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World Cancer Day 2020: महिलाओं को ही अधिक परेशान करते हैं ये 5 तरह के कैंसर, जानें क्यों?

यूं तो कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ कैंसर सिर्फ लेडीज को ही अधिक परेशान करते हैं। आइए जानें कौन से है ये कैंसर।
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Published -04 Sep 2017, 18:15 ISTUpdated -04 Feb 2020, 11:45 IST
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यूं तो दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक बीमारी यानि कैंसर पुरुष या महिला, किसी को भी अपनी चपेट में ले सकती है। यहां तक कि इन दिनों छोटे-छोटे बच्‍चे भी इस बीमारी के चपेट में आ रहे है। क्‍योंकि कोई भी बीमारी किसी का लिंग या शक्ल देखकर नहीं होती है। लेकिन कुछ कैंसर ऐसे हैं जो खासतौर पर महिलाओं को अधिक परेशान करते हैं। आइए कुकरेजा हॉस्पिटल की ले‍डी डॉक्‍टर बकुल अरोड़ा से जानें कौन से हैं ऐसे कैंसर जो केवल महिलाओं को ही अपना शिकार बनाते हैं।

डॉक्‍टर बकुल का कहना है कि 'जहां एक ओर कुछ महिलाएं अनुवांशिक कारणों से कुछ विशेष प्रकार के कैंसर की चपेट में आ रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर कुछ बदलती जीवनशैली और वातावरण में मौजूद toxic particles के कारण कैंसर की रोगी बन सकती हैं।

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ब्रेस्‍ट कैंसर

महिलाओं को होने वाले कैंसर में सबसे नॉर्मल ब्रेस्‍ट कैंसर ही है। कैंसर से पीडि़त होने वाली लगभग 26 प्रतिशत महिलाओं को ब्रेस्‍ट कैंसर की शिकायत होती है। हर आठ में से एक महिला को ब्रेस्‍ट कैंसर होने की आशंका होती है। आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को यह कैंसर होने की आशंका होती है। नियमित रूप से मैमोग्राफी और खुद का परीक्षण करके समय रहते इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

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ओवेरियन कैंसर

ओवरियन कैंसर में अंडाशय के कैंसर कोशिकाओं में पाए जाते हैं। इसे यूटरस कैंसर भी कहा जाता है, इस प्रकार के कैंसर में, गर्भाशय और ट्यूब्स डैमेज होने लगते हैं। हर वर्ष करीब 22 हजार महिलायें इस कैंसर का इलाज करवाती हैं जिनमें से करीब 14 हजार जिंदगी की जंग हार जाती हैं। मोनोपॉसल हॉर्मोन थेरेपी करवाने वाली महिलाओं में यह रोग हो सकता है। कुछ जानकार यह भी मानते हैं अधिक समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से भी यह बीमारी हो सकती है। अगर महिलाएं समय-समय पर चेकअप करवाती रहें तो समय रहते इस गंभीर बीमारी का इलाज शुरू किया जा सकता है।

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यूटेराइन कैंसर

महिलाओं में तीसरा सबसे नॉर्मल कैंसर यूटेराइन कैंसर है। कैंसर पीडि़त महिलाओं में लगभग 6 प्रतिशत यूटेराइन कैंसर से पीडि़त होती हैं। एस्‍ट्रोजन प्रत्‍यारोपण और infertility की शिकार महिलाओं को इस तरह की समस्‍या अधिक होती हैं। ऐसी महिलाओं को 35 वर्ष की आयु के बाद रेगुलर चेकअप करवाना चाहिये।

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सर्वाइकल कैंसर

आम बोलचाल की भाषा में इसे बच्चेदानी के मुंह का कैंसर भी कहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह असुरक्षित यौन संबंध बनाना है। यानी अगर आप यौन संबंध बनाते समय थोड़ी भी लापरवाही बरतते हैं तो आपके लिए यह नुकसानदेह होगा और आपका सवाईकल कैंसर जैसी समस्याओं से पाला पड़ सकता है। सर्वाइकल कैंसर की वजह एचपीवी है। रेगुलर चेकअप से इस कैंसर का समय रहते इलाज किया जा सकता है। सरकार ने भी 15 साल से कम उम्र की सभी बच्चियों में एचपीवी वैक्सीन जरूरी बताया है।

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कोलोन कैंसर

हालांकि यह ब्रेस्‍ट कैंसर की तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन कोलोन कैंसर भी एक गंभीर समस्‍या है। कैंसर से पीडि़त होने वाली लगभग 10 प्रतिशत महिलाओं में कोलोन कैंसर होता है। कोलोन कैंसर से पीडि़त होने वाली करीब 90 प्रतिशत महिलाओं की उम्र 50 वर्ष से अधिक होती है। डॉक्‍टर बकुल का कहना है कि 'बढ़ता वजन, physical activity की कमी और पारिवारिक इतिहास के अलावा शराब व सिगरेट पीना, बाजार में मिलने वाले ready-made foods अधिक मात्रा में तथा ताजा फलों व सब्जियों को कम मात्रा में लेने से आप आसानी से इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।'

इसलिए हर महिला को समय-समय पर अपना चेकअप करवाना चाहिए।

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