आज के समय में अधिकतर लोग अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं और वेट लॉस करने के लिए जब भी कोई डाइट फॉलो करने का मन बनाते हैं तो सबसे पहले उनके मन में Calorie Deficit डाइट का ख्याल ही आता है। दरअसल, वजन बढ़ने और कैलोरी कंज्यूम करने को आपस में जोड़कर देखा जाता है। इसलिए यह आम मिथ है कि अगर डाइट से कैलोरी काउंट को कम कर दिया जाए तो इससे वेट लॉस स्पीड अप होता है।  

यह सच है कि आवश्यकता से अधिक कैलोरी जब बॉडी में कंज्यूम नहीं हो पाती तो वह कहीं ना कहीं आपकी कमर का घेरा बढाती है। लेकिन कैलोरी काउंट को कम कर देने से आपका वजन हेल्दी तरीके से कम होगा, इसके बारे में सटीक तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। सिर्फ कैलोरी डेफिसिट ही हेल्दी वेट लॉस जर्नी नहीं बन सकता है। तो चलिए आज इस लेख में आपको सेंट्रल गवर्नमेंट हॉस्पिटल के ईएसआईसी अस्पताल की डायटीशियन रितु पुरी कैलोरी डेफिसिट डाइट से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में बता रही हैं, जिन्हें जानने के बाद आपको इस डाइट को फॉलो करने पर विचार करना चाहिए-

जरूरी है कैलोरी डेफिसिट डाइट को समझना

calories food

यह सच है कैलोरी कंसम्पशन को कम करने से वेट लॉस करने में मदद मिलती है। लेकिन सिर्फ इतना जान लेना ही काफी नहीं है। (ये 3 टिप्स आजमाएं शादी से पहले अपना वजन घटाएं) यहां पहले आपको कैलोरी डेफिसिट डाइट को समझना भी बेहद आवश्यक है। कुछ लोग अपने कैलोरी काउंट को कम करने के लिए अपने खाने का आधा कर देते हैं, जो बिल्कुल भी सही नहीं है। बल्कि आपको यह भी देखना चाहिए कि आप अपनी थाली में प्रोटीन से लेकर कार्ब्स व अन्य पोषक तत्व कितने और किस मात्रा में ले रहे हैं। अगर आप इस बात का ध्यान नहीं रखते और बस अपनी रोटी, चावल या खाने की मात्रा को कम कर देते हैं तो इससे आपको फायदे से अधिक नुकसान होता है।

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मैक्रो न्युट्रिएंट्स की नजरअंदाजी 

Diet plan

कुछ लोगों के लिए कैलोरी डेफिसिट डाइट इसलिए भी लाभकारी साबित नहीं होती है क्योंकि वह अपनी डाइट से कैलोरी तो कम कर देते हैं, लेकिन सही मात्रा में मैक्रो न्युट्रिएंट्स नहीं लेते हैं, जिससे उन्हें कोई फायदा नहीं मिल पाता है। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कैलोरी डेफिसिट डाइट के साथ-साथ वर्कआउट भी करते हैं। लेकिन वर्कआउट से पहले व बाद में वह अपने फूड पर ध्यान नहीं देते हैं और इसलिए कैलोरी कम लेने और एक्सरसाइज के बाद भी उन्हें सही परिणाम नहीं मिल पाते हैं।

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बीएमआर रेट का स्लो डाउन होना

Dt ritu puri

कुछ लोग वेट लॉस के लिए सिर्फ कैलोरी काउंट कम करने पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन सिर्फ ऐसा करना बेहतर ऑप्शन नहीं है। मसलन, अगर आप वेट लॉस प्रोसेस के दौरान कैलोरी डेफिसिट डाइट पर चले जाते हैं तो आपकी बॉडी लो कैलोरी कंसम्पशन की हैबिचुअल हो जाती है। और अगर आप सही समय पर सही फूड नहीं लेते हैं और मैक्रो न्युट्रिएंट्स को नजरअंदाज करते हैं तो इससे आपका बीएमआर रेट का स्लो डाउन हो जाता है। जिससे आपकी बॉडी उसकी आदी हो जाता है। इससे सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि अगर आप एक वक्त के बाद थोड़ी भी कैलोरी काउंट बढ़ाएंगे तो इसे वजन कम नहीं होगा, बल्कि वेट दोबारा बाउंस बैक हो जाएगा। साथ ही बीएमआर रेट का कम होना हेल्दी नहीं माना जाता है, जिससे आपकी बॉडी को ही नुकसान होता है और आप खुद को अधिक कमजोर महसूस करने लग जाते हैं।

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