भूलने की आदत और याद्दाश्‍त या स्‍मरण शक्ति (मेमोरी) और एकाग्रता में कमी से संबंधित समस्याएं चिंतित करने वाली हो सकती हैं। उम्र के साथ यह समस्या बिगड़ सकती है, लेकिन यह युवा छात्रों को भी प्रभावित कर सकती हैं। यही कारण है कि माता-पिता हमेशा प्राकृतिक आयुर्वेदिक ब्रेन टॉनिक्स की तलाश में रहते हैं। अस्सी और नब्बे के दशक में पले-बढे प्रत्येक बच्चे को याद होगा कि उसने ऐसे टॉनिक का सेवन किया है। जैसा कि नतीजे सामने होंगे, उन टॉनिक से कई अन्य लाभ भी प्राप्त हुए होंगे जिसके बारे में कई लोगों को महसूस भी नहीं होता। सबूत दर्शाते हैं कि मेमोरी से जुड़ी समस्या, ध्यान भटकना और ब्रेन डिजनरेशन से निपटने में प्राचीन आयुर्वेद की गहरी जानकारी बेहद प्रभावकारी होती है। ब्रेन पॉवर बढ़ाने के लिए इस आर्टिकल में कुछ आसान आयुर्वेदिक टिप्स और उपाय दिए जा रहे हैं और इन टिप्‍स के बारे में हमें आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट Dr. Vaidya बता रही हैं।

ब्राह्मी

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इस शक्तिशाली जड़ी-बूटी को लगभग प्रत्येक शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथ में ब्रेन की शक्ति बढ़ाने वाली औषधि के रुप में लेने की सलाह दी गई है। आज ब्रेन के कार्य को बढ़ाने के लिए किसी भी आयुर्वेदिक टॉनिक में यह सबसे महत्वपूर्ण सामग्री होती है। इस तरह यह जड़ी बूटी असरकारक है क्योंकि इससे तनाव व एंग्‍जाइटी से राहत मिलती है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार आता है। इसके साथ ही इससे नर्व सेल डेन्ड्राइट्स की लंबाई में वृद्धि द्वारा सीधे तौर पर मेमोरी, सीखने और ब्रेन के अन्य कार्यों को बढ़ावा मिलता है।

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अश्वगंधा

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अश्वगंधा सर्वश्रेष्ठ गुणों से भरपूर एक जड़ी-बूटी है जिसके प्राकृतिक शरीर-गठन या इम्‍यून सिस्‍टम सशक्त करने वाले प्रभाव के बारे में प्रत्येक भारतीय फिटनेस के शौकीनों को जानकारी है और इसके साथ ही इसमें मेमोरी बढाने के फायदे भी मौजूद होते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए यह आश्चर्यजनक नहीं है क्योंकि उन्हें इसके मानसिक और शारीरिक तनाव के उपचार करने की क्षमता के बारे में जानकारी होती है। इस जड़ी बूटी से ब्रेन में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में कमी आती है और इससे ब्रेन सुचारु और हेल्‍दी तरीके से काम कर पाता है। इससे न सिर्फ याद्दाश्‍त और ध्यान केन्द्रित करने की शक्ति को मज़बूत किया जा सकता है बल्कि इसके साथ ही डिजनरेटिव ब्रेन की बीमीरियों के खतरों को कम किया जा सकता है। 

शंखपुष्पी

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आयुर्वेदिक औषधि में शंखपुष्पी दूसरी सबसे मूल्यवान जड़ी-बूटी है। ब्राह्मी की तरह, इसका इस्तेमाल ब्रेन को आराम देने और मेमोरी बूस्‍टर के रुप में भी किया जाता है। इससे ब्रेन को शांत करने वाला प्रभाव प्राप्त होता है और तनाव, टेंशन व एंग्‍जाइटी में कमी आती है। इससे एकाग्रता और ध्यान फोकस करने में सुधार आता है, मानसिक चिंताओं और ध्यान भटकने जैसी समस्या में कमी आती है। राहत देने वाले प्रभाव वाली इस जड़ी-बूटी से अच्छी नींद आने में भी हेल्‍प मिलती है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि आयुर्वेद ब्रेन के सुचारु और स्वस्थ रुप से काम करने के लिए नींद के महत्व पर ज़ोर देता है।

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मेडिटेशन

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अन्य स्वास्थ्य प्रणालियों के विपरीत आयुर्वेद न सिर्फ मेडिटेशन करने के लिए प्रोत्साहन देता है, बल्कि यह वास्तविक रुप से आयुर्वेदिक जीवनशैली का ही एक हिस्सा है। आयुर्वेद एक समग्र दृष्टिकोण का फॉलो करता है और यह केवल औषधि के बारे में नहीं है बल्कि यह जीवनशैली में बदलाव लाने की ज़रुरतों पर भी खास ज़ोर देता है। अच्छी स्मरण शक्ति और ध्यान फोकस करने की योग्यता के लिए तनाव में कमी और पर्याप्त नींद महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। यह मेडिटेशन को ब्रेन पॉवर बढ़ाने वाला सबसे उपयोगी साधन बनाता है- इसमें कोई खर्च नहीं आता है और इसका अभ्यास कभी भी और कहीं भी किया जा सकता है। ध्यान करने के इतने फायदे हैं कि पश्चिमी चिकित्‍सा में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए इसका थेरेपी की तरह इस्तेमाल किया जाता है। योग द्वारा ब्रेन को शांत किया जा सकता है और एन्डोर्फिन के स्राव में वृद्धि की जा सकती है और इस प्रकार आयुर्वेदिक जीवनशैली में ध्यान के साथ-साथ योग एक जबरदस्त संकलन हो सकता है।

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शक्कर को ना कहें

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किसी भी आयुर्वेदिक आहार में सबसे पहला नियम है। प्रक्रिया किए गए खाद्य पदार्थों का त्याग करना और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के सेवन पर ज़ोर देना। स्नैक्स और पेय पदार्थों के बारे में यह खासतौर पर महत्वपूर्ण है जिसमें अतिरिक्त शक्कर होती है। ज़्यादातर भारतीयों को अब मोटापे और शक्कर के सेवन के बीच के संबंध के बारे में जानकारी है, लेकिन शक्कर के अत्यधिक सेवन से ब्रेन के घनफल में गिरावट होती है जिससे स्मरण शक्ति भी प्रभावित होती है। अतिरिक्त शक्कर को दूर करने और आयुर्वेद द्वारा बताए गए मीठे पदार्थ जैसे गुड़ और खजूर के सेवन से आपकी स्मरण शक्ति, ध्यान फोकस करने की क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

अधिकांश पत्रिकाओं के पृष्ठों की तुलना में प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में ज़्यादा ज्ञान पाया जा सकता है। इसलिए हमारी परंपरा और आयुर्वेदिक विरासत से प्राप्त सलाह को ठुकराने की जल्दबाजी मत कीजिए। अगली बार जब आपकी माँ या पिताजी या दादा-दादी आपको कई ऐसी सलाह दें तो उस पर अवश्‍य दें।

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