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अगर आपको भी नींद न आने की परेशानी है तो ये खबर आपके लिए है..

नींद को लेकर एक स्टडी की गई है जिसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भारतीयों के लिए ये खास खबर है जो उनकी सेहत से जुड़ी हुई है। 
Updated:- 2019-11-01, 16:00 IST
sleeping disorders in indians

आलस की परिभाषा क्या है? आप इसे क्या कहेंगे? एक्टिव न होना, किसी काम को करने से आना-कानी करना या फिर उसे टालना और किसी काम को करने का मन न होना ये सब कुछ इसमें शामिल हो सकता है। पर असल में दिक्कत ये है कि यहां अपनी फिटनेस को लेकर भी आलस किया जाता है। यहां के लोग एक्टिव नहीं हैं और न ही पूरी नींद लेते हैं। ये मैं नहीं कह रही ये Fitbit की एक स्टडी से सामने आया है। इस स्टडी में 18 देशों के लोगों का डेटा देखा गया था और जो नतीजे सामने आए हैं वो चिंताजनक हैं।  

भारतीय हैं सबसे कम एक्टिव-  

भारत सबसे कम एक्टिव देशों में से एक है। 18 देशों की स्टडी में भारत सबसे नीचे आया है। यानी सबसे कम एक्टिव। अगर बात करें ब्रिटेन, अमेरिका, जापान, सिंगापुर की तो वहां लोग ज्यादा एक्टिव रहते हैं और ज्यादा चलते हैं, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है।  

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हर रोज़ इतने कदम चलते हैं भारतीय- 

हर रोज़ की एक्सरसाइज स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन भारत में लोग दिन में औसत सिर्फ 6533 कदम ही चलते हैं। ये बाकी देशों के मुकाबले 3600 कदम कम है। अगर मिनटों में तुलना करें तो एवरेज एक्टिव मिनट सिर्फ 32 ही रहते हैं।  

नींद को लेकर चिंताजनक नतीजे- 

सबसे बुरी बात तो नींद को लेकर है। लगभग हर स्वास्थ्य संस्था यहां तक कि WHO की तरफ से भी ये कहा गया है कि इंसान के लिए नींद सबसे ज्यादा जरूरी है। सही नींद के फायदे बताने की शायद जरूरत नहीं है। स्टडी में सामने आया है कि भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां सबसे कम नींद ली जाती है। हर भारतीय औसत 7 घंटे 1 मिनट की नींद लेता है। जो ब्रिटेन के यूजर्स से 48 मिनट कम और अमेरिका के यूजर्स से 32 मिनट कम है। यानी भारत में लोगों को नींद से जुड़ी समस्याएं बहुत ज्यादा हैं। इसका कारण स्ट्रेस, स्लीप डिसऑर्डर, आरामदायक माहौल, काम का प्रेशर, घर के हालात या वर्क कल्चर कुछ भी हो सकता है। 

sleep cycle

सबसे ज्यादा सुखभरी नींद लोग आयरलैंड में लेते हैं जहां एक व्यक्ति औसत 7 घंटे 57 मिनट की नींद लेता है। 

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REM स्लीप को लेकर खुलासा- 

स्टडी में सामने आया है कि एक एवरेज भारतीय 77 मिनट की REM स्लीप लेता है जो जापान के बराबर ही है। REM स्लीप यानी रैपिड आई मूवमेंट स्लीप। ये बहुत जरूरी है लोगों की भावनाओं के लिए, याद्दाश्त के लिए, यही नहीं शरीर में प्रोटीन की मात्रा को सही रखने के लिए भी और शरीर के सेल सही रखने के लिए भी। यानी ये नींद शरीर के कई काम सही रखने के लिए जरूरी है, लेकिन भारतीयों को ये कम मिलती है। ये कई स्टेज में होती है और नैशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक एक व्यक्ति को कम से कम 90 मिनट की REM स्लीप बहुत जरूरी होती है। 

 

यानी अगर आपको तनाव होता है फिर स्वास्थ्य संबंधित कोई समस्या होती है तो उसका कारण नींद भी हो सकती है। अगर आप पूरी नींद नहीं ले रही हैं तो ऐसा न करें। नींद पूरी लें और साथ ही साथ अपनी एक्टिव लाइफस्टाइल का भी ख्याल रखें। अगर ऐसा नहीं होगा तो धीरे-धीरे कर स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ती चली जाएंगी। इस रिपोर्ट ने काफी चिंताजनक बातें बताई हैं और ये यकीनन हमारे लिए सोचने वाली बात है। 

 

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