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Shahnaz Husain Tips: शरीर को दुरुस्‍त रखने में मदद करता है ये पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार

अगर आप मानसून के दौरान खुद को फिट रखना चाहती हैं तो शहनाज हुसैन के इन हीलिंग तकनीकों को आजमाएं। 
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  • Shahnaz Husain
  • Editorial
Published -04 Aug 2022, 19:33 ISTUpdated -04 Aug 2022, 21:50 IST
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मानसून के दौरान पंचकर्म, धारा और केरल मसाज जैसे पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचारों के लिए आदर्श माना जाता है, क्योंकि वे शरीर में जमा हुए विषाक्त पदार्थों और कचरे से छुटकारा पाने में मदद करते हैं। इससे बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलती है। 

आयुर्वेद के अनुसार, मानसून के दौरान शरीर उपचार के लिए अधिक ग्रहणशील होता है क्योंकि आर्द्रता अधिक होती है और शरीर के पोर्स खुले होते हैं। ऑयल ट्रीटमेंट को जुलाई और अगस्त के महीनों के लिए उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यह बेहतर दोष बैलेंस प्राप्त करने में मदद करता है।

पंचकर्म

पंचकर्म आयुर्वेद की प्रमुख हीलिंग तकनीकों में से एक है, जो पुनरोद्धार के एक व्यवस्थित कार्यक्रम की पेशकश करता है। पंचकर्म का शाब्दिक अर्थ है 'पांच क्रियाएं।' इसलिए, इसमें चिकित्सीय चरणों की एक जटिल श्रृंखला शामिल है, जो हर सेल्‍स से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और खत्म करने में मदद करती है। ये ट्रीटमेंट एक आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में किए जाते हैं।

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केरल मसाज

केरल मसाज की कला को कैराली प्रणाली द्वारा पोषित और सिद्ध किया गया है, जो अपने चिकित्सीय मूल्यों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसका उपयोग न केवल कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है, बल्कि शरीर और दिमाग को फिर से जीवंत करने के लिए भी किया जाता है। 

मसाज में प्रयुक्त हर्बल तेल में शक्तिशाली उपचारात्मक गुण होते हैं। ये उपचार मानसिक तनाव को दूर करते हैं, रिलैक्‍स को प्रेरित करते हैं और मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को भी पुनर्जीवित करते हैं। वे ब्‍लड सर्कुलेशन में सुधार करते हैं, मसल्‍स को टोन करते हैं और वास्तव में मानसिक प्रक्रियाओं और प्रदर्शन के स्तर में सुधार करते हैं।

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शिरोधारा

धारा का अर्थ है 'प्रवाह' और यहां यह विशेष रूप से 'नीचे की ओर प्रवाह' का प्रतीक है। यह रोग के उपचार की सुविधा के लिए, शरीर और मन के चैनलों को खोलने में मदद करता है। धारा में जड़ी-बूटी का तेल, दूध या घी रोगी के शरीर के ऊपर उचित ऊंचाई पर लटकाकर एक कटोरी में रखा जाता है। 

दोषों के असंतुलन के अनुसार तेलों का चयन किया जाता है। इसमें इस्‍तेमाल होने वाला कटोरा मिट्टी से बना होता है और आधार के केंद्र में एक छेद होता है। इसके बाद तेल को रोगी के माथे पर टपकने दिया जाता है। इसे शिरोधारा के नाम से जाना जाता है। यह उपचार सीधे केंद्रीय नर्वस सिस्‍टम को प्रभावित करता है और मन को शांत करता है। धारा और केरल मसाज का कॉम्बिनेशन अतिरिक्त दोषों, या विषाक्त पदार्थों को ढीला करने में मदद करता है और उनके प्रवाह को उन्मूलन के अंगों की ओर निर्देशित करता है।

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आयुर्वेदिक उपचार और आहार संबंधी सलाह

आयुर्वेदिक उपचार और आहार संबंधी सलाह सभी का लक्ष्य संतुलन हासिल करना है। आयुर्वेद ऐसे आहार की वकालत करता है जिसमें साबुत अनाज और पर्याप्त फाइबर हो, ताकि यह पाचन तंत्र को विषाक्त पदार्थों और कचरे से साफ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराए। कब्ज और विषाक्त पदार्थों और अपशिष्टों का संचय त्वचा पर जमाव, सुस्त त्वचा, ब्लैकहेड्स और फोड़े-फुंसियों के रूप में दिखाई देता है।

धमनियों और नसों को बंद होने से बचाने के लिए आहार में फैट की मात्रा भी कम होनी चाहिए। अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ सुंदरता के लिए भी सही ब्‍लड सर्कुलेशन जरूरी है। कम फैट वाला आहार वजन बढ़ाने को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। डाइट मिनरल्‍स से भरपूर होनी चाहिए, जो ऊर्जा और जीवन शक्ति प्रदान करते हैं। मिनरल्‍स त्वचा और बालों की भी मदद करते हैं।

आयुर्वेद कहता है कि हमें ऐसा आहार लेना चाहिए जिसमें एनिमल प्रोटीन कम हो, लेकिन वनस्पति प्रोटीन अधिक हो। दरअसल, शरीर की मजबूती के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी है। एनिमल प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा शरीर में विषाक्त पदार्थों को बढ़ा सकती है और पाचन प्रक्रिया को भी धीमा कर सकती है। 

दूसरी ओर, वनस्पति प्रोटीन न केवल शरीर को पोषण देते हैं, बल्कि कचरे के कुशल उन्मूलन में भी मदद करते हैं। लहसुन, अदरक, जीरा, काली मिर्च आदि मसाले एनिमल प्रोटीन के डाइजेशन में हेल्‍प करते हैं। कम नमक वाली डाइट लें। अतिरिक्त नमक शरीर में लिक्विड पदार्थ को बनाए रखता है और सर्कुलेशन को धीमा कर देता है। कभी-कभी, यह चेहरे और आंखों के आसपास के एरिया को सूजा हुआ बना सकता है। त्वचा के लिए, कम नमक वाले आहार की सलाह दी जाती है।

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आयुर्वेद द्वारा ताजा, जैविक खाद्य पदार्थों की सिफारिश की जाती है, ताकि शरीर को पोषक तत्वों की आपूर्ति की जा सके। वे न केवल अच्छे स्वास्थ्य में योगदान करते हैं, बल्कि त्वचा को ग्‍लो भी देते हैं। मानसून के दौरान, खासकर अगर अत्यधिक पसीना आता है तो आयुर्वेद कुछ आहार संबंधी सुझाव देता है:

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नींबू पानी पिएं और खाने से पहले और बाद में अदरक की चाय पिएं। ताजा अदरक की जड़ को बारीक काट लें और एक चुटकी नमक के साथ मिलाएं। इसे खाने से पहले थोड़ा सा चबा लें। अपने भोजन के साथ गर्म पानी पीने से भी मदद मिल सकती है। हल्का आहार और कम मसालों की सलाह दी जाती है। छोटे भोजन करें।

आप भी इन टिप्‍स को आजमाकर मानसून में अपनी हेल्‍थ को दुरुस्‍त रख सकती हैं। उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें, साथ ही कमेंट भी करें। हेल्‍थ से जुड़े ऐसे ही और आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit: Shutterstock & Freepik

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