कुछ महीने पहले तक अगर कोई व्‍यक्ति फेस मास्‍क पहनकर बाहर निकल जाता था तो सबके आकर्षण का केंद्र बन जाता था। लेकिन आज वह नई जीवनशैली का प्रतीक बन गया है। इस साल की शुरूआत में अधिकारियों ने यही सुझाव दिया है कि सेहतमंद लोगों को बीमारी के डर या फिर सुरक्षित बने रहने की भावना से मास्‍क पहनना आवश्‍यक नहीं है। लेकिन कोविड नामक बढ़ती महामारी और हर दिन बढ़ती मौतों के साथ पूरी दुनिया की सरकारों ने लॉकडाउन के साथ-साथ सार्वजनिक जगहों पर मास्‍क पहनना अनिवार्य कर दिया है। 

चेहरे पर लिपटे स्‍कार्फ, सर्जिकल मास्‍क, एन95 रेसिपरेटर्स से लेकर कान से लटकी रचनात्‍मक एवं रंगबिरंगी किस्‍मों तक, एक्‍सपर्ट का मानना है कि जिन देशों में संख्‍या तेजी से बढ़ी है, वहां पर सार्वजनिक स्‍थानों पर मास्‍क का इस्‍तेमाल करना काफी है। दुर्भाग्‍य से भारी मांग एवं जमाखोरी के चलते कमर्शियल रूप से बनने वाले सर्जिकल मास्‍क एवं एन95 रेस्पिरेटर्स मिलना लगभग असंभव हो गया है। अगर वो वापस बाजार में आ जाएं तो मेडिकल मास्‍क इस महामारी से लड़ने वाले फ्रंटलाईन कर्मियों के लिए सुरक्षित रहने चाहिए। इसका मतलब है कि अगर लोगों को मास्‍क पहनकर बाहर निकलना है तो उन्‍हें 'डू इट योरसेल्‍फ' का तरीका अपनाना होगा। घर पर बने मास्‍क बेहतरीन व उपयोगी क्‍यों है? इसके 5 कारणों के बारे में ApnaMask.org की को-फाउंडर, पूनम कौल बता रही हैं।

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मेडिकल मास्‍क की मांग को सामान्‍य बनाने के लिए

सर्जिकल मास्‍क, रेस्पिरेटर मास्‍क की कमी वास्‍तविक है। ज्‍यादा मांग, जमाखोरी और दुरुपयोग के चलते मास्‍क की आपूर्ति में बढ़ती कमी के कारण लोगों की जिंदगी जोखिम में पड़ रही है। मास्‍क की कमी के चलते डॉक्‍टर, नर्स एवं फ्रंटलाईन कर्मियों को कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने के लिए आवश्‍यक सामग्री की जोखिमभरी कमी का सामना करना पड़ रहा है। होममेड मास्‍क को चुनकर लोग कमर्शियल रूप से निर्मित मास्‍क की मांग में कमी ला सकते हैं और मेडिकल कर्मियों के लिए आपूर्ति को बढ़ा सकते हैं।

घर में बने मास्‍क होते हैं किफायती और टिकाऊ

कमर्शियल मेडिकल और हाई क्‍वालिटी के एन-95 रेस्पिरेटर मास्‍क फ्रंटलाईन कर्मियों द्वारा इस्‍तेमाल किए जाते हैं, जबकि होममेड मास्‍क किफायती होते हैं और उनकी कीमत इस्‍तेमाल की गई सामग्री के आधार पर कम या ज्‍यादा होती है। सामान्‍य तीन परत का कॉटन मास्‍क सिलाई मशीन और सुई धागे के माध्‍यम से आसानी से बनाया जा सकता है। इसमें एक्‍स्‍ट्रा पैसा भी खर्च नहीं होता है। इनसे हवा आर-पार जा सकती है और इन्‍हें घरेलू सामग्री या घरेलू डिटरजेंट द्वारा धोया/डिसइन्‍फेक्‍ट किया जा सकता है इसे कई बार इस्‍तेमाल किया जा सकता है, जबकि कमर्शियल मास्‍क की सीमाएं होती हैं।

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होममेड मास्‍क हैं स्‍वच्‍छ और सुरक्षित 

अच्‍छी क्‍वालिटी के एन-95 रेस्पिरेटर मास्‍क ही जरूरी नहीं। जब लोग ग्रोसरी एवं अन्‍य जरूरी चीजों को खरीदने के लिए बाहर निकलते हैं तो एक सामान्‍य मास्‍क भी इन्‍फेक्‍शन का खतरा काफी कम कर सकता है। सरकार के मुख्‍य वैज्ञानिक सलाहकार ने डीआईवाई मास्‍क पर एक मैन्‍युअल निकाला है। इसके अनुसार, शोधकर्ताओं ने होममेड मास्‍क की प्रभावशीलता जांचने के लिए उन पर कोरोनवायरस से पांच गुना छोटे कणों की बौछार डाली। दो परत का प्‍योर कॉटन का कपड़ा कोविड-19 से संबंधित इन्‍फेक्‍शन को रोकने में 70 फीसदी प्रभावशाली पाया गया।

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मास्‍क बनाना होता है आसान

होममेड मास्‍क बनाना आसान होता है और इसके लिए आपको टेलर की जरूरत नहीं होती है। होममेड मास्‍क बनाने के लिए 100 प्रतिशत कॉटन फैब्रिक, कपड़े की स्ट्रिप, कैंची और सिलाई मशीन/सुई और धागे की जरूरत होती है। लोग ऑनलाइन डीआईवाई वीडियो या अनेक मैन्‍युअल देखकर मास्‍क बनाना सीख सकते हैं। इसलिए सिलाई के लिए टेलर के पास जाने की जरूरत भी नहीं होती है या फिर मास्‍क बनाने की प्रक्रिया के लिए किसी आउटसोर्सिंग की जरूरत नहीं।

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होममेड मास्‍क को किया जा सकता है कस्‍टमाईज 

सरकारी मैन्‍युअल में बताया गया है कि कोई भी उपयोग किया हुआ कॉटन का कपड़ा, वेस्‍ट या टीशर्ट को मास्‍क बनाने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इसके कलर या पैटर्न से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जब इन्‍फेक्‍शन को रोकने के लिए मास्‍क अनिवार्य कर ही दिए गए हैं तो फिर उनमें फैशन का समावेश क्‍यों न किया जाए? मास्‍क घर पर आसानी से बनाए जा सकते हैं। एक बार इसके मौलिक सिद्वांतों (परतों, प्रभावशीलता व सहजता) को समझ लिया जाए, तो मास्‍क को बाहरी ओर से सिल्‍क की एक परत जोड़कर रंगबिरंगा पैटर्न एवं विभिन्‍न स्‍टाइल दिए जा सकते हैं जो आपके कपड़ों के साथ बहुत सुंदर लग सकते हैं। 

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हालांकि कुछ लोगों को मास्‍क पहनना असुविधाजनक लगता है और चेहरे के हावभाव नहीं दिखते हैं। लेकिन महामारी से बचाव के लिए इतना त्‍याग तो किया जा सकता है। अध्‍ययनों से पता चला है कि अगर 50 प्रतिशत जनता मास्‍क पहनती है तो इन्‍फेक्‍शन सिर्फ बचे हुए 50 प्रतिशत लोगों में ही होगा। लेकिन अगर 80 प्रतिशत जनता मास्‍क (एवं हाथ को धोती और मास्‍क को डिसइन्‍फेक्‍ट करती है) पहनती है तो इस महामारी को फैलने से फौरन रोका जा सकता है। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।