क्या है ग्रीन स्पेस थेरेपी? हरे-भरे माहौल में बिताएं बस 20 मिनट; बदलाव देख खुद चौंक जाएंगी आप

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में आधे से ज्यादा लोग तनाव से घिरे रहते हैं। काम का बोझ, पारिवारिक कलह और पैसों की दिक्कत, इंसान को तनाव का शिकार बना देती है। इससे बचने के लिए हम दवाइयों का सहारा लेते हैं। कई बार तो स्ट्रेस इतना बढ़ जाता है कि हमें डॉक्टर के पास जाना पड़ जाता है। हालांकि, इसका इलाज सिर्फ डॉक्टर या दवाइयों तक ही सीमित नहीं है। हमारे आसपास की चीजें भी हमें स्ट्रेस से छुटकारा दिला सकती हैं।
आज के समय में ग्रीन स्पेस थेरेपी (Green Space Therapy) पर जोर दिया जा रहा है। ये बहुत ही नॉर्मल लेकिन ऐसा तरीका है कि आपको फर्क खुद मालूम चलेगा। लखनऊ के डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव ने बताया इस थेरेपी में आपको हर दिन बस 20 मिनट हरे-भरे माहौल, जैसे कि पार्क या बगीचे में बिताने होते हैं। इससे आपके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं।
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क्या है ग्रीन स्पेस थेरेपी (Green Space Therapy)?
ग्रीन स्पेस थेरेपी एक नेचुरल थेरेपी है, जिसमें आपको नेचर और हरियाली से भरे वातावरण में समय बिताना होता है। इससे हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है। आपको बता दें कि पेड़-पौधे, घास और खुली हवा के बीच रहने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) का लेवल कम होता है और आपको मेंटल पीस (Mental Peace) मिलता है।
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क्या हैं इसके फायदे
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- 20 मिनट नेचर में समय बिताने को 'प्रकृति की खुराक' यानी Nature Pill कहा जाता है। ये कोर्टिसोल के लेवल को कम करने में मदद करता है। इससे आपके दिमाग को भी आराम मिलता है, जिससे तनाव कम होता है।
- खुली हवा में समय बिताने से एंडोर्फिन (खुशी देने वाले हार्मोन) का लेवल बढ़ता है। इससे आपका मूड तुरंत बेहतर होता है और आप ज्यादा पॉजिटिव फील करती हैं।
- ये फोकस बढ़ाने का भी असरदार तरीका है। अगर आप काम के बीच थोड़ा ब्रेक लेकर पार्क या गार्डन में समय बिताती हैं तो ये फोकस को बढ़ा सकता है।
- शाम के समय पार्क में जाने से आपका दिमाग रिलैक्स महसूस करता है। इससे आपको रात में नींद भी अच्छी आती है। अगले दिन आप फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस करते हैं।
- पार्क में वॉक करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। हर्ट बीट भी बेहतर होती है और विटामिन-डी मिलता है। इससे आपकी इम्युनिटी भी स्ट्रॉन्ग होती है।
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ये 20 मिनट की थेरेपी आपके रूटीन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है। इस दौरान अपने फोन को दूर रखें और नेचर की आवाजों जैसे पक्षियों का चहचहाना, हवा का शोर, इन सब पर ध्यान दें। गहरी सांस लें और अपने शरीर को रिलैक्स महसूस करें।
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