सूर्य नमस्कार या सूर्य का अभिनंदन, एक संपूर्ण वर्कआउट सीक्वेंस है, जिसमें 12 योगा पॉश्चर होते हैं। यह बॉडी और ब्रेन के बीच तालमेल का अभ्यास है और इसे खासतौर से सूर्य को नमस्कार करने के लिये तैयार किया गया है। यह एक बेहतरीन कार्डियोवेस्कुलर वर्कआउट है। बिना प्रॉप का इस्तेमाल किये इसका अभ्यास किया जाता है। अगर पूरी बॉडी का प्रयोग कर इसका अभ्यास किया जाता है तो इसका शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में फायदा मिलता है। सूर्य नमस्कार के हर स्‍टेप का एक अनूठा लाभ मिलता है और यह अपने आपमें एक पूर्ण आसन है; अगर इन पॉश्चर्स का अभ्यास एक खास क्रम में किया जाये तो इससे बॉडी अंदर और बाहरी दोनों तरह से एनर्जी और ताजगीभरा हो जाती है।

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ये आसन सूर्य नमस्कार का पूरा सेट तैयार करते हैं:

  • प्रणाम मुद्रा
  • हस्तो उत्तासन
  • पाद हस्तासन
  • अश्वा संचालन
  • दंडासन
  • अष्टांग नमस्कार
  • भुजंगासन
  • अधोमुखास्वानआसन
  • अश्वा संचालन
  • पाद हस्तासन
  • हस्तो उत्तासन
  • प्रणाम मुद्रा

एक्‍सपर्ट की राय

सर्वा योगा, माइंडफुलनेस एंड बियोंड के को फाउंडर श्री सर्वेश शशि का कहना हैं कि ''सूर्यनमस्कार से शरीर की अच्छी स्ट्रेचिंग होती है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर के अधिकांश अंगों पर अपना असर दिखा रहा है। यह टखनों, पैरों और तलुओं को मजबूती देने के साथ, कार्डिएक मसल्स को मजबूत बनाता है। इन आसनों की शुरुआत और अंत हाथों को नमस्ते की मुद्रा से होती है, जोकि ब्रेन के दायें और बायें हिस्से को जोड़ता है। पेट की मसल्‍स की स्ट्रेच और दबाव से इस आसन की वजह से पाचन क्रिया बेहतर होती है और इससे आंतों की सेहत बेहतर होने में मदद मिलती है। साथ ही यह शरीर को मुख्य हिस्सों से टोन होने के लिये तैयार करता है और उसके आस-पास के हिस्से। के अतिरिक्त फैट को कम करने का काम करता है।''

 

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सूर्य नमस्‍कार के फायदे

यह आसन जोड़ों की तकलीफों और दर्द को दूर करने में काफी फायदेमंद होता है। यह अभ्यास करने वाले का लचीलापन बेहतर बनाता है, उन्हें लचीला और मजबूत बनाने में मदद करता है। यह आर्थराइटिस, सायटिका और इसी तरह की अन्य बीमारियां दूर करने में मदद करता है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से नर्वस सिस्टम और स्पाइनल कॉर्ड प्रेरित होते हैं, इससे ना केवल शारीरिक लाभ मिलता है, बल्कि मानसिक सेहत के लिये भी अच्छा होता है।

सूर्य नमस्कार एक बेहतरीन डिटॉक्स की तरह काम करता है और यह अंदर से शरीर को साफ करता है। यह शरीर में नये ब्‍लड का संचार करके बॉडी में ब्‍लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। इससे शरीर में हॉर्मोन्स को संतुलित करने और कोलेस्ट्रॉल के स्त‍र को कम करने में लाभ मिलता है। सूर्यनमस्कार स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिये जाना जाता है। आजकल की जीवनशैली में जहां थायरॉइड, पीसीओडी, मोटापा जैसी समस्याओं का शरीर पर कब्जा बढ़ गया है, ऐसे में सूर्य नमस्कार से मिलने वाले फायदे इन बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।

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अक्सर यह माना जाता है कि त्वचा पर समय पूर्व नज़र आने वाली झुर्रियां सूर्य नमस्कार के साथ त्वचा की सेहत को बेहतरीन रखता है। सूर्य नमस्कार शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे त्वचा को डिटॉक्स करने मे मदद मिलती है और इससे त्वचा की सेहत तथा निखार दोनों ही बेहतर होता है। एक शांत दिमाग, अच्छा पाचन और बेहतर ब्‍लड सर्कुलेशन चेहरे पर कांति लाने का फॉर्मूला है।

जब शरीर को उसकी आवश्यकता के अनुसार एक्सरसाइज का डोज मिल जाता है उससे सकारात्मकता बढ़ती है और साथ ही दिमाग व आत्मा भी तरोताजा हो जाती है। सूर्य नमस्कार से हृदय चक्र सक्रिय हो जाते हैं, जिससे इसका अभ्यास करने वाले जागरूक होने के लिये तैयार हो जाते हैं। श्वासन क्रिया पर ध्यान देने से दिमाग को शांत रहने में मदद मिलती है और यह भावनात्मक स्थिरता लाता है तथा मूड स्विंग्स का कम करता है। यह एनर्जी के लेवल को बेहतर बनाने में मदद करता है, क्योंकि स्थिर दिमाग ही स्वस्थ दिमाग होता है। कुछ खास पोज़ के प्रभावी असर का दावा किया जाता है, जोकि एंग्जाइटी और तनाव के लेवल को कम करता है। इसका अभ्यास करने वालों में एकाग्रता लाकर, यह नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है, याददाश्त जाने से रोकता है और ब्रेन सेल्‍स को एक्टिव बनाता है। इससे ब्रेन की कार्यप्रणाली बेहतर होती है। सूर्य नमस्कार दरअसल सूर्य को झुककर नमस्कार करना होता है, इसमें पूरा सार है, जो कहता है, 'मेरे अंदर की रोशनी तुम्हारे अंदर की रोशनी को नमन करती है।' इस तरह की सोच से संतुष्टि का भाव आता है, जोकि हमारे जीवन में बेहद अहम होते हैं।

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कैसे और कब करें सूर्य नमस्‍कार

सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने का सबसे बेहतर समय होता है सुबह के समय, सूर्य उगने से पहले लगभग सुबह 6 बजे। इसका अभ्यास दिन के किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन इसका अभ्यास शुरू करने से पहले खाली पेट होना चाहिये। एक सेट में 13.90 कैलोरी बर्न होती है। हालांकि, आपको धीरे-धीरे शुरुआत करनी है, क्योंकि आपने इसका अभ्यास अभी शुरू किया है। इन स्टेप्स को अच्छी तरह समझने के लिये थोड़ा वक्त लें और अपने शरीर को इन आसनों की आदत में ढलने दें। हर स्टेप के दौरान जानकारी होना अहम होता है और श्वसन का तरीका बेहतर और अच्छा हो जाता है। इसका अभ्यास शुरू करने से पहले किसी मान्यता प्राप्त योगा एक्‍सपर्ट की सलाह ले लें।