घर और ऑफिस की तमाम जिम्मेदारियां संभालते हुए अक्सर आपको अपने लिए समय नहीं मिल पाता। कभी आप अपनी एक्सरसाइज मिस कर देती हैं तो कभी नींद पूरी नहीं कर पातीं। हेल्दी डाइट लेने में भी आपसे लापरवाही हो ही जाती है, लेकिन इसे अपनी आदत न बनाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी आपका हेल्दी लाइफस्टाइल ही आपको Parkinson's disease से बचा सकता है। एल्जाइमर के बाद पार्किन्सन्स डिजीज (पीडी) दूसरी सबसे बड़ी neurodegenerative condition है। एक आंकड़े के अनुसार दुनियाभर में 7-10 मिलियन लोग इस बीमारी के शिकार हैं। 

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पार्किन्सन्स डिजीज नर्वस सिस्टम की एक ऐसी बीमारी है, जिसमें दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन बनना बंद हो जाता है। डोपामाइन कम बनने से शरीर के मूवमेंट्स के साथ इमोशन्स को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। इससे जुड़े चार मुख्य लक्षण हैं। पहला शरीर कांपना, जिसका असर हाथ और पैरों पर खासतौर पर नजर आता है, दूसरा मांसपेशियों का अकड़ जाना, तीसरा शरीर का मूवमेंट धीमा हो जाना और चौथा संतुलन स्थापित करने और चलने में परेशानी महसूस करना। इसके अलावा depression, constipation, sleep disturbances और cognitive issues भी हो सकते हैं। 

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कैसे होती है ये बीमारी

हालांकि यह सभी जानते हैं कि डोपामाइन की कमी से इस बीमारी के लक्षण नजर आने लगते हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि इससे जुड़े ब्रेन सेल्स के कमजोर पड़ने की वजह क्या होती है। जेनेटिक और पेथोलॉजिकल स्टडीज में पाया गया है कि कई डिस्फंक्शनल सेल्युलर प्रक्रियाओं, जलन महसूस होने और तनाव के मिले-जुले असर से सेल नष्ट होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इस बीमारी के होने की आशंका और बढ़ती जाती है। अमूमन यह बीमारी 60 साल के बाद होने की आशंका रहती है। फैमिली में किसी को यह बीमारी होने पर भी कुछ महिलाएं इसकी शिकार होती हैं। साथ ही Head trauma, अन्य किसी तरह की बीमारी या environmental toxins जैसे कि pesticides और  herbicides के संपर्क में आने पर भी यह बीमारी होने का जोखिम रहता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गलत खानपान, एक्सरसाइज नहीं करने, स्ट्रेस होने आदि से इस बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है। इस बीमारी का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन कुछ दवाएं लेने से इसके लक्षणों को कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे मरीज के लिए स्थितियां थोड़ी बेहतर हो जाती हैं। 

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हेल्दी डाइट से मिलता है आराम

इस बीमारी में सेहतमंद खाना लेना बहुत महत्वपूर्ण है। बीमारी को रोकने और हेल्दी रहने के लिहाज से आपको अपने रोजमर्रा के खाने में हरी सब्जियां, फ्रूट्स, हाई प्रोटीनयुक्त डाइट, विटामिन्स, मिनरल्स और गुड फैट लेने चाहिए, वहीं कार्बोहाइड्रेट्स और जलन पैदा करने वाले फूड आइटम्स की मात्रा में कमी लानी चाहिए। 

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एक्सरसाइज है फायदेमंद

अगर आप हल्की-फुल्की एक्सरसाइज कर लेती हैं तो यह बीमारी होने की आशंका बहुत हद तक कम हो जाती है। एक्सरसाइज से शरीर में खून का दौरा बना रहता है, जिससे शरीर को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। इससे दिमागी कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं। हालांकि अगर किसी को यह बीमारी हो चुकी है तो उसके असर की वजह से एक्सरसाइज का फायदा नहीं मिल पाता।  

आराम के लिए भी निकालें वक्त

अगर आप हमेशा काम में ही मसरूफ रहती हैं तो जरा ठहरिए। नींद आपके दिमाग के ठीक तरह से काम करने के लिए बहुत जरूरी है। आराम करने ने याद्दाश्त अच्छी रहती है और टॉक्सिन्स को बाहर करने में भी मदद मिलती है। अगर आराम नहीं मिले तो दिमाग को ऐसे काम करने के लिए वक्त नहीं मिलता, जिससे neurodegenerative diseases होने का खतरा बना रहता है और इसमें पीडी भी शामिल है।

मेडिकल प्रॉबलम्स में ना करें लापरवाही

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अगर आप अपनी हेल्थ को लेकर बहुत सतर्क नहीं रहतीं और आमतौर पर होने वाली मेडिकल प्रॉबलम्स का इलाज कराने के लिए वक्त नहीं निकालतीं तो इसके कारण बाद में पीडी होने का खतरा बना रहता है। मसलन मोटापे से डोपामाइन के स्तर में बदलाव आ जाता है। इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि 50 के आसपास पीडी का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। Insulin resistance, high blood pressure, high triglycerides, low HDL और inflammation के कारण भी पीडी होने का जोखिम बना रहता है।

सिर की चोट से बचना जरूरी

सिर में लगी चोट से कई साल बाद भी पीडी होने का खतरा रहता है। दिमाग की गंभीर चोट से शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस या हमेशा के लिए याद्दाश्त जाने, किसी को पहचानने और संतुलन स्थापित करने में मुश्किल आ सकती है। बार-बार लगने वाली चोटों से यह प्रॉब्लम और सीरियस होने का जोखिम रहता है। अगर ब्रेन इंजरी के कारण बेहोशी आ जाए, भूलने लगें या अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो भी पीडी होने की आशंका रहती है। 

एल्जाइमर्स, डिमेंशिया, कैंसर और अन्य बीमारियों की तरह पार्किन्सन्स डिजीज से बचने का भी सबसे कारगर तरीका यही है कि आप ब्रेन के लिहाज से हेल्दी और proactive लाइफस्टाइल अपनाएं।