काम का तनाव, गतिहीन जीवन शैली और खाने की अनहेल्‍दी आदतें जैसे अनियमित समय पर खाना, बहुत अधिक खाना या चलते-फिरते खाने से हमारा डाइजेस्टिव सिस्‍टम अनुत्पादक हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप आंत का स्वास्थ्य पूरी तरह से सिकुड़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप, हमें गैस, सूजन, अपच, पेट दर्द और दस्त और अन्य गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है।

डाइजेशन केवल एक प्रक्रिया नहीं है जहां भोजन टूट जाता है और हमारे शरीर को एनर्जी और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, बल्कि एक अच्छा डाइजेस्टिव सिस्‍टम एक आधारशिला या कुंजी है जो आपको लंबे और रोग मुक्त जीवन की ओर ले जाता है। डाइजेशन को मजबूत बनाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां अद्भुत तरीके से काम करती हैं। ऐसी ही 13 आयुर्वेद जड़ी-बूटियों की जानकारी हमें पोषण विशेषज्ञ और प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक सोनम के इंस्‍टाग्राम से मिली है। आइए इसके बारे में विस्‍तार से आर्टिकल के माध्‍यम से जानें-

1. जीरा

2. मेथी

3. इलायची

4. अदरक

5. हल्दी

6. लौंग

7. दालचीनी

8. काली मिर्च

9. सौंफ के बीज

10. गिलोय

11. आमलकी 

12. अश्वगंधा

13. लहसुन

जीरा

cumin for digestion

जीरा डाइजेस्टिव सिस्‍टम के लिए बहुत अच्‍छी जड़ी बूटी है। यह पेट में ऐंठन और मतली को कम करती है, आंत्र से गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और पेट में बैक्‍टीरिया को रोकता है।

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मेथी

फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के साथ इसमें नेचुरल डाइजेशन के रूप में कार्य करने की क्षमता होती है। यह शरीर से सभी अवांछित और हानिकारक विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है।

इलायची

यह स्वाद और सुगंध से भरपूर होती है, यह सुगंध शरीर को डाइजेशन के लिए प्रभावी एंजाइमों की रिहाई को सक्रिय करने में मदद करती है, खासकर जब इसे भारी भोजन के बाद खाया जाता है।

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अदरक

अदरक के डाइजेशन को वार्म और शांत करने वाले, मतली रोधी और कई आम पेट के कीड़ों के लिए एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं।

हल्‍दी

turmeric for better digestion

हल्‍दी कार्मिनेटिव होती है - जिसका अर्थ है कि यह सूजन, लिवर को सपोर्ट करने वाली, एंटी-माइक्रोबियल और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी होती है जो डाइजेशन के लिए बहुत अच्‍छी होती है।

लौंग

जैसा कि हम जानते हैं कि यह मुख्य रूप से यूजेनॉल तेल से बना होता है, जो अपने उत्कृष्ट एंटीसेप्टिक, एंटीऑक्सीडेंट और एस्ट्रिजेंट गुणों के लिए जाना जाता है। लौंग कार्मिनेटिव प्रकृति का होता है, इस प्रकार यह जीआई में गैस बनने से रोकता है।

दालचीनी

दालचीनी भूख और सर्कुलेशन के लिए एक वार्मिंग उत्तेजक है। यह एंटीवायरल, एंटीबैक्‍टीरियल और एंटी-फंगल होती है। 

काली मिर्च

black pepper for digestion

काली मिर्च में यौगिक पिपेरिन होता है जो डाइजेस्टिव सिस्‍टम को आसान बनाता है और पेट में एंजाइमों की उत्तेजना को बढ़ावा देता है जो हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन से प्रोटीन के डाइजेशन के लिए फायदेमंद होते हैं।

सौंफ

यह सूजन को दूर करने में भी मदद कर सकती है और लिवर को उत्तेजित करती है। यह भूख में सुधार करती है और पेट के दर्द को कम करती है।

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लहसुन

लहसुन अपने इंसुलिन और अन्य यौगिकों के कारण एंटी-माइक्रोबियल और प्रोबायोटिक है, जो कार्डियो-वैस्कुलर हेल्‍थ को सपोर्ट करता है। इसके अलावा गिलोय, आमलकी और अश्वगंधा भी डाइजेशन के लिए बहुत अच्‍छा होता है।

 

हल्का सादा भोजन ही सर्वोत्तम होता है। एल्‍कलाइन फूड्स इस गैस्ट्रिक आग को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। घी अग्नि को उत्तेजित करता है और डाइजेशन में सुधार करता है। अच्छे डाइजेशन के लिए उचित तरीके से चबाना भी आवश्यक है। हमें उम्मीद है कि आपको यह लेख जानकारीपूर्ण लगा होगा। अगर आप इस तरह के और लेख पढ़ना चाहती हैं, तो हर जिंदगी से जुड़ी रहें।