बार-बार मिसकैरेज हो तो क्या करें? डॉक्टर से जानें

मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद अनुभव होता है। अगर किसी वजह से यह ख्वाहिश अधूरी रह जाए, तो दिल और उम्मीद दोनों टूट जाते हैं। जब बार-बार गर्भधारण के बाद किसी कारणवश मिसकैरेज (गर्भपात) हो जाता है, तब यह शारीरिक ही नहीं, मानसिक और भावनात्मक रूप से भी गहरी चोट लगती है। बार-बार मिसकैरेज से महिला के शरीर की ताकत घट जाती है और आत्मविश्वास टूट जाता है। यह सदमा कई बार इतना गहरा होता है कि महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती है और इससे बाहर निकल पाना बहुत मुश्किल होता है।
बार-बार मिसकैरेज क्यों होता है? इस बारे में हमें आशा आयुर्वेदा के दिल्ली सेंटर की डायरेक्टर और गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर चंचल शर्मा विस्तार से बता रही हैं। डॉक्टर चंचल शर्मा बताती हैं कि बार-बार गर्भपात होना आपकी खुशियों का अंत नहीं है। घबराने या खुद को दोष देने के बजाय सही कारणों की पहचान और सही इलाज से आप दोबारा गर्भधारण कर सकती हैं। आयुर्वेदिक इलाज से हार्मोनल असंतुलन को ठीक करके और शरीर से विषैले तत्वों को निकालकर समस्या को जड़ से दूर किया जा सकता है।
मिसकैरेज से बचने के लिए जरूरी चेकअप
आपको यह समझना होगा कि मिसकैरेज के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए किसी भी नतीजे तक पहुंचने से पहले अच्छे से चेकअप कराएं।

- ब्लड और हार्मोन टेस्ट कराएं- अक्सर गर्भपात का कारण हार्मोनल असंतुलन होता है, जैसे इंसुलिन लेवल का असंतुलन, प्रोजेस्टेरोन की कमी, थायराइड या डायबिटीज की समस्या। ऐसे में थायराइड या डायबिटीज होने पर रेगुलर चेकअप कराना बेहद जरूरी है।
- गर्भाशय की जांच कराएं- हेल्दी प्रेग्नेंसी के लिए आपके गर्भाशय का हेल्दी होना बहुत जरूरी है। अगर इसमें किसी प्रकार का इंफेक्शन, फाइब्रॉइड या पोलिप्स है, तो इससे भी बार-बार गर्भपात हो सकता है। इसलिए समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराते रहें।
- जेनेटिक फैक्टर की जांच- कई बार मिसकैरेज का कारण जेनेटिक होता है। इसलिए, जरूरी है कि आप इसका भी टेस्ट करा लें।
- इम्यून सिस्टम की भूमिका- कुछ महिलाओं में इम्यून सिस्टम की कमजोरी से भी गर्भपात हो सकता है। ऑटोइम्यून कंडीशन (जैसे ल्यूपस) या ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर के कारण भी गर्भ में ब्लड फ्लो में रुकावट आ सकती है।
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मिसकैरेज से बचने के उपाय
आयुर्वेद के अनुसार, गर्भाशय की कमजोरी की वजह से भी बार-बार गर्भपात हो सकता है। इसलिए, संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेदिक उपचार से आपके गर्भाशय को मजबूत बनाया जाता है, ताकि वह गर्भधारण के बाद स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में सक्षम हो।

- संतुलित आहार लें- अपने भोजन में कैल्शियम, आयरन, फॉलिक एसिड, विटामिन-D और B-12 शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, सूखे मेवे, दूध, दही और घी का सेवन करें। जंक फूड, ज्यादा मसालेदार या प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें।
- तनाव से दूरी बनाए रखें- तनाव हार्मोन को असंतुलित करता है और गर्भ के लिए हानिकारक होता है। तनाव को कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज करें।
- पर्याप्त नींद लें- रात में 7-8 घंटे की नींद लें ताकि शरीर को रिकवरी का समय मिल सके।
- गंदी आदतों से बचें- स्मोकिंग, अल्कोहल या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें, क्योंकि ये गर्भधारण की क्षमता और भ्रूण के विकास दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं।
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उम्मीद कभी मत छोड़िए। हर असफलता एक नए आरंभ का संकेत होती है। सही सलाह, सही इलाज और सकारात्मक सोच से मातृत्व का सपना जरूर पूरा हो सकता है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
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