मां बनना किसी भी स्त्री को पूर्णता का अहसास कराता है। हालांकि, एक स्त्री के लिए नौ माह बेहद की कष्टकारी होते हैं। कंसीव करने के बाद से ही महिला को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन स्वास्थ्य समस्याओं में सबसे आम समस्या है मार्निंग सिकनेस होना। इस समस्या में स्त्री को बार-बार जी मचलाने व उल्टी आने का मन होता है, जिसके कारण वह खुद को काफी रेस्टलेस महसूस करती है। दरअसल, गर्भधारण करते ही महिला के शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल चेंजेस होने लगते हैं। साथ ही उसका पाचन तंत्र भी काफी संवेदनशील हो जाता है। जिसके कारण उसे यह समस्या होती है। मार्निंग सिकनेस की परेशानी महिला को पहली तिमाही में सबसे अधिक होती है। ऐसे में महिला के लिए कुछ भी खाना-पीना काफी कठिन हो जाता है। यह सच है कि गर्भधारण के बाद महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होंगे, लेकिन अगर आप कुछ प्राणायाम का अभ्यास करती हैं तो इन हार्मोनल बदलावों के शरीर पर होने वाले विपरीत प्रभाव को काफी हद तक कण्ट्रोल किया जा सकता है। तो चलिए आज इस लेख में योगा गुरू इंस्टिट्यूट व वुमन हेल्थ रिसर्च फाउंडेशन की फाउंडर व प्रेसिडेंट योगा गुरू नेहा वशिष्ट कार्की गर्भावस्था में होने वाली मार्निंग सिकनेस की समस्या को दूर करने के लिए किए जाने वाले कुछ प्राणायाम व उनसे होने वाले लाभों के बारे में बता रही हैं। योगा गुरू नेहा कार्की ने योगा फॉर प्रेग्नेंसी नामक किताब भी लिखी है, जो हिन्दी व इंग्लिश दोनों भाषाओं में अवेलेबल है-
प्राणायाम ऐसे करता है लाभ
प्राणायाम का अभ्यास करने से पूर्व यह जानना बेहद आवश्यक है कि विभिन्न प्राणायाम गर्भावस्था में होने वाली मार्निंग सिकनेस को दूर करने में किस तरह सहायक है। दरअसल, जब एक महिला गर्भवती होती है तो उसके भीतर होने वाले हार्मोनल चेंजेस से पाचन तंत्र की मसल्स को लूज कर देते हैं, जिससे डाइजेशन स्लो हो जाता है और मार्निंग सिकनेस की शिकायत शुरू हो जाती है। लेकिन प्राणायाम करने से हार्मोनल बदलावों से होने वाले साइड इफेक्ट्स नहीं होते। प्राणायाम आपके पाचन तंत्र को सुचारूरूप से काम करने में मदद करता है और इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल भी सही रहता है। साथ ही प्राणायाम के अभ्यास से हार्मोन अपना स्त्राव नियमित मात्रा में करते हैं, जिससे भी मार्निंग सिकनेस की समस्या कम होती है। इसलिए अगर महिला अपनी गर्भावस्था का पता लगते ही प्राणायाम का अभ्यास शुरू कर देती हैं तो इससे मार्निंग सिकनेस होती ही नहीं है।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम
अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से ब्रेन में ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है, जो मार्निंग सिकनेस के लक्षणों को खत्म करने में मदद करता है। साथ ही यह हार्मोनल असंतुलन को भी दूर करने में सहायक है। इतना ही नहीं, यह पाचन तंत्र को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। अनुलोम-विलोम का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले अपनी सुविधानुसार सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। अब आप दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से सांस को भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। उसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें। अब दायीं नासिका से ही सांस को भरे और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को बाहर निकालें। आप अपनी सुविधानुसार अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास कर सकती हैं।
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भ्रामरी प्राणायाम
भ्रामरी प्राणायाम के दौरान जो ध्वनि व वाइब्रेशन क्रिएट होती है, वह सीधे मस्तिष्क में जाती है। यह ब्रेन में ऑक्सीजन व ब्लड की सप्लाईको बढ़ा देती है, जिससे भी मार्निंग सिकनेस की समस्या दूर होती है। भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए आप सबसे पहले किसी साफ जगह पर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों के अंगूठे से दोनों कानों को बंद कर लें। अब दोनों हाथों की तर्जनी उंगली माथे पर व बाकी तीनों उंगली को आंखों के उपर रखें। मुंह बंद रखें और नाक से ही सांस लें। अब मधुमक्खी की तरह गुनगुनाएं और सांस छो़ड़ते समय ओम् का उच्चारण करें।
उद्गीथ प्राणायाम या ओम चैटिंग
उद्गीथ प्राणायाम जिसे ओम चैटिंग भी कहा जाता है। ओम् का उच्चारण नाभि से प्रेशर देकर किया जाता है। जब नाभि से प्रेशर देकर बिल्कुल हल्का सा खिंचाव होता है, तो इसे डाइजेस्टिव सिस्टम भी बेहतर तरीके से काम करता है। यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करता है और ऑक्सीजन लेवल को बेहतर करता है। साथ ही यह दिमाग में एकाग्रता को बढ़ाता है, जिससे मार्निंग सिकनेस को कम करनेमें मदद मिलती है। भ्रामरी प्राणायाम के बाद उद्गीथ प्राणायाम का अभ्यास करना बेहद लाभकारी होता है। इसके लिए आप पद्मासन या सुखासन में बैठें। अब एक गहरी सांस लें और सांस को धीरे-धीरे छोड़ते समय ओम् का उच्चारण करें। इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय अपनी श्वास पर ध्यान केन्द्रित करें।
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उज्जायी प्राणायाम
उज्जायी प्राणायाम सीधे तौर पर थॉयराइड ग्रंथि से जुड़ा है और मार्निंग सिकनेस के लिए थॉयराइड ग्रंथियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। इसलिए अगर गर्भावस्था के दौरान इस प्राणायाम का अभ्यास किया जाए तो इससे मार्निंग सिकनेस से छुटकारा मिलता है। साथ ही यह प्राणायाम गले के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले आरामदायक तरीके से बैठ जाएं। अब समान रूप से सांस लेते समय गले पर ध्यान लगाएं। अब आप अपने गले से आने-जाने वाली श्वास को महसूस करें। जब श्वास धीमा और गहरा हो तो अपने कंठ द्वार को संकुचित करें। ऐसा करने से सांस आने व जाने पर धीमी सी आवाज आनी चाहिए। सांस गहरी और लंबी होनी चाहिए। कुछ देर तक लगार इसका अभ्यास करें।
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