हेल्‍दी रहने के साथ-साथ हर कोई सुंदर दिखना चाहता है। अधिक वजन वाली महिलाओं का न केवल साइज ज्‍यादा दिखाई देता है बल्कि वह अनहेल्‍दी भी हो सकती है। साथ ही पेट की अतिरिक्त चर्बी खतरनाक होती है। 

जी हां मोटापा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जो सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। यह अतिरिक्त विसेरल फैट का एक बाहरी संकेत है। लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि आप आयुवेर्दिक ट्रीटमेंट की मदद से इसे कम कर सकती हैं। इन उपायों के बारे में हमें वेद क्योर के फाउंडर और डायरेक्‍टर श्री विकास चावला जी बता रहे हैं। 

एक्‍सपर्ट की राय

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श्री विकास चावला जी का कहना है, ''आयुर्वेदिक वेट लॉस ट्रीटमेंट होलिस्टिक है और आपको अपने वजन को मैनेज करने में मदद करता है। एक ट्रेडिशनल आयुर्वेदिक वेट लॉस ट्रीटमेंट के दृष्टिकोण में हेल्‍थ को बढ़ावा देने के लिए सही लाइफ स्‍टाइल और अच्‍छी डाइट की सिफारिश की जाती है, जो मेटाबॉलिज्‍म को लगातार अनुकूलित करने में मदद करती है।''  

मोटापा, आज दुनिया में सबसे अधिक प्रचलित पोषण संबंधी समस्या है। यह शरीर में अधिक मात्रा में फैट के निर्माण के कारण होता है। एक गतिहीन लाइफस्‍टाइज के साथ हाई फैट और तले हुए खाद्य पदार्थों के निरंतर सेवन के कारण अतिरिक्त फैट शरीर के कई हिस्‍सों में जमा हो जाता है। मोटापा के कारण हाई ब्‍लड प्रेशर, डायबिटीज और असामान्य पाचन सहित मेटाबॉलिज्‍म संबंधी समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसका असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ सकता है। यदि अतिरिक्त वजन का प्रबंधन नहीं किया जाता है तो मोटापा विकसित हो सकता है।

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मोटापा नियंत्रित करने वाली जड़ी बूटियां

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मोटापे को कम करने के लिए ताजा करी पत्ता, हल्दी, पुदीना और मसाले जैसे अदरक, दालचीनी और काली मिर्च आसानी से उपलब्ध हैं। कमिफोरा मुकुल पेड़ से प्राप्त गोंद राल, गुग्गुल एक प्रसिद्ध प्राकृतिक सामग्री है जिसे एक बार परिष्कृत और ठीक से संसाधित करने के बाद फैट मेटाबॉलिक संबंधी समस्‍याओं के इलाज के लिए उपयोग किया जा सकता है। अध्ययनों में यह दिखाया गया है कि यह फैट सेल्‍स को तोड़ने में सक्षम है। आयुर्वेदिक वजन घटाने के उपचार में उपयोग की जाने वाली अन्य प्रसिद्ध जड़ी-बूटियों में कलौंजी (काला जीरा) और विजयसर (कीनो का पेड़) शामिल हैं।

मोटापा दूर करने के लिए भूमि आंवला

हमें मेटाबॉलिज्‍म में सुधार करने की आवश्यकता है क्योंकि मोटापा सीधे शरीर में मेटाबॉलिक प्रोसेस से संबंधित होता है। त्रिफला, वृक्ष आंवला (गार्सिनिया कैंबोगिया), कुटकी और त्रिकटु मेटाबॉलिज्‍म में सुधार करते हैं। चर्बी कम करने के लिए हमें शरीर में वजन बढ़ने के चक्र को तोड़ना होगा। ऊर्जा का सेवन, ऊर्जा व्यय और ऊर्जा भंडारण संतुलित होना चाहिए। भूमि आंवला का उपयोग करके शरीर में जमा फैट को बर्न करने में मदद मिलती है क्‍योंकि यह लिवर के लिए अच्छा है और शरीर से जमा फैट को निकालता है; यहां तक कि यह लिवर को डिटॉक्सीफाई भी रखता है। पुनर्नवा, अजमोड़ा और ग्रीन टी का अर्क भी अद्भुत तरीके से काम करता है।

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मोटापा दूर करने के लिए चिरायता

जब भी हम चीनी खाते हैं तो हमें शरीर में फैट ले जाने वाली कोशिकाओं को साफ करने की जरूरत होती है। ब्‍लड में शुगर को शुद्ध करने के लिए हमें चिरायता जैसे कड़वे तत्व लेने चाहिए जो ब्‍लड में फैट ले जाने वाले चैनल को साफ करते हैं। फिर हमारे पास हींग है क्योंकि यह पाचन और गैस्ट्रो रोगों में मदद करती है। दाल चीनी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए भी जरूरी है और हम इसमें नींबू का अर्क मिला सकते हैं।

जड़ी-बूटियों को इस्‍तेमाल करने का तरीका

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इन सभी जड़ी बूटियों को कच्चे रूप में (त्रिफला, वृक्ष आंवला, कुटकी, त्रिकटु, भूमि आंवला, पुनर्नवा, अजमोदा, हरी चाय का अर्क, हींग, चिरायता और दाल चीनी) प्राप्त कर सकते हैं, उन्हें पीसकर समान मात्रा में मिला लें, 15 ग्राम या उससे कम मात्रा में प्रत्येक में हींग मिलाएं। फिर इस मिश्रण का आधा चम्मच सेवन करने के लिए आधा गिलास पानी में उबाल लें। मिश्रण कड़वा होगा, इसलिए स्वाद को बेहतर बनाने के लिए इसमें नींबू या शहद मिला सकते हैं। 

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यह मिश्रण मेटाबॉलिज्‍म में सुधार करेगा और फैट बर्न करने में मदद करेगा। यह प्री-डायबिटिक लोगों के लिए शुगर को नियंत्रित करने में भी मददगार होगा। मोटापे की मात्रा के आधार पर मिश्रण को दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है।

साथ ही मोटापा कम करने के लिए ज्यादा खाना, शराब, मिठाई, ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, फास्ट फूड से बचना चाहिए। चीनी की जगह हम गुड़ भी ले सकते हैं। डायबिटीज और कोरोनरी धमनी रोग तब होता है जब कोई व्यक्ति क्रीम और फैट के साथ अधिक ठंडी चीजें लेता है। योग, सैर या व्यायाम जैसी शारीरिक गतिविधियों को भी रूटीन में शामिल करें। 

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