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    पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को थायरॉयड होने का खतरा है ज्‍यादा, आज ही कराएं टेस्‍ट

    वैसे तो थायरॉयड की प्रॉब्‍लम किसी को भी हो सकती हैं, लेकिन यह एक साइलेंट कंडीशन है जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है, जानें कैसे।
    Published -29 Mar 2018, 14:26 ISTUpdated -05 Jul 2018, 19:45 IST
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    आज थायरॉयड एक serious प्रॉब्‍लम बन गई है। जिससे लगभग हर कोई परेशान हैं। एक ताजा रिसर्च के अनुसार लगभग 32 प्रतिशत भारतीयों में थायरॉयड के असामान्य लेवल पाया जाता हैं। वह विविध थायरॉयड रोगों से पीड़ित होते हैं, जैसे thyroid नोड्यूल, हाइपरथायराइडिज्म, goiter, thyroiditis और थायराइड कैंसर।

    थायरॉयड तितली के आकार का गले में मौजूद बॉडी का मेन एंडोक्राइन ग्लैंड है। इसमें थायरॉयड हार्मोन निकलता है जो हमारे मेटाबॉलिज्म रेट को कंट्रोल करता है। यह हार्मोन मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। थायरॉयड में काफी प्रॉब्‍लम्स होती है। कभी वज़न अचानक से बढ़ जाता है तो कभी अचानक से कम हो जाता है और बाल भी झड़ने लगते हैं। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है। जिसके चलते छोटी से छोटी बीमारी से लेकर बड़ी सी बड़ी बीमारी होने लगती है।

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    साइलेंट किलर है थायरॉयड

    वैसे तो यह प्रॉब्‍लम किसी को भी हो सकती हैं लेकिन रिसर्च से यह भी संकेत मिलता है कि सब क्लिनिकल हाइपोथायराइडिज्म असल में हाइपोथायराइडिज्म का एक हल्का रूप है। यह एक साइलेंट कंडीशन है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक प्रभावित करती है। पूरे देश में thyroid disorders का सबसे प्रचलित रूप है।

    सब-क्लिनिकल हाइपोथायराइडिज्म का पता तब चलता है। जब किसी व्यक्ति में हाइपोथायराइडिज्म के हल्के लक्षण दिखते हैं। थायरॉयडड-उत्तेजक हार्मोन (टीएसएच) का हाई लेवल मिलता है। थायरॉक्सिन (टी4) का सामान्य स्तर मिलता है।
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    महिलाओं में अधिक होता है थायरॉयड रोग

    हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष पद्मश्री डॉक्‍टर केके अग्रवाल ने कहा कि थायरॉयड रोग महिलाओं में अधिक होता है। इससे वजन और हार्मोन असंतुलन जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। थायरॉयड हार्मोन और टीएसएच में वृद्धि के निर्धारण में आनुवंशिकी की एक प्रमुख भूमिका है। इससे ऑटोइम्यून थाइरॉयड रोग का पता लगाना भी संभव हो जाता है। उन्होंने कहा, 'थायरॉयड समस्याओं के पारिवारिक इतिहास वाले लोगों को थायरॉयड असामान्यता का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, अपने परिवार के चिकित्सा इतिहास के बारे में जागरूक होना और पहले से सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।'

    ये होते हैं लक्षण

    डॉक्‍टर अग्रवाल ने बताया कि हाइपोथायराइडिज्म के कुछ सामान्य क्लिनिकल लक्षणों में डिप्रेशन और थकान, हाइपरलिपिडेमिया और हाइपर होमोसिस्टीनेमिया, गॉइटर में रूखे बाल, ठंड बर्दाश्त ना कर पाना, कब्ज और वजन बढ़ना, सुनने में कठिनाई, मेनोरेगिया, ब्रेडिकार्डिया और कोरोनरी धमनी रोग या हार्ट डिजीज आदि प्रमुख हैं।

    उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि लोगों के बीच थायरॉयड के कारण, लक्षण, उपचार और समस्याओं के परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा की जाए। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इन रोगों का महिलाओं के लिए अधिक जोखिम है। गर्भवती महिलाओं या गर्भधारण की इच्छुक महिलाओं के लिए यह जरूरी है कि वे अपने थायरॉयड की जांच करा लें।

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