनी बॉडी में विटामिन डी के लेवल को चेक करवाना चाहिए। जी हां Mr. Man Mohan Gupta, Mentor from My Medicine Box के अनुसार, ''कैल्शियम के अवशोषण के लिए विटामिन डी जरूरी होता है, और इसके लक्षण पीएमएस और पीरियड्स के लक्षणों को खराब कर सकते हैं, क्योंकि इन लक्षणों को दूर करने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। रेगुलर पीरियड्स के लिए, आपको विटामिन-डी के लेवल को बनाए रखना जरूरी है।''  विटामिन डी की कमी के कारण मूड में बदलाव, सिरदर्द और स्लिप डिस्‍आर्डर भी हो सकता हैं। विटामिन डी पीसीओएस में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, एक सामान्य endocrine डिस्‍ऑर्डर, जो हार्मोन असंतुलन और अनियमित अवधियों के कारण होता है। 

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विटामिन-डी की कमी और डिमेंशिया

जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, महिलाओं में अल्जाइमर और डिमेंशिया की शिकायत तब बढ़ जाती है, जब उनकी बॉडी में विटामिन डी की कमी होती है। डिमेंशिया में सोच, व्यवहार में बदलाव और याददाश्त में कमी आने लगती है। इस रिसर्च पाया गया हैं की, एक सामान्य विटामिन-डी के लेवल वाले व्यक्ति की तुलना में, विटामिन-डी की कम लेवल वाले लोगों में डिमेंशिया की संभावना 53 प्रतिशत मिली। जब कि यही आकड़ा बढ़ कर 125% पहुंज गया जब किसी के शरीर में इस विटामिन की गंभीर कमी थी। इसलिए हमारे शरीर में विटामिन-डी होना बहुत जरुरी है।

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तनाव

महिलाओं में विटामिन डी की आवश्यकता अधि‍क होती है। जी हां विटामिन डी की कमी से महिलाओं में तनाव की समस्या पैदा हो जाती है और इसके कारण वे लगातार उदासी महसूस करती हैं। इसके अलावा बॉडी में विटामिन डी की कमी का सीधा असर आपके मूड पर पड़ता है। इसकी कमी से बॉडी में सेरोटोनिन हार्मोन के निर्माण पर असर पड़ता है जो आपके बदलते मूड के लिए जिम्मेदार हो सकता है। 

जी हां अगर आपकी बॉडी में भी विटामिन डी की कमी हैं तो आप आसानी से इन बीमारियों का शिकार हो सकती हैं इसलिए अपनी बॉडी में विटामिन डी की कमी ना होने दें।