कहते हैं कि जो इंसान आसानी से रोने लगता है वो दिल का बहुत सच्चा होता है। वैसे ये तो कहावत ही है, लेकिन जो लोग ज्यादा रोते हैं साइंस कहती है कि वो ज्यादा बेहतर तरीके से अपने मूड को कंट्रोल कर सकते हैं। जो लोग आसानी से रो पड़ते हैं कई बार उनका मजाक उड़ाया जाता है और उन्हें इमोशनल माना जाता है। पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने आंसू निकलने नहीं देते। ऐसे लोगों के लिए स्ट्रेस की समस्या बढ़ सकती है।

2014 में 'जर्नल फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी' में पब्लिश की गई एक स्टडी के मुताबिक जो लोग रो लेते हैं वो लोग काफी पॉजिटिव चेंज ला सकते हैं अपने मूड में। मिनासोटा अमेरिका में साइकोलॉजिस्ट द्वारा की गई एक अन्य स्टडी बताती है कि आंसुओं को रोकने से स्ट्रेस बढ़ता है और क्योंकि आम तौर पर आंसू हमारे स्ट्रेस को कम करते हैं और मूड को बेहतर बनाते हैं। 

ये दोनों स्टडी एक खास बात पर गौर करती है और वो ये कि रोना हमारी सेहत के लिए अच्छा है और इससे शरीर को फायदा मिल सकता है। ऐसे में अगर हम सोचे कि आखिर न रोने से शरीर पर क्या असर पड़ता है तो कई चीज़ें सामने आएंगी। वो लोग जो अपने आंसू रोक लेते हैं उन्हें कुछ खास चीज़ों पर गौर करने की जरूरत है। 

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1. आंसू रोकने से होता है ज्यादा स्ट्रेस-

जब हम अपने आंसू रोकने की कोशिश करते हैं तो मानसिक तनाव महसूस होता है। Harvard Health Publishing के अनुसार जब भी ऐसा कोई इवेंट होता है कि हमें रोना आए तो दिमाग का ग्रे मैटर वाला एरिया amygdala एक्टिव हो जाता है और सिग्नल भेजता है। हमारा शरीर उसके हिसाब से ही एक्ट करता है। इस प्रकिया से adrenocorticotropic हार्मोन्स रिलीज होते हैं जो किडनी तक पहुंच कर स्ट्रेस देने वाला हार्मोन कोर्टिसॉल रिलीज करते हैं। 

अगर हम नहीं रोते तो ये हार्मोन बढ़ता जाता है और हम तनाव महसूस करते हैं। 

health and crying

2. दिल की धड़कन पर भी होता है असर-

इमोशनल आउटबर्स्ट्स बहुत जरूरी होते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो स्ट्रेस के कारण हमारी दिल की धड़कन पर भी असर पड़ सकता है। हमारे हार्ट से ब्लड बहुत तेज़ी से शरीर के अन्य हिस्सों में पंप होता है। यही कारण है कि आपके हाथ-पैर और गाल कई बार गर्म महसूस होते हैं जब आप रोने वाली होती हैं। ऐसे में दिल की धड़कन बढ़ सकती है। 

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3. एंग्जाइटी की समस्या-

दिल की धड़कन बढ़ना उन लोगों के लिए अच्छा नहीं है जिन्हें एंग्जाइटी की समस्या है। ऐसे में पैल्पिटेशन्स हो सकते हैं और पैनिक अटैक भी आ सकता है। ऐसे में स्थिति और बिगड़ेगी। 

crying out loud

4. सांस लेने में दिक्कत-

अगर आपको एंग्जाइटी अटैक आता है, स्ट्रेस लेवल बढ़ता है, हाथ-पैर गर्म होते हैं और दिल की धड़कनें बढ़ती हैं तो सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। ऐसे में शरीर अपने आप तेज़ी से सांस लेना शुरू कर देता है। आपने देखा होगा कि इमोशनल आउटबर्स्ट्स को रोकते समय आप जोर-जोर से सांस लेती हैं। 

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रोने के फायदे- 

1. आप भावनात्मक रूप से अच्छा महसूस करेंगी।

2. आपकी आंखें साफ होंगी और हेल्दी रहेंगी।

3. आंखों से बैक्टीरिया खत्म होगा। 

4. स्ट्रेस कम होगा जो बहुत जरूरी है।  

इसलिए अगर आपको रोना आए तो दिल को हल्का करने के लिए रो लेना चाहिए। जरूरी नहीं कि हम अपने आंसुओं को हर बार रोककर अपने शरीर के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करें। अगर आपको ये स्टोरी पसंद आई है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।