बॉडी पर विटामिन और अन्‍य nutrients के असर के बारे में हम कई वर्षों से बात करती आ रही हैं। लेकिन हम में से अधिकांश यह नहीं जानती कि विटामिन हमारी बॉडी को कैसे और किस तरह से असर करता हैं। जैसे ही हमारी उम्र बढ़ती हैं हम धीरे-धीरे विभिन्न समस्याओं और इसके लक्षणों को जानती हैं; तब हमें इसकी कमी के बारे में पता चलता है। यह बहुत दुख कि बात है कि हम नहीं जानते हैं कि विटामिन और nutrients हमारी बॉडी को कैसे प्रभावित करते हैं।

Mr. Man Mohan Gupta, Mentor from MyMedicineBox के अनुसार, 'हेल्‍दी लाइफ जीने के लिए, इनके बारे में जानना बेहद जरूरी है। उचित फूड ना लेने और आहार में पोषक तत्‍वों की कमी के कारण इन दिनों युवा पीढ़ी को कई तरह की हेल्‍थ प्रॉब्‍लम्स आ रही हैं। ऐसा अनहेल्‍दी खाने की आदतों के चलते भी है; युवाओं को मोटापे के अलावा अन्‍य कई हेल्‍थ संबंधी समस्‍याएं जैसे हाई ब्‍लड प्रेशर और हाई कोलेस्‍ट्रॉल और एनिमिया भी घेर रही हैं। यह बहुत ही आम विषय है और इन हेल्‍थ प्रॉब्‍लम्‍स पर हम खुले तौर पर चर्चा करते हैं। लेकिन एक ऐसा विषय है जिसकी चर्चा आज भी हम खुलकर नहीं कर पाती हैं। जी हां अधिकांश युवा महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा अनियमित पीरियड्स है। मुझे लगता है कि लगभग 80% महिलाओं को uneven monthly cycle की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।'

Mr. Man Mohan Gupta का कहना है कि 'मुझे नहीं लगता कि आप में से बहुत से महिलाएं यह भी जानती होगी कि यह समस्या अनहेल्‍दी फूड्स और विटामिन डी की कमी के कारण होती है। इसलिए एक बैलेंस डाइट जिसमें सभी उचित विटामिन और पोषक शामिल होते हैं, उन्हें पूरा करने की मौलिक आवश्यकता होनी चाहिए। आपकी बॉडी को ठीक से काम करने के लिए ये सभी पोषक और मिनरल आवश्यक हैं। किसी की भी कमी से एक प्रमुख या मामूली स्वास्थ्य समस्या हो सकती है जो आपकी बॉडी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।'

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विटामिन डी की कमी

हालांकि आपके पीरियड्स को एक मुद्दे के रूप में खुले तौर पर नहीं समझाया जा सकता है, लेकिन आपको अभी भी मूल तथ्य के बारे में यह जानना चाहिए कि मिनरल, पोषक तत्‍वों और विटामिन की कमी के कारण पीरियड्स और फर्टिलिटी से संबंधित सभी समस्याएं हो सकती हैं। अनुसंधान से पता चलता है कि बैलेंस और हेल्‍दी पीरियड्स सर्किल बनाए रखने के लिए हमारी बॉडी के लिए विटामिन डी आवश्यक होता है। अगर आप अपने पीरियड्स से संबंधित किसी भी समस्‍या का सामना करती हैं, तो यह सही समय हैं कि आपको अपने विटामिन डी के लेवल को चेक करवाना चाहिए।

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इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक कामकाजी महिला या एक गृहिणी हैं; यह कमी किसी में भी हो सकती है। यहां सवाल यह है कि यह कैसे पहचानने की है कि यह कमी है?
इसके लिए, आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए और अगर वह आपको ब्‍लड टेस्‍ट करवाने की सलाह दें तो इसे करवा लें।
सभी menstrual, pre-menstrual और post-menstrual syndrome का जो हर महिला समाना करती हैं, विटामिन डी की कमी इस समस्या का कारण है

कैल्शियम के अवशोषण के लिए विटामिन डी आवश्यक है, और इसके लक्षण पीएमएस और menstrual symptoms के लक्षणों को खराब कर सकते हैं क्योंकि इन लक्षणों को दूर करने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। regular periods के लिए, आपको विटामिन-डी के लेवल को बनाए रखना जरूरी है।


विटामिन डी की कमी के कारण mood swings, headaches और sleep disorders भी हो सकते हैं। इसके कारण कैल्शियम की कमी भी हो सकती हैं जिससे हड्डी और मसल्‍स के साथ-साथ depression भी हो सकता है। कई शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं में बढ़ते दर्द और विटामिन डी की कमी के बीच एक संबंध है। इसका मतलब है कि विटामिन डी के लेवल के बढने से harsh period cycles से निपटा जा सकता है। विटामिन डी पीसीओएस में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, एक सामान्य endocrine disorder जो हार्मोन असंतुलन और अनियमित अवधियों के कारण होता है।

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विटामिन डी कैसे हेल्‍प कर सकता है?

पीरियड्स के कई लक्षण जैसे nausea, cramping, diarrhea, bloating, vomiting और सोने में परेशानी शामिल हैं। इस समय के दौरान Prostaglandins के उत्‍पादन इन लक्षणों के लिए जिम्‍मेदार है। विटामिन डी इस हार्मोन के निर्माण को कम करने के लिए काम करता है, इसलिए यह पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्दपूर्ण साइड इफेक्‍ट से राहत देता है।

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पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी और कैल्शियम लेने से आप हार्मोनल इनबैलेंस और fluctuations के प्रभाव को कम करने में हेल्‍प मिलती हैं, जिसके परिणामस्वरूप आपको एक हैप्‍पी और healthier पीरियड्स होते है। इससे menses के अप्रिय प्रभाव भी कम हो जाते हैं।

कहां से मिल सकता है विटामिन-डी

जो महिलाएं यह जानती है कि वह विटामिन डी के dietary supplements ले रही हैं उनके लिए यह भी जानना जरूरी हैं कि वह उसकी पर्याप्‍त nutritional value ले भी रही हैं या नहीं। आमतौर पर बॉडी के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के विटामिन डी आवश्यक हैं। विटामिन डी 2 जो सूर्य की किरणों के संपर्क में आने पर शरीर द्वारा निर्मित होता है दूसरा विटामिन डी 3 एक natural version है जो कई फूड्स के साथ ही सप्‍लीमंट में पाया जाता है।



विटामिन डी एक viable dietary source है जो आपके menstrual cycle के flow को नियंत्रित और बनाए रखता है। इसलिए विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा आपके लिए लेना जरूरी है। विटामिन डी की कमी के कारण, आपके शरीर में हार्मोन अस्थिर हो जाते हैं जिससे irregular और missed periods की समस्या पैदा हो जाती है। विटामिन डी के प्राथमिक स्रोतों में से एक सूर्य है। जी हां आपकी बॉडी सूरज और उसके किरणों के संपर्क में विटामिन डी का उत्पादन करती है। लेकिन यह अकेले ही आपकी बॉडी में हार्मोन का बैलेंस बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, healthy monthly cycle को जारी रखने के लिए अन्य आहार पदार्थों का उचित अनुपात और मात्रा में उपभोग किया जाना चाहिए। उनमें से कुछ हैं:

  • फिश
  • चिकन
  • मछली के तेल से बने फूड
  • चीज
  • अंडे
  • सभी तरह के अनाज
  • संतरा और संतरे का जूस
  • सोया मिल्‍क
  • अन्‍य डेयरी प्रोडक्‍ट

ये सभी विटामिन डी से समृद्ध हैं और मिनरलों का एक बेहतरीन स्रोत हैं जो आपको पीरियड्स को रेगलुर करने के साथ-साथ एक हेल्‍दी बॉडी को बनाए रखने में हेल्‍प करते हैं।