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7 कारण जिनकी वजह से आप हमेशा रहती हैं दुखी और उदास

दूसरों के सामने खुद को खुश बताना और असल में खुश होना बहुत अलग होता है। पर क्या आप जानती हैं कि सब कुछ होते हुए भी दुखी होने का कारण क्या है?   
Published -15 Mar 2022, 15:13 ISTUpdated -15 Mar 2022, 15:26 IST
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  • Shruti Dixit
  • Editorial
  • Published -15 Mar 2022, 15:13 ISTUpdated -15 Mar 2022, 15:26 IST
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क्या आप खुश हैं? जी हां, मैं आपसे पूछ रही हूं , क्या आप हमेशा खुश महसूस करती हैं? ऐसा कितनी बार हुआ है कि आप पूरी दुनिया के सामने खुश दिख रही हों, लेकिन फिर भी आप अंदर से खुश न हों। ये यकीनन एक ऐसी समस्या है जिससे दुनिया भर के कई लोग जूझते हैं। इंसान दूसरों से तो काफी लड़ ले, लेकिन वो अपने आप से लड़ाई में परेशान हो जाता है। आपने कई लोगों को कहते सुना होगा कि खुशी तो दिमाग से आती है। अगर आप अपने आस-पास की चीजों पर ध्यान देना शुरू कर देंगे और उनकी अच्छाई को महसूस करेंगे तो खुशी अपने आप ही आ जाएगी। 

अपने मन में हमेशा दुख रखना किसी इंसान के लिए काफी खराब स्थिति पैदा कर देता है। ये वो समय होता है जब आप अपने आसपास की चीजों की अच्छाई भी देखना बंद कर देते हैं। वो अपने आस-पास की चीज़ों से जुड़ाव महसूस नहीं करते हैं और ये मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है। अगर इस समस्या से आप भी जूझ रही हैं तो आपको पता होगा कि ये आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर कितना असर डालती है। 

हमने इस बारे में जानने के लिए अरूबा कबीर पठान से बात की। अरूबा मेंटल हेल्थ काउंसलर हैं और Enso वेलनेस की फाउंडर भी हैं। अरूबा ने हमें 7 कारणों के बारे में बताया जिनकी वजह से हम हमेशा ही उदास रहते हैं। 

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हमेशा चिंता करते रहना

भविष्य की चिंता करना काफी आम बात है, लेकिन क्या होगा और कैसे होगा ये सोचते समय आप अपनी जिंदगी को पूरी तरह से चिंता में नहीं डाल सकते हैं। कोई क्या सोचेगा इसकी चिंता अगर करती रहेंगी तो ये आपके दिमाग में निगेटिव भावनाएं घर कर लेती हैं और आपको पता भी नहीं चलता कि ये उदासी का कारण कब बन गया है। कई बार आप चिंता में इतने ज्यादा परेशान हो जाते हैं कि निगेटिव भावनाएं हमें हमेशा ही उदास रखती हैं।

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पछतावा होना

आपको कई चीज़ों का पछतावा हो सकता है, जरूरी नहीं कि ये किसी बड़ी चीज़ के बारे में हो। कोई ड्रेस नहीं पहन पाई हों, आप किसी को मना नहीं कर पा रही हैं, कोई आपकी पर्सनल बाउंड्री को तोड़ रहा है, लेकिन आप उसे मना नहीं कर पा रही हैं। किसी से झगड़ा हो गया है और उसे समय पर जवाब नहीं दे पाई हैं। हर रोज़ ऐसी कई चीज़ें हमारे सामने आती हैं जिन्हें लेकर हम पछताते हैं। हो सकता है कि आपका ध्यान भी इनपर न जाए पर मन में आप ये सोचती हों 'अरे यार ब्लैक की जगह रेड साड़ी पहननी थी।' ये छोटी-छोटी चीज़ें हमारी फीलिंग्स को बदलने का काम करती हैं।  

मन ही मन कुढ़ते रहना या शिकायत रखना 

हम सभी एक पॉइंट पर बुरा महसूस करते हैं और कई बातों को अपने मन में ही सोचते रह जाते हैं। किसी की कोई बात आपको पसंद नहीं आई हो तो आप उसके बारे में सोचती रहें और उसके खिलाफ मन में शिकायत रखे रहें। आपको पता न हो, लेकिन किसी के लिए ग्रज रखने से आपके मन को काफी ठेस पहुंचती है और आप हमेशा बुरा महसूस करते हैं। ये नेगेटिव एनर्जी दुख और उदासी का कारण बनती है और दिल और दिमाग में हमेशा यही सब चलता रहता है।  

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खुद को दुखी या विपत्ति ग्रस्त बताना 

अगर आप हमेशा ये महसूस करती रहेंगी कि पूरी दुनिया आपके पीछे है और आपके खिलाफ काम कर रही है तो आप हमेशा दुखी रहेंगी। आप अपनी किस्मत को दोष देती रहेंगी तो हमेशा दुखी रहेंगी, आपको ये लगता है कि आपके साथ तो कभी कुछ अच्छा हो रही नहीं सकता है तो भी आप हमेशा दुखी रहेंगी। हर स्थिति में विक्टिम कार्ड नहीं खेला जा सकता है और ऐसा करने से महिला सशक्तिकरण का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। अगर आप हमेशा ये मानती हैं कि 'मेरी तो किस्मत ही खराब है' तो ये भी आपके दुख का अहम कारण हो सकता है।  

हमेशा जिद्दी बने रहना 

हम हमेशा ये ही सोचते रहेंगे कि जो हमने सोच लिया है वही सही है तो ये गलत होगा। आपको अपनी जिंदगी के सभी पलों को ठीक से एन्जॉय करने के लिए अपने आप को थोड़ी ढील देनी होगी। अगर आप हमेशा जिद पर अड़ जाएंगी तो धीरे-धीरे लोग भी आपसे दूर होने लगेंगे और आप खुश भी नहीं हो पाएंगी। अपने लिए नियम और कायदे बनाना ठीक है, अपनी पर्सनल बाउंड्री सेट करना भी सही है, लेकिन कई बार आपको स्थिति के हिसाब से ढलना भी होता है।  

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हमेशा तुलना करते रहना 

एक बात आपको समझनी होगी कि मानसिक शांति और खुशी तभी मिलती है जब आप अपने आप से खुश रहती हैं। समाज वैसे भी हमारी तुलना सभी से करता रहता है, लेकिन अगर आप खुद भी अपनी तुलना किसी न किसी से करती रहेंगी तो आप कभी खुश नहीं रह पाएंगी। ये समझना जरूरी है कि हर इंसान अलग है, हर कहानी अलग है, हर किसी के हालात अलग हैं। हो सकता है जो आपके पास है वो किसी और के लिए सपना मात्र हो। खुद को कभी कम न समझें और हमेशा किसी से अपनी तुलना न करें।  

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खुद को बेहतर बनाने के लिए काम न करना 

अगर आप खुद को बेहतर बनाने के बारे में नहीं सोचती हैं तो ये गलत है। आपको हमेशा खुद को ओपन रखना होगा अलग-अलग तरह की चीजों पर ध्यान देना होगा। आप में कोई कमी नहीं है ये भावना तो हमेशा रखनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप ये सोचने लगे कि आप परफेक्ट हैं। पुरानी समस्याएं, चैलेंज, ट्रॉमा आदि के लिए प्रोफेशनल की मदद भी लेनी पड़ सकती है। आप हमेशा दुनिया को हैप्पी और ब्राइट देखेंगी।  

ये सारी चीज़ें हमारे साथ लगभग रोज़ाना होती हैं और हम इसके बारे में किसी को बता नहीं पाते हैं। हम खुद भी ये नहीं समझ पाते हैं कि हम किस वजह से दुखी हैं, लेकिन छोटी-छोटी चीज़ें ही आपको दुखी करती हैं। धीरे-धीरे कर खुद में बदलाव लाने की कोशिश करें। यही आपके लिए सच्ची जीत होगी।  

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