चैत्र के नवरात्रे 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के हर दिन मां के नौ रूपों में से एक को समर्पित होता है। माना जाता है कि नौ देवियों का एक पसंदीदा फूड होता है जिनका भोग लगाने से मां दुर्गा अपने भक्तों पर बेहद प्रसन्न होती हैं और उनकी हर मनोकामना पूरी करती हैं। और साथ उन्‍हें बीमारियों से मुक्‍त और धन देती है। इस अवसर पर हमने उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा से बातचीत करके जाना कि नौ दिन के दौरान कौन सी देवी को किस तरह का भोग लगाने से मां खुश होती हैं। आइए हमारे साथ-साथ आप भी इस बारे में जानें।

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पहला दिन

नवरात्र के पहले दिन देवी शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करना चाहिए इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है और आप निरोगी रहते है।

दूसरा दिन

नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा की ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा होती है। दूसरे नवरात्र में मां को शक्कर का भोग लगाए। ऐसा करने से घर के सभी सदस्यों को प्रसाद दें। इससे आपकी आयु बढ़ती है।

तीसरा दिन

नवरात्रे का तीसरा दिन देवी चंद्रघंटा को समर्पित होता है। दूध या दूध से बनी चीजें अर्पित करनी चाहिए। जी हां इस दिन दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर ब्राह्मणों को दान दें, इससे आपके दुख दूर होगें और आपको आनंद की प्राप्ति होगी।

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चौथा दिन

माता के चौथे स्वरूप यानि इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा होती है। इनकी उपासना करने से आपको जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन माता को मालपुए का भोग लगाएं। जी हां मां कूष्मांडा को मालपुए बेहद पसंद है इसलिए इस दिन मालपुए का भोग लगाना चाहिए। इस भोग को अर्पित करने और दूसरों को खिलाने से बुद्धि तेज होती है।

पांचवा दिन

पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की गई पूजा की जाती है। इनकी पूजा करने से भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है। नवरात्र के पांचवे दिन केले का नैवेद्य चढ़ाने से बॉडी हेल्‍दी रहती है। पांचवे दिन माता को केले का भोग लगाना भी चाहिए और केले का दान भी करना चाहिए।

छठा दिन

छठे नवरात्र देवी कात्यायनी की आराधना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां के छठे रूप को शहद बेहद पसंद हैं इसलिए कात्यायनी मां को प्रसन्न करने शहद का भोग लगाना चाहिए।

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सातवां दिन

सांतवे दिन कालरात्रि की पूजा की जाती है। भूत-प्रेतों से मुक्ति दिलवाने वाली देवी कालरात्रि की उपासना करने से सभी दुख दूर होते हैं। माता को लगाएं गुड़ और मेवे के लड्डू का भोग। जी हां सातवें नवरात्र को गुडु का नैवेद्य चढ़ाने के बाद ब्राह्यणों को दान देने से आपके कष्‍ट दूर होते है।

आठवां दिन

नवरात्र के आंठवें दिन महागौरी के स्वरूप का वंदना की जाती है। इस दिन नारियल का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही आठवें नवरात्र को नारियल का भोग लगाने से आपकी संतान से जुड़ी सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

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नौवा दिन

नवरात्र के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री को जगत को संचालित करने वाली देवी माना जाता है। इस दिन माता को तिल का भोग लगता है। नवमी के दिन तिल का भोग लगाने से अनहोनी की आशंका खत्म होती है।

अगर आप भी मां का आशिर्वाद पाना जाती हैं तो इन नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों में आप ये भोग जरूर लगाएं।