भारत में हर साल ब्रेस्‍ट कैंसर के नए मामले सामने आ रहे हैं, World Health Organization के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर धीरे-धीरे बढ़ता है और मुश्किल यह है कि शुरुआत में इसका पता भी नहीं चलता। लेकिन मैमोग्राफी से ब्रेस्‍ट कैंसर का जल्दी पता लगाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड किरणों और एक्सरे के मुकाबले ज्यादा सटीक तस्वीरें मिलती है और मरीज पर गलत प्रभाव भी नहीं पड़ता।

Cancer Awareness Camp में AIIMS के डॉक्‍टर Abhishek Shanker से हमने बात की तब उन्‍होंने बताया कि ''हर किसी को लगता है कि cancer एक लाइलाज बीमारी है, उनका सोचना काफी हद तक बहुत सही हैं क्‍योंकि लोग खासतौर पर महिलाएं कैंसर का इलाज करवाने तब आती हैं जब कैंसर last stage तक चला जाता है।'' 

मैमोग्राफी के लिए एक्‍सपर्ट की राय

डॉक्‍टर Abhishek Shanker कहते हैं कि ''आंकड़ों के अनुसार 80 प्रतिशत ब्रेस्‍ट कैंसर से ग्रस्‍त महिलाएं स्‍टेज-3 या 4 में हमारे पास आती हैं। जिसमें बचने के chance बहुत कम होते हैं। इसलिए महिलाओं को अपने विचार बदलने होगें क्‍योंकि अगर शुरूआत में ब्रेस्‍ट कैंसर की जानकारी मिल जाएं तो इससे बचना बहुत ही आसान हैं।''

डॉक्‍टर Abhishek Shanker ने यह भी बताया कि ''डायबिटीज और हाइपरटेंशन में आप इलाज बदल सकते हैं और डॉक्‍टर बदल सकते हैं, लेकिन कैंसर आपको सिर्फ एक मौका देता है। और अगर आपकी गलती के कारण, डॉक्‍टर की गलती के कारण या परिवार की गलती के कारण आपने यह मौका waste कर दिया तो कोई दुनिया का  कोई डॉक्‍टर आपकी लाइफ को वापिस नहीं ला सकता है। इसलिए ब्रेस्‍ट कैंसर के लिए यह बहुत जरूरी है कि अगर आप उम्र 45 साल से अधिक हैं तो आपको मैमोग्राफी जरूर करवानी चाहिए।''  

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Image Courtesy: Twitter (@coastalhealth91)

ब्रेस्‍ट कैंसर का पता लगाने के लिए मैमोग्राफी तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इससे महिलाओं के ब्रेस्‍ट में होने वाले ट्यूमर का पता लगाया जाता है। अक्सर महिलाएं ब्रेस्‍ट कैंसर के खिलाफ जागरुक नहीं रहती हैं और वे इनके लक्षणों को जान नहीं पातीं हैं और जब तक ब्रेस्‍ट कैंसर का पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। यही कारण है कि आज बहुत बड़ी संख्या में महिलाएं इस कैंसर का शिकार हो रही हैं।

क्या है मैमोग्राफी?

मैमोग्राफी एक विशेष तरह का टेस्ट है, जिसमें एक्स-रे के जरिए ब्रेस्‍ट की पूरी जांच की जाती है। इस जांच में ब्रेस्‍ट कैंसर ही नहीं, छोटी-से छोटी गांठ या ट्यूमर तक का पता शुरुआती अवस्था में ही हो जाता है। मैमोग्राफी वास्तव में साफ्ट टिशू एक्सरे है जो ब्रेस्‍ट में पाई जाने वाली सेल्‍स और milk ducts की साफ तस्वीर दिखा कर बता सकता है कि उनमें कोई गांठ है या नहीं है। कई बार महिलाओं को ब्रेस्‍ट कैंसर होने का पता काफी बाद में चलता है और इस स्थिति में उनका इलाज हो पाना काफी मुश्किल हो जाता है। जिन महिलाओं में इसकी पहचान शुरुआत में हो जाती है, उनका इलाज करना काफी आसान हो जाता है। इसके लिए आजकल डॉक्‍टर महिलाओं को नियमित रूप से मैमोग्राफी करवाने की सलाह देते हैं।

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क्यों होती है मैमोग्राफी की जरूरत? 

  • मैमोग्राफी से अत्यंत छोटे ट्यूमर या गांठ का पता initial stages में ही चल जाता है।
  • मैमोग्राफी से महिलाओं में किसी भी प्रकार की breast से जुड़ी बीमारी की पहचान की जा सकती है।
  • महिलाओं को अगर उनके breast में किसी प्रकार का बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर के पास जरूर जाएं और जांच करवाएं।
  • 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मैमोग्राफी बहुत जरूरी है क्योंकि उनमें स्तन कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।

जरूरी नही कि मैमोग्राफी सिर्फ वही महिलायें करायें जो ब्रेस्‍ट कैंसर से जूझ रही हैं या फिर जिनको ब्रेस्‍ट कैंसर होने की आशंका है। यह normal physical checkup का एक हिस्सा होता है या किसी प्रकार की breast की असामान्यता की जांच मैमोग्राम द्वारा हो जाती है।

मैमोग्राफी का मकसद breast cancer का पता लगाना है। समय पर breast cancer का पता लगने पर कैंसर से बचा जा सकता है और initial stages में इसका पता लगने पर इससे बचना बहुत ही आसान है

ब्रेस्‍ट कैंसर से जुड़ी अन्‍य जानकारी के लिए हमारा ये वीडियो देखें जिसमें डॉक्‍टर शिशिर शेट्टी आपको जानकारी दे रहे हैं।

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