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मन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए फॉलो करें भगवद गीता के ये 4 टिप्स

मन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप भगवद गीता में बताए ये टिप्स फॉलो करें। इन टिप्स से आपको जीवन में सफलता के साथ मानसिक शांति भी मिलेगी।   
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mental health tips by aarti dahiya

भगवद गीता महान महाकाव्य महाभारत का हिस्सा है, जो हिंदू दर्शन में व्यापक रूप से लोकप्रिय पौराणिक कहानी है ।गीता पूरी तरह से दो व्यक्तियों, भगवान कृष्ण और अर्जुन  के बीच के संवाद का महाकाव्य है। जो मनुष्यों को कई तरह के पाठ सिखाता है। इसमें लगभग 701 श्लोकों के साथ 18 योग (अध्याय) हैं। भगवद गीता में जिंदगी का सार छिपा हुआ है। गीता अशांति के समुद्र में शांति का द्वीप है। यह एक ऐसा ग्रंथ है जो मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य के सभी पहलुओं के बारे में बात करती है।

भगवद गीता का अर्थ कर्तव्य, जिम्मेदारियां, अधिकार, नैतिकता, नैतिक दृष्टिकोण, क्रिया इत्यादि हैं। अगर आप मानसिक तनाव के शि‍कार है तो आपको श्रीमद भगवद गीता के श्‍लोक पढ़ने की सलाह दी जाती है और यह आपके तनाव को दूर करने में काफी कारगर भी होता है। अज्ञात भय या असुरक्षा की भावना होने पर श्रीमद भगवद अंधकार में ज्योति की तरह काम करती है। जब कभी भी आप अवसाद की भावना से घिर जाएं तो श्रीमद भगवद के ये श्‍लोक जरुर पढ़ें। आपको निश्चय ही हर सवाल का जवाब मिल जाएगा। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया जी से जानें मानसिक स्वास्थ्य के लिए आपको भगवद गीता कौन से टिप्स अपनाने चाहिए। 

कृष्ण ने अर्जुन को बताईं ये बातें 

भगवद गीता में बताया गया है कि एक बार अर्जुन मानसिक रूप से उदास हो गया था जब उसने देखा कि उसे अपने परिवार के लोगों के साथ ही लड़ना है। तभी भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को अपना कर्तव्य करने के लिए परामर्श के रूप में उपदेश दिया था। गीता में दिए गए उन्हीं उपदेशों से मनुष्य अपने मन को स्वस्थ्य बनाए रख सकता है। 

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कर्तव्य का पालन करो

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कृष्ण ने कहा भगवद गीता में कहा है कि आप जो हैं उसके साथ सहज रहना सीखें। तथ्य यह है कि भगवद गीता आपको अपने कर्तव्यों का पालन करने और अपने मार्ग पर चलने के लिए कहती है। आप अपने कर्तव्यों को अनदेखा न करें नहीं तो अंत में आपको असंतोष मिलेगा। किसी और की जिंदगी जीने की कोशिश मत करें। आपका जीवन आपका अपना है, इसकी सराहना करना सीखें। गीता में मुख्य रूप से अपना कर्म करते रहने की प्रेरणा दी गई है। भगवान कृष्ण, अर्जुन से कहते हैं कि हमेशा कर्म करो और फल की इच्छा मत करो। निश्चय ही आपके प्रयास फलीभूत होंगे। अन्यथा इन सबका क्या मतलब है? आपको जीवन में सफलता हासिल करने के लिए यात्रा पर ध्यान केंद्रित करना है न कि गंतव्य पर। ज्ञान से हम आत्मा और भक्ति से हम परमात्मा को जान पाते हैं लेकिन कर्म से आत्मा परमात्मा दोनों को जाना जा सकता है। कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि कर्म करना मानव का धर्म है बिना कर्म किये कुछ भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हमें अपना ध्यान हमेशा लक्ष्य की ओर लगाना चाहिए। गीता के इस उपदेश से मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। 

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संयम रखें

गीता से यह भी ज्ञान मिलता है कि व्यक्ति को कैसे अपना जीवन संयम से जीना चाहिए। मनुष्य को अपनी बोली, खाना, सोना इन सभी में संयम बरतना चाहिए तभी आप एक संतुलित जीवन जी पाएंगे। हर दिन 12 घंटे काम करने और सप्ताहांत में लगातार चार घंटे व्यायाम करने में कोई समझदारी नहीं है। अपने आपको संयमित रखने और अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से अपनी कसरत पर एक घंटा बिताएं, अच्छी नींद लें, अधिक काम न करें और इससे आपको जो उपलब्धि की भावना मिलेगी वो आपने पहले नहीं पाई होगी। 

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मन को नियंत्रित रखें 

मानसिक स्वास्थ्य के लिए मन को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। श्रीमद भगवद गीता में कृष्ण ने कहा है कि मन एक बच्चे की तरह है; बच्चा हर चीज की ओर आकर्षित होता है। बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति से मन को नियंत्रित किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य मन की एक अवस्था है। निरंतर अभ्यास और वैराग्य से यह संभव है। उनका कहना है कि जहां भी और जब भी मन भटकता है,क्योंकि मन चंचल और अस्थिर होता है तो हमें इसे अभ्यास के द्वारा  वापस  नियंत्रण में लाना होगा। ऐसा करने से आपके शरीर के साथ मन को भी स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी। श्री कृष्ण अर्जुन से गीता में यह भी बताते हैं कि बीते कल और आने वाले कल की चिंता मत करो, क्योंकि जो होना है वह होकर रहेगा और जो होता है, अच्छा ही होता है, इसलिए वर्तमान का आनंद लो।

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मानसिक स्वास्थ्य के लिए ध्यान करें

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भागवद गीता में ध्यान पर भी विशेष जोर दिया गया है। श्री कृष्ण बताते हैं कि ध्यान आपको शांति और सद्भाव खोजने में मदद करता है। भगवद गीता के अनुसार,'ध्यान का अभ्यास व्यक्ति को सभी कष्टों से मुक्त करता है। यह योग का मार्ग है। दृढ़ संकल्प और निरंतर उत्साह के साथ आप इसका पालन करें। सभी स्वार्थी इच्छाओं और अपेक्षाओं को त्याग कर, इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करें। ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जो आपके मानस पटल को स्वस्थ रखते हुए अच्छे विचारों को जन्म देती है। ध्यान से आपको मानसिक शांति प्राप्त होती है जो अच्छे विचारों को जन्म देकर मन को स्वस्थ रखने में मदद करती है। 

ये सारी ऐसी बातें हैं जो आज भी हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। हमारी नित प्रतिदिन की समस्या को ख़त्म करने में श्रीमद भगवद गीता का योगदान देखा जा सकता है और इन सभी उपदेशों को जीवन में अमल करने से शरीर के साथ मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। 

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Image Credit: freepik 

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