हैप्पी बेबी पोज़ जिसे कुछ लोग आनंद बालासन के नाम से भी जानते हैं। इस पोज़ के नाम मात्र से चेहरे पर मुस्कान आना सुनिश्चित है। इसका नाम एकदम सही रखा गया है क्‍योंकि जब कोई इस मुद्रा में होता है तब वह एक बच्चे के समान दिखता है, जैसे एक बच्चा अपनी पीठ पर अपनी हाथों से अपने पैरों को पकड़े खुशी से लेटा होता है।

यह मुद्रा बहुत सुखदायक और आराम करने वाली है, आमतौर पर इसके कोमल, शांत और कई स्वास्थ्य लाभों के कारण तेज योग करने से पहले एक स्‍ट्रेच और विश्राम दिनचर्या के रूप में इस योग को किया जाता है। हैप्पी बेबी पोज़ करने के लिए अपेक्षाकृत आसान मुद्रा है और इसलिए इसे ज्यादातर सभी कर सकते हैं। लेकिन प्रेग्‍नेंट महिलाएं इस मुद्रा को करने से बचें और घुटने और गर्दन की चोट से परेशान लोग भी चिकित्सकों की सलाह से ही इस योगासन को करें। इन योगासन के बारे में हमें योगा मास्टर, फिलांथ्रोपिस्ट, धार्मिक गुरू और लाइफस्टाइल कोच ग्रैंड मास्टर अक्षर जी बता रहे हैं

आनंद बालासन करने का तरीका

happy baby pose benefits inside

  • इसे करने के लिए अपनी पीठ के बल लेट जाएं। धीरे से सांस लें और सांस छोड़ें।
  • घुटनों को मोड़ते हुए चेस्‍ट की तरफ ले जाइए, पैरों का तला छत की तरफ है। हिप्‍स नीचे रहेंगे।
  • पैरों के तले को अंदर या बाहर को अपने हाथों से पकड़ना और धीरे-धीरे घुटनों को फैलाते हुए अपनी थाई की ओर ले जाएं।
  • अब पैरों को फ्लेक्स करें और धीरे-धीरे अपने शरीर को साइड से घुमाएं। 
  • कुछ हैप्पी बेबी शोर करने के लिए स्वतंत्र महसूस करें। 
  • इसे मजेदार बनाने के लिए कुछ कोऊंग साउंड को जाने दो!
  • इस मुद्रा में 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें।
  • पैरों को छोड़कर और अपनी पीठ के बल सपाट होकर धीरे से सांस छोड़ते हुए इस मुद्रा से बाहर निकलें।

इस मुद्रा से सबसे अधिक लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित जरूरतों पर विचार किया जाना चाहिए:

  • कंधों को सुनिश्चित करें और गर्दन फर्श पर सपाट रहे। अगर तलवों को पकड़ना संभव नहीं है तो टखने या पिंडली को पकड़ें।
  • अगर कोई टखने, पिंडली या एकमात्र को पकड़ने में असमर्थ हो तो योग स्ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आनंद बालासन (हैप्पी बेबी पोज़) के फायदे

तनाव और थकान को दूर करने में मददगार

इस योग को करने से तनाव, चिंता और थकान को दूर करने में मदद मिलती है। इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से शरीर में तनाव और मन की चिंता को दूर करने में मदद मिलती है। यह शांत होने में मदद करता है और एक कायाकल्प की भावना का अनुभव कराता है।

स्‍ट्रेचिंग में मददगार

हिप्‍स, थाईज के अंदर के हिस्‍से और कमर पर स्‍ट्रेच आता है। यह योग एक ऊर्जावान और आराम की भावना पैदा करने के लिए शरीर के टाइट अंगों को खोलने में मदद करता है, इन अंगों को खोलना रीढ़ और पीठ के लिए फायदेमंद होता है।

ananda balasana inside

रीढ़ की हड्डी में मजबूती 

यह पोज स्ट्रेच करके रीढ़ को शांत करता है। जी हां रीढ़ की हड्डी के क्षेत्र में तनाव से राहत देते हुए मजबूत और लचीली पीठ के विकास में सहायता करता है।

हैमस्ट्रिंग में स्‍ट्रेच

इस योग को करने से हैमस्ट्रिंग को स्ट्रेच करने में मदद मिलती है। यह मुद्रा हैमस्ट्रिंग को स्ट्रेच करने में उपयोगी है और किसी भी तरह के शारीरक तनाव के जोखिम को रोकता है और मसल्‍स को मजबूत करता है।

दर्द से राहत

यह योग पीठ के निचले हिस्से में दर्द और तनाव से राहत दिलाता है। इस मुद्रा के नियमित अभ्यास से पीठ के निचले हिस्से की मजबूती का समर्थन होता है और पीठ के निचले हिस्से में दर्द और अन्य तनावों की शुरुआत कम हो जाती है।

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ब्रेन को शांत

यह ब्रेन को शांत करनेमें मदद करता है। इस मुद्रा का नियमित अभ्यास मन को तनाव और तनाव से छुटकारा दिलाता है और भीतर सकारात्मक एनर्जी को सक्रिय करता है और एक शांत और सुखदायक अनुभव प्रदान करता है।

डाइजेशन होता है हेल्‍दी

हेल्‍दी डाइजेस्टिव सिस्‍टम एक समग्र अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है और इस मुद्रा का अभ्यास पेट को धीरे से मालिश करके, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और उपभोग किए गए भोजन से पोषक तत्वों के उचित अवशोषण को बढ़ावा देकर डाइजेस्टिव सिस्‍टम को एक्विट करता है।

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सेक्रम को रिलैक्‍स करें

सेक्रम (कमर के पीछे की तिकोने हड्डी) रीढ़ और ऊपरी शरीर को सहारा देकर श्रोणि को मजबूत और स्थिर करता है। यह मुद्रा ऊपरी और निचले शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सेक्रम को आराम देती है।

आप भी इस योगासन को रोजाना करके हेल्‍थ से जुड़े कई फायदे पा सकती हैं। साथ ही तनाव के कम और रीढ़ के मजबूत होने से आप लंबे समय तक जवां दिखाई देती है। फिटनेस से जुड़ी ऐसी ही और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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