Navratri Remedies: मां चंद्रघंटा से जुड़ा ये उपाय करें, सुधरेगा स्वास्थ्य और चमकेगी किस्मत

आज नवरात्रि के तीसरे दिन हम साहस, बहादुरी और शक्ति की देवी मां चंद्रघंटा को नमन करते हैं। माता के इस स्वरूप का संबंध मणिपुर चक्र से माना जाता है, जो आत्मविश्वास, जीवन शक्ति और व्यक्तिगत शक्ति का प्रतीक है। जब यह चक्र संतुलित होता है, तब जीवन में साहस, दृढ़ता और मानसिक स्थिरता का संचार होता है। मां चंद्रघंटा का प्रिय रंग पीला है, जो ऊर्जा, आशावाद और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। इस रंग को धारण करने से भक्तों में आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का विकास होता है।
मां चंद्रघंटा और चंद्रशूर: शक्ति और स्वास्थ्य का अद्भुत मेल
क्या आप जानती हैं कि इस दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित औषधि के रूप में चंद्रशूर का इस्तेमाल किया जाता है। यह ऐसी शक्तिशाली जड़ी-बूटी है, जो शरीर और मन दोनों को मजबूती देती है। इसे कुछ लोग अलीव बीज या हलीम बीज के नाम से भी जानते हैं।
चंद्रशूर में प्रोटीन, आयरन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य को सही रखते हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। इसे 'नेचुरल एनर्जी बूस्टर' कहा जाता है, क्योंकि यह थकान को कम करके जीवन में उत्साह भरता है।
जिस तरह मां चंद्रघंटा भक्तों के जीवन से अंधकार और भय को दूर करती हैं, उसी तरह चंद्रशूर हमारी जीवन शक्ति, आत्मबल और संपूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ाने का कार्य करता है। इसे डेली डाइट में शामिल करने से शरीर में ताकत आती है, हड्डियां मजबूत होती हैं और डाइजेशन भी अच्छा होता है। आइए इसके फायदों ओैर इस्तेमाल के तरीके के बारे में डॉक्टर दीक्षा भावसार दे रही हैं। डॉक्टर दीक्षा, दिल्ली के आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स ब्रांड द कदंब ट्री की फाउंडर और BAMS (Bachelor of Ayurveda Medicine) हैं।
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चंद्रशूर के फायदे
- यह शरीर में वात और कफ दोष को बैलेंस करता है।
- यह डाइजेशन और आंतों के हेल्थ को सुधारने में मदद करता है।
- बच्चों की ग्रोथ और लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।
- इम्यूनिटी और एनर्जी का लेवल बढ़ाता है।
- जोड़ों के दर्द और पीठ दर्द से राहत देता है।
- पीरियड्स को नियमित करता है और पीएमएस (प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम) के लक्षणों से आराम दिलाता है।
- यह ब्रेन के लिए अच्छा होता है और सतर्कता और याददाश्त को बेहतर बनाता है।
- यह ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि यह मिल्क के प्रोडक्शन को बढ़ाता है और शरीर को एनर्जी देता है।
चंद्रशूर कैसे खाएं?
- रात-भर 1 चम्मच चंद्रशूर के बीज गुड़ के साथ भिगोएं और इसे 7-10 दिनों तक सुबह पिएं।
- बच्चों की लंबाई बढ़ाने या नई मां का एनर्जी लेवल बढ़ाने के लिए इसे दूध में मिलाकर दिया जा सकता है।
जिस तरह मां चंद्रघंटा हमारे जीवन से अंधकार को हटाती हैं, उसी तरह चंद्रशूर हमारे मन और शरीर को मजबूत बनाता है। इसलिए, आज के दिन मां चंद्रघंटा की उपासना और चंद्रशूर का सेवन दोनों ही हमें शक्ति, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास प्रदान कर सकते हैं।
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