कत्था कई मायने में शरीर के लिए है फायदेमंद, आप भी जानें

अगर आप पान खाने के शौक़ीन हैं तो आप बिना कत्था के पान शायद खाते भी नहीं होंगे। कत्थे के बिना पान कप्भी स्वाद दे ही नहीं सकता। लेकिन, पान में डालने वाले कत्थे के फायदे में बारे कभी आपने सुना है? अगर नहीं, तो आज हम आपको पान में इस्तेमाल होने वाले कत्था के बारे में बताने जा रहे हैं। जी हां, पान में उपयोग होने वाले कथई रंग का कत्था कई औषधीय गुणों से भरा होता है। इसके नियमित सेवन से कई बीमारी आसानी से दूर हो जाती है। तो बिना देर किये हुए चलिए जानते हैं कि कत्था खाने से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं।
करें दूर दातों की बीमारी

जी हां, कत्थे को नियमित रूप से सेवन करने दातों की बीमारी आप दूर कर सकती हैं। इसके लिए आप कत्थे को मंजन में मिलाकर दांतों और मसूढ़ों को नियमित रूप से साफ करने पर दांत के लगभग सभी रोग आसानी से दूर हो जाते हैं। इसका इस्तेमाल करते समय ध्यान रहे इस साथ अधिक इस्तेमाल नहीं करना बल्कि, आधी से एक चुटकी ही मंजन में मिक्स करें।
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मुंह के छाले करें दूर

आपने कई बार सुना होगा की अगर कोई व्यक्ति मुंह के छाले से परेशान रहता है, तो कई लोग पान खाने की सलाह देते है। दरअसल, वो ये बोलना चाहते हैं कि जब आप पान का सेवन करें तो पान में कत्था लगा के ज़रूर सेवन करें। पान में कत्था लगाकर एक से दो बार सेवन करने से मुंह के छाले आसानी से दूर हो जाते हैं।
खट्टी डकार करें दूर

अब तब तो आप जान ही गए होंगे कि कत्था कितना फायदेमंद है। खैर, अगर आप हमेशा खट्टी डकार से परेशान रहती हैं, तो डकार को दूर करने के लिए भी आप कत्थे का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके लिए आप सुबह शाम एक से दो चम्मच ग्राम पानी में कत्था पाउडर को मिक्स करके सेवन करें। इससे खट्टे डकार की समस्या आसानी से दूर हो जाएगी।
गले की खराश

अगर आप बदलते मौसम में गले की खराश में हमेशा परेशान रहती हैं, तो उसे दूर करने के लिए कत्थे का भी इस्तेमाल कर कर सकती है। इसके लिए आप कत्था पाउडर को गरम पानी में मिक्स करके या फिर कत्था पाउडर को चूसने से भी गले की खराश को दूर कर सकती हैं। कई लोग इसे सर्दी-जुकाम के लिए कारगर दवा मानते हैं।
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क्या और कैसे बनता है कत्था?

कत्था, खैर के वृक्ष की लकड़ी से निकाला जाता है। यह एक औषधीय पेड़ ही है। कहा जाता है कि आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार की दवाओं को बनाने में कत्था का उपयोग किया जाता है। खैर की लकड़ी से निकाले गये रस को गाढ़ा करके इसे बनाया जाता है और पान में लगाने के अलावा मसूड़ों की सूजन, दर्द और मुंह के छाले की समस्या को दूर करने के भी लिए इस्तेमाल किया जाता है।
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