'अरे यार, ये कितनी कितनी अजीब लग रही है।', 'इतनी मोटी है, इस पर तो कोई भी कपड़ा नहीं जमता।', 'शीला, तुम साइड में खड़ी हो जाओ वरना हमारा पोज खराब हो जाएगा', 'मैडम हमारे पास आपके साइज के हिसाब से बस ये ही कपड़े हैं, हमारे पास कम ही स्टॉक होता है', क्या आप अपने मोटापे के बारे में महिलाओं के ताने सुनते-सुनते और नेगेटिव एक्सपीरियंस झेलते-झेलते थक गई हैं। आप ही नहीं बॉलीवुड की तमाम एक्ट्रेसेस ओवरवेट की शिकार रही हैं। बात चाहे सोनम कपूर आहूजा की हो या आलिया भट्ट की, भूमि पेडनेकर की हो या सोनाक्षी सिन्हा की, परिणीति चोपड़ा की हो या फिर करीना कपूर की, ये सभी एक्ट्रेसेस अपनी जीतोड़ मेहनत से परफेक्ट फिगर पाने में कामयाब रहीं।

बॉलीवुड एक्ट्रेसेस के वेट लूज करने के तरीकों से आप शायद खुद को रिलेट नहीं कर पाती हों। आपको ये भी लगता हो कि एक्ट्रेसेस के पास कई तरह की सहूलियतें होती हैं और वे आसानी से वेट लूज कर सकती हैं। तो आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं ऐसी महिला से, जिसने मोटापे के कारण मुश्किलों का सामना किया, जैसा कि एक आम महिला को फेस करना पड़ता है। इस महिला ने अपने हौसले की बदौलत ना सिर्फ वेट लॉस में सफलता हासिल की, बल्कि वेट लॉस के लिए अन्य महिलाओं को भी इंस्पायर करने की भी ठानी। बुलंद इरादों वाली यह महिला है दिल्ली की चर्चित फिटनेस ट्रेनर टीना चौधरी, जो महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। 

नहीं चला शुरुआती काम 

टीना शुरुआत से ही काम करना चाहती थीं। उन्होंने ई-मेल मार्केटिंग, टीशर्ट बनाने का बिजनेस, पेयिंग गेस्ट बिजनेस चलाने की कोशिश की, लेकिन किसी में कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने जॉब करनी शुरू की। टीना बताती हैं, 'मैंने बहुत से काम किए, रिसेप्शनिस्ट की जॉब की, प्लेस्कूल में कोऑर्टिडनेटर का काम किया। लेकिन इसमें भी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया।  स्कूल में काम करने के दौरान मुझे बहुत ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती थी। ऐसे ही एक स्कूल जॉब में मैं सेंट्रल हेड थी, मेरे पास बड़ी जिम्मेदारियां थीं, मैं अपना काम भी पूरी मेहनत से करती थी, लेकिन मेरी फिजीक के कारण मेरा बहुत ज्यादा मजाक बनता था। अक्सर जब ग्रुप फोटो क्लिक की जाती थीं, तो मुझे किनारे कर दिया जाता था, सोशल मीडिया पर फोटो डालते हुए कई बार मेरी फोटो काट दी जाती थी। इस प्रॉब्लम की जड़ थी मोटापा। इससे मेरा आत्मविश्वास कमजोर हो गया था। मैं लोगों के रिएक्शन से यह बात समझ गई थी कि उनके मुझे पसंद ना करने की वजह मोटापा ही है। उस समय में मैं 86 की थी। यूं तो मैं बचपन से ही हेल्दी थी, लेकिन प्यूबर्टी के बाद मैं मोटी हो गई और उसके बाद मुझे अस्थमा हो गया। 

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छोटे कदमों से की नई शुरुआत

टीना ने लव मैरिज की थी। उस समय में वह बहुत ज्यादा मोटी नहीं थीं, उनका वजन 68-70 के करीब था, लेकिन शादी के बाद उनका वजन बढ़ता गया और वह ओबीस शादी के बाद हो गई। अपनी जॉब और तमाम बुरे एक्सपीरियंस से गुजरने के बाद टीना ने ठान लिया था कि उन्हें वेट लॉस को सक्सेस बनाना है। उन्होंने इसके लिए अपनी तरफ से छोटे-छोटे प्रयास शुरू किये और उन्हें आगे की राह मिलती गई। टीना बताती हैं, 'वर्कआउट जैसा कुछ होता है, मुझे पता ही नहीं था, अपनी वॉक करना शुरू किया, सोसाइटी में मैंने योग सीखना शुरू किया, उससे मैंने दो ढाई किलो घटाया। इसके अलावा वजन घटाने के लिए मैं अपने बच्चे के साथ बैडमिंटन खेलती थी। चूंकि मैं मोटापे की आलोचना से डरती थी और कॉम्प्लेक्स का शिकार थी, इसीलिए पूरे कपड़े पहन कर स्वीमिंग करती थी। इससे मेरी बॉडी वार्मअप मोड में आ गई।'

 teena chaudhry inside

इस राह पर चलना टीना के लिए आसान नहीं था, शुरुआत में वह काफी थक जाती थीं लेकिन ग्रेजुअली उनका स्टेमिना बढ़ने लगा। वह बताती हैं, ' मैंने महसूस किया कि अगर हममें इच्छाशक्ति है तो हमारी बॉडी भी धीरे-धीरे हमें सपोर्ट करना शुरू कर देती है। वॉकिंग,  योग,  स्वीमिंग, जिम आदि से मेरे पतले होने की शुरुआत हो गई। चूंकि मैं हाउसवाइफ थी, इसलिए ये सारे काम कर लेती थी। सबसे बड़ी बात जिम में मैं जो एक्सरसाइज करती थी, उन्हें घर आकर भी दोहराती थी। इस तरह लगातार कोशिश करने पर मैंने 3 महीने में 26 किलो लूज किया।' 

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भाई ने ट्रेनर बनने के लिए किया प्रेरित

35 साल की उम्र में स्लिम होने के बाद टीना खाली नहीं बैठना चाहती थीं। तब उनके भाई ने उनसे कहा, 'तुम वेट लॉस के लिए जितनी डेडिकेटेड हो, उतना कोई ट्रेनर ही हो सकता है, इसीलिए तुम्हें ट्रेनर बनना चाहिए और दूसरी महिलाओं एरोबिक्स करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।' टीना के पति इस बात से बहुत खुश नहीं थे, क्योंकि उनके लिए टीना को इस नए अवतार में देखना नई बात थी। हालांकि टीना का दिल रखने के लिए वह बहुत मना भी नहीं करते थे।'

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 मुश्किलों के बीच भी नहीं थमा सफर 

टीना नए काम की तलाश में थीं और उधर उनके पति पति काफी बीमार पड़ गए और इलाज के लिए मम्मी-पापा के घर चले गए। टीना बताती हैं, 'मैं बच्चों की देखरेख करती थी और मेरे हसबैंड मेरे पास कम आ पाते थे। उस समय में मेरे भैया ने सपोर्ट किया और मुझे ट्रेनर का कोर्स कराया। कोर्स पूरा करने के बाद पास के एक जिम में मेरे दोस्त बन गए और उन्होंने एक वॉर्मअप ट्रेनर के तौर पर काम करने के लिए मुझे इन्वाइट किया। मैंने 6-7 महीने 2-3 अलग-अलग जिम में वार्मअप ट्रेनिंग दी। मैं जितने लोगों को एक्सरसाइज कराती थी, वो सभी लोग पतले होने लगे। इतने अच्छे रिजल्ट की वजह से साथी इंस्ट्रक्टर्स को मुझसे जलन हो गई और इसी कारण मुझे दो जगहों से हटाया गया। मैं अपनी तरफ से पूरी डेडिकेशन के साथ लोगों को वेट लॉस के लिए प्रेरित करती थी, चूंकि मैंने खुद भी वेट लूज करके दिखाया था, इसीलिए मैं बेहतर रिजल्ट ला पाने में कामयाब हो रही थी। इसी बीच मेरे पति गुजर गए। इस मुश्किल वक्त में मैंने खुद को टूटने नहीं दिया और हिम्मत बनाए रखी। 

छोड़ी दी झिझक

वॉर्मअप ट्रेनिंग के दौरान टीना से प्रभावित हुए लोगों ने उन्हें घर आकर सिखाने के लिए ऑफर दिया था। टीना ने इसी पर काम करना शुरू किया। शुरुआती एक हफ्ते उन्होंने एक्सपीरियंस के लिए ट्रेनिंग दी। लोगों के घर जाकर उन्हें सिखाना टीना के लिए हिम्मत की बात थी, लेकिन उन्होंने खुद को स्ट्रॉन्ग बना रखा। टीना बताती हैं,'एक हफ्ता मैंने  फ्री में काम किया। उसके बाद मैंने 3000 रुपये में लोगों को घर पर सिखाया। इसके बाद मुझे अच्छा रेसपॉन्स मिलने लगा।

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ऐसे दिए अपने सपनों को पंख

टीना चौधरी को अर्बन क्लैप से काफी सपोर्ट मिला। अर्बन क्लैप की तरफ से टीना को उनका ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। टीना बताती हैं, 'इससे मुझे काफी काम मिला। मैं एक दिन में 8-9 ट्रेनिंग सेशन लेने लगी। सुबह साढ़े सात से रात के नौ बजे तक ट्रेनिंग देती थी। मैंने बच्चों की देखरेख के लिए घर में हेल्पर रखा, बच्चों के साथ बिताने वाला वक्त मिस किया, लेकिन इस बीच मैंने एक भी मौका हाथ से जाने नहीं दिया क्योंकि मेरे पास कोई चॉइस नहीं थी। 

ट्रेनर का सफर भी रहा चैंलेंजिंग

बतौर ट्रेनर भी टीना के लिए राहें आसान नहीं थीं, लेकिन उन्होंने हौसला बनाए रखा। वह बताती हैं, 'नए लोगों को यंग और स्मार्ट ट्रेनर चाहिए होते हैं, इस नाते लोग मेरा नाम पहले ही खारिज कर देते थे लेकिन जिन लोगों ने काम देखा था, वे मुझसे ही सीखना चाहते थे। कई-कई बार मैंने एक दिन में पूरी दिल्ली का सफर किया, चाहें मुझे पैसे कम मिले या या ज्यादा, मैं कहीं नहीं रुकी। मेरा एक ही सपना था कि लोग मुझे जान जाएं और एक दिन मैं टीना फिटनेस के जिम होने खोलूं।' 

बदल दिया सोचने का नजरिया

आज वह जहां भी जाती हैं, वहां उन्हें काफी अहमियत दी जाती है। टीना बताती हैं, 'अक्सर सोसाइटी में पतली और गुड लुकिंग महिलाओं को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। मोटापे की वजह से महिलाओं को नापंसद किया जाता है। हालांकि इसके पीछे कोई तर्क नहीं है लेकिन सोसाइटी की सोच ऐसी ही है। जब से मैं पतली हुई हूं, मेरे काम को काफी एप्रीशिएशन मिलने लगा है। घर-परिवार के लोग पहले से ही मेरे लिए सपोर्टिव रहे हैं और अब ट्रेनर के तौर पर मिली पहचान मुझे हर जगह तारीफें मिलने लगीं हैं। चाहें फैमिली हो या फ्रेंड सर्किल, मैं जहां भी जाती हूं, सेंटर ऑफ अट्रेक्शन होती हूं। अब मेरा सपना है कि मैं अपनी एक फिटनेस चेन खोलूं। मेरे फिटनेस सेंटर में इस तरह एक्सरसाइज कराई जाएं कि उससे लोगों को बेस्ट रिजल्ट मिले।'