मां बनने का अहसास महिलाओं के लिए सबसे खास होता है। बच्चे के साथ खेलना, उसे प्यार करना और उसकी देखभाल करना मां को जो संतुष्टि देता है, उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है। बच्चे का कोमल स्पर्श, मां को पुकारना और मां से अपनी हर बात शेयर करना महिलाओं को भीतर से बहुत मजबूत बनाता है। इसीलिए महिलाएं अपने बच्चों के लिए बहुत प्रोटेक्टिव होती हैं और उनकी छोटी से छोटी जरूरत पर ध्यान देती हैं। लेकिन बच्चों की देखभाल करते हुए महिलाएं उनके लिए जरूरत से ज्यादा फिक्रमंद हो जाती हैं और इसी कारण उनका स्ट्रेस और थकान बढ़ जाती है। अगर आप भी ऐसी ही स्थिति से परेशान हो रही हैं तो इन आसान परेंटिंग टिप्स को अपनाकर आप आसानी से बच्चों की परवरिश कर सकती हैं और खुद को हैप्पी भी रख सकती हैं। 

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ओवर केयरिंग से बचें

बच्चे की देखभाल करते-करते महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि वे बच्चे के लिए ओवर केयरिंग हो जाती हैं और हर वक्त उसके साथ बनी रहना चाहती हैं। बहुत सी महिलाएं बच्चे की देखभाल के मामले में किसी पर भरोसा नहीं करतीं हैं, बच्चों के दादा-दादी पर भी नहीं, इससे उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। अकेले बच्चे की देखभाल करने से जहां महिलाओं को अपने लिए स्पेस नहीं मिल पाता, वहीं बच्चा भी घर-परिवार के दूसरों से लोगों से बातचीत करना सीख नहीं पाता। बच्चे के लिमिटेड एक्सपोजर की वजह से उसकी स्किल्स तेजी से विकसित नहीं होतीं। ऐसा भी होता है कि बच्चे के शरारत करने पर महिलाएं परेशान हो जाती हैं और कई बार बच्चों के नखरों को हैंडल नहीं कर पातीं। अगर मां रिएक्ट करती हैं तो बच्चे भी कई बार नाराज हो जाते हैं और जिद्द करने लगते हैं, जिससे समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे को हर वक्त मॉनिटर ना करें, उसके कुछ देर के लिए फ्री होकर खेलने दें। अगर बच्चों को उनके दादा-दादी या नाना-नानी के पास छोड़ती हैं तो भी बच्चों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है। घर के बुजुर्गों के साथ बच्चे और भी ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करते हैं, साथ ही उनका तजुर्बा पेरेंटिंग को और भी बेहतर बना सकता है।  

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खुद को पैंपर करें

बच्चों की परवरिश में कोई चूक ना हो जाए, इसके लिए महिलाएं अपनी लाइफ को एंजॉय करना भी भूल जाती हैं। सज-संवरकर रहना, बाहर घूमना, किताबें पढ़ना, अपनी मनपसंद फिल्में देखना जैसे शौक हों तो महिलाएं ना सिर्फ खुद को रोजमर्रा की जिंदगी से ब्रेक दे सकती हैं, बल्कि कुछ नया भी सीख सकती हैं। इससे पर्सनल लेवल पर महिलाएं संतुष्ट रहती हैं और पेरेंटिग की जिम्मेदारियां उठाने में उन्हें बोझिल महसूस नहीं होता। रिलैक्स करने पर महिलाएं बच्चों के नखरों को बेहतर तरीके से हैंडल कर पाती हैं और प्यार से उन्हें मना लेती हैं।

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बच्चों को गलतियां करने दें

जब बच्चे गलती कर देते हैं तो बहुत सी महिलाएं बच्चों से गुस्सा हो जाती हैं, उन्हें बुरी तरह डांट देती हैं या फिर उन्हें डरा देती हैं। कई बार जाने-अनजाने ऐसी चीजें होने पर बच्चों के मन पर बुरा असर होता है, साथ ही महिलाएं भी इस चीज से स्ट्रेस्ड रहती हैं। बच्चों को परफेक्ट बनाने से ज्यादा उन्हें लाइफ सिचुएशन्स को हैंडल करने में सक्षम बनाना जरूरी है। ऐसे में अगर बच्चे ने कोई सीरियल गलती नहीं की है, तो उसे खुद ही चीजों को हैंडल करने दें। इससे उनकी लर्निंग बेहतर होगी और वे खुद समझ लेंगे कि आगे वे खुद को कैसे इंप्रूव कर सकते हैं। कई बार गलतियां होने से मिली सीख बच्चों को ज्यादा समझदार बनाती है। 

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दोस्तों और प्रियजनों के साथ बिताएं वक्त

महिलाएं बच्चों की परवरिश के लिए अपने दोस्तों और अपने करीबी लोगों से मिलना-जुलना कम कर देती हैं। यह चीज उनकी पर्सनेलिटी पर असर डालती है और बच्चे पर भी। अगर आप बच्चे को हैप्पी देखना चाहती हैं तो बहुत जरूरी है कि आप खुद अपना दायरा बढ़ाएं, अपने दोस्तों से मिले-जुलें। इससे बच्चा भी नए लोगों से मिलेगा और उसे सीखने का मौका मिलेगा। अपने क्लोज लोगों से कनेक्ट बना रहने से महिलाओं का कॉन्फिडेंस भी बना रहता है और पेरेटिंग से जुड़ी समस्याओं के हल भी मिल जाते हैं।  

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बच्चों के साथ ना करें जबरदस्ती

कई बार महिलाएं सोचती हैं कि बच्चे उनके कहे अनुसार ही व्यवहार करें और बच्चे के शरारत करने पर या काम नहीं करने पर गुस्सा हो जाती हैं। बच्चों को समय पर काम कराने, सुबह जल्दी उठाने, समय से पढ़ाई करने और रात में सोने के लिए सख्ती करती हैं। लेकिन बच्चे के साथ ज्यादा सख्ती से पेश आने पर वे दुखी महसूस कर सकते हैं। इस गलती से बचें। अगर बच्चे कहना ना मानें तो उन्हें गुस्सा करने के बजाय प्यार से हैंडल करें, क्योंकि बच्चे के बड़े होने के साथ वे इंडिपेंडेंट फील करना शुरू कर देते हैं। पेरेंट्स अगर दोस्त बनकर रहते हैं तो बच्चों के लिए उनका कहना मानने की संभावना बढ़ती है और बच्चों के साथ प्यार का रिश्ता भी बरकरार रहता है