आखिर क्यों महिलाओं में बढ़ जाता है Heart Disease का खतरा? डॉक्टर ने बताई वजह और बचाव के तरीके

आजकल की भागदाैड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत का सही तरीके से ख्याल नहीं रख पा रहे हैं। खराब खानपान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करने से उन्हें कई तरह की बीमारियां घेर रहीं हैं। इससे मोटापे की समस्या तो देखने को मिल ही रही है, साथ ही डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। दिल की बात करें तो ये हमारे शरीर का जरूरी हिस्सा है। ये पूरे शरीर में ब्लड पंप करता है। इससे हमारे सेल्स तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व आसानी से पहुंच जाते हैं।
अगर अपने रूटीन पर ध्यान न दिया जाए तो इससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। आज हम आपको महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ने के कारणों के बारे में बताएंगे। इसके लिए हमने डॉ. दिवाकर कुमार (कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी यूनिट-II, एशियन हॉस्पिटल) से बात की। डॉक्टर ने इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आइए जानते हैं -
डॉक्टर ने बताई ये वजह
डॉक्टर ने कहा कि महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। हार्मोनल बदलाव, खासकर मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाना, दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। इसके अलावा आज की अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खराब और अनियमित खानपान, स्ट्रेस, मोटापा, स्मोकिंग और डायबिटीज जैसी स्थितियां भी महिलाओं में हार्ट डिजीज काे बढ़ा रही हैं।

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महिलाओं में दिल की बीमारियों के लक्षण
कोई भी बीमारी होने पर हमारे शरीर में उसके लक्षण पहले ही नजर आने लगते हैं। ऐसे में दिल की बीमारी होने पर ये संकेत दिखते या महसूस होते हैं, जिन्हें पहचानना बहुत जरूरी हैं-
- सीने या बाएं स्तन में दर्द होना
- पीठ, गर्दन, जबड़े या दांत में दर्द
- कंधे, बाजू या पैरों में दर्द या भारीपन
- बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
- सांस फूलना
- चक्कर आना या बेहोशी
- गर्मी लगना या पसीना आना
- अपच, उल्टी या मतली
- भूख कम लगना
- सिरदर्द
- आंखों में धुंधलापन
- हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
डाॅक्टर दिवाकर कुमार ने कहा कि महिलाओं को चाहिए कि वे इन संकेतों को हल्के में न लें और नियमित रूप से अपनी दिल की जांच करवाती रहें। इससे बीमारी का पता समय से लग सकेगा।

महिलाओं में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
- हाई कोलेस्ट्रॉल: 65 साल के बाद महिलाओं में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का कम हाेना ज्यादा खतरनाक साबित होता है।
- डायबिटीज: महिलाओं में डायबिटीज होने पर भी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
- हाई ब्लड प्रेशर: 60 साल के बाद महिलाओं में ये दिक्कत बढ़ जाती है, सही इलाज न मिल पाने से दिल की बीमारी बढ़ सकती है।
- मेनोपॉज: एस्ट्रोजन का लेवल कम होने से ब्लड क्लॉट, हाई कोलेस्ट्रॉल और नसों के सख्त होने का खतरा बढ़ जाता है।
- मोटापा: पेट पर चर्बी बढ़ना भी हार्ट डिजीज का खतरा तीन गुना बढ़ा देता है।
- वर्कआउट में कमी: एक्सरसाइज न करने से भी महिलाओं में ये बीमारी देखने को मिलती है।
- स्मोकिंग: महिलाएं अगर स्माेक करती हैं तो हार्ट अटैक का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है।
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