वॉक करना हमारी जिंदगी के कुछ बहुत महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक माना जा सकता है और लाइफस्टाइल को सुधारने का सबसे पहला स्टेप चलना ही है। ये दिल का और हड्डियों का ख्याल रखने के लिए जरूरी है और ज्वाइंट्स की फंक्शनिंग के लिए भी बहुत आवश्यक है। हालांकि, चलते समय घुटनों का दर्द बहुत परेशानी भरा साबित हो सकता है। आपने डॉक्टर के मुंह से सुना होगा कि लगातार मूवमेंट करते रहना कितना जरूरी होता है। अगर आपको ओस्टियोआर्थराइटिस या किसी अन्य वजह से घुटनों का दर्द रहता है तो उसके कारण बैठे न रहें। वॉकिंग रूटीन शुरू करें जो सबसे असरदार साबित हो सकता है। 

वॉकिंग रूटीन निरंतर फॉलो किया जा सकता है और इसका असर धीरे-धीरे, लेकिन निरंतर होता रहता है। चलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये मसल्स को बनाने में मदद करती है जिससे चोट लगने या दर्द होने की गुंजाइश कम होती है। चलना कार्डियो के तौर पर भी अच्छी एक्सरसाइज है। इससे वजन भी कम होता है और ये घुटनों के जोड़ में प्रेशर और स्ट्रेस को भी कम करता है। हर पाउंड वजन (0.94 किलो) कम करने पर आपके घुटनों पर 4 गुना कम प्रेशर पड़ता है। 

चलने से हमारे शरीर की कार्डियोवस्कुलर सहनशीलता और दिल और ब्लड वेसल्स (नसों) को हेल्दी रखने की क्षमता भी बढ़ती है। आपके घुटनों के जोड़ हड्डियों और कार्टिलेज से बने होते हैं और चलने से ब्लड फ्लो बढ़ता है और इससे न्यूट्रिएंट्स ज्वाइंट्स तक पहुंचकर कार्टिलेज को ल्यूब्रिकेट करते हैं और ये हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरूरी है। आप ये कोशिश करें कि हर 15 मिनट में उठकर आप स्ट्रेच करें और इधर-उधर चलें। अपने ज्वाइंट्स को हिलाने-डुलाने से ये तय हो जाएगा कि घुटनों के कार्टिलेज को वो पोषण मिले जिससे वो ठीक रहे। 

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अगर आप भी घुटनों के दर्द की समस्या से परेशान रहती हैं तो हेल्थस्पेस क्लिनिक की सह-संस्थापक, फिजियोथेरेपी विभाग की प्रमुख डॉक्टर रूपा मेहता आपके साथ इस समस्या से बचाने वाले कुछ टिप्‍स शेयर कर रही हैं।  हेल्दी वॉकिंग रूटीन बनाने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें-

अन्य एक्टिविटी पर भी ध्यान दें-

चलना सबसे आसान फॉर्म है फिजिकल एक्टिविटी का और ये ज्वाइंट हेल्थ को ठीक करने में मदद कर सकता है। हालांकि, सिर्फ यही ऑप्शन है ऐसा नहीं है। आपके संवेदनशील घुटने अगर आपको ज्यादा चलने नहीं दे रहे हैं तो आप अन्य फिजिकल एक्टिविटी जैसे साइकलिंग, पूल एक्सरसाइज, स्विमिंग, वाटर एरोबिक्स आदि पर ध्यान दे सकते हैं। स्टेशनरी बाइक (एक ही जगह रुकी रहने वाली बाइक) पर साइकिलिंग करने की कोशिश करें, बाइसाइकिल भी चला सकते हैं, अपने मसल्स को शेप में रखते हुए ही आप घुटनों को बेहतर सपोर्ट दे सकते हैं। आप पूल में चलने की कोशिश कर सकते हैं जिससे ज्वाइंट्स का प्रेशर कम होता है।  

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6000 स्टेप्स प्रतिदिन चलने की कोशिश करें-  

स्टडीज का कहना है कि ऑस्टियोअर्थराइटिस से ग्रसित लोगों को 6000 स्टेप्स प्रति दिन चलने से काफी फायदा मिलता है। आप धीरे-धीरे इस नंबर को बढ़ा सकते हैं और ऐसे में आपको दर्द भी नहीं होगा। बड़ी बात ये है कि आप 30 मिनट हर रोज़ अपनी एक्सरसाइज को दें। शुरुआत धीरे-धीरे करें जिससे सहनशक्ति बढ़े और फिर ब्रिस्क वॉक करने की कोशिश करें और ज्यादा चैलेंजिंग एक्सरसाइज करें। 

 नरम सतह पर चलने की कोशिश करें- 

 आप सबसे पहले शुरुआत ढलान पर चलने से करें। हालांकि, प्राकृतिक सतह जैसे मिट्टी, धूल, कंकड़ आदि पर चलना ज्वाइंट्स पर आसान होता है। वैसे तो कई बार प्राकृतिक सतहें सही बैलेंस बनाने के लिए अच्छी होती हैं।  

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सही जूते चुनें- 

जितना चलना जरूरी है उतना ही सही जूते भी जरूरी हैं जो फ्लैट और फ्लेक्सिबल हों। ध्यान ये रखें कि आपके जूते सामने की ओर से ठीक से मुड़ने वाले हों। बहुत हाई हील पहनने से बचें और नुकीले जूतों से बचें। ज्यादा भारी जूते भी आपको परेशान कर सकते हैं। ऐसे जूतों को चुनें जिनमें टो स्पेस (Toe space) ज्यादा हो। अगर हील 1.5 इंच भी ज्यादा हुई तो ये प्रेशर बढ़ा सकती है और इससे घुटनों को डैमेज हो सकता है।  

चलने के बाद कोल्ड पैक्स का इस्तेमाल करें- 

रेगुलर वॉकिंग रूटीन के कारण हो सकता है कि घुटनों में जलन, जकड़न और दर्द हो। ऐसे में आप कोल्ड पैक्स का इस्तेमाल कर सिकाई कर सकते हैं। इससे घुटनों की समस्या बढ़ेगी नहीं।  

घुटनों को मोड़ते हुए न चलें- 

अपने घुटनों को ज्यादा लचीला बनाने के लिए आप साइकलिंग जैसी कोई एक्सरसाइज कर सकते हैं। इसके अलावा, डॉक्टर से सलाह लें और फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट करवाएं, लेकिन अगर आपके घुटने पूरी तरह से मुड़ चुके हैं तो उस समय ज्यादा चलना नुकसानदेह साबित हो सकता है। फिजियोथेरेपी आपके घुटनों की मोबिलिटी बढ़ाएगी और एक बार घुटने सीधे हो गए तो आप वॉक करने की कोशिश करें।  

एक बार आप चलने को लेकर सतर्क हो गए तो आप इसे अपने वर्कआउट का हिस्सा बना सकते हैं। बस चलते-फिरते रहें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।