एक्यूपंक्चर चिकित्सा के सबसे प्राचीन वैकल्पिक तरीकों में से एक है जिसका प्रचलन आज भी है। यह पारंपरिक चीनी चिकित्‍सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण घटक है। उपचार के इस तरीके में शरीर में मेरिडियन पॉइंट्स पर स्टेरलाइज्ड सुइयों को चुभाया जाता है, इससे असंतुलन दूर होता है और सामान्य बीमारियों का उपचार होता है। यह मस्कुलोस्केलेटल की समस्‍या, नर्वस सिस्‍टम, डाइजेस्टिव सिस्‍टम, रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन प्रणाली) और सर्कुलेटरी सिस्‍टम (संचार प्रणाली) के रोगों के उपचार में बहुत प्रभावी साबित हुआ है। आइए हम उन बीमारियों पर एक नजर डालते हैं जिनका उपचार इस पद्धति से हो सकता है और इस बारे में हमें जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट के सीनियर नैचुरोपैथ, डॉ. श्रीविद्या नंदकुमार बता रहे हैं। 

नर्वस सिस्‍टम की समस्‍याएं

फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और ऑक्‍यूपेशनल थेरेपी (व्यावसायिक) का उपयोग आमतौर पर स्‍ट्रोक से उबरने के लिए किया जाता है, ऐसे में शरीर और सिर में किया जाने वाला एक्यूपंक्चर ब्रेन में ब्‍लड की आपूर्ति को बढ़ाने में प्रभावी होता है, जिससे रोगी की कार्यात्मक क्षमता में सुधार होता है और स्ट्रोक के लिए प्रभावी प्रेरक के रूप में काम करता है। एक्यूपंक्चर सेशंस ट्राइजेमिनल और हर्पेटिक न्यूराल्जिया के इलाज में भी प्रभावी हैं, हालांकि हमें इसे प्रमाणित करने के लिए अधिक आंकड़ों की आवश्यकता है। फिर भी एक्यूपंक्चर का उपयोग चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों से पीड़ित रोगियों की मनोदशा में सकारात्मक परिवर्तन करने के लिए भी किया जाता है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित 400 रोगियों पर किए गए एक परीक्षण के अनुसार, 30 प्रतिशत रोगियों में महत्वपूर्ण सुधार दिखाई दिया। हालांकि, व्यापक वैज्ञानिक समुदाय द्वारा अभी भी आंकड़ों की पुष्टि नहीं की गई है। नर्वस सिस्‍टम में होने वाली आकस्मिक डैमेज से होने वाले ट्रॉमैटिक नर्व पैरालिसिस (पक्षाघात) का उपचार भी विभिन्न प्रकार की एक्यूपंक्चर तकनीकों से किया जा सकता है। अगर आप संतोषजनक बदलाव देखना चाहते हैं, तो आपको 6 महीने तक उपचार जारी रखना होगा।

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डाइजेशन संबंधी समस्याएं

सभी प्रकार के अपच को ठीक करने के लिए एक्यूपंक्चर की सलाह नहीं दी जाती है। उदाहरण के लिए, अगर अधिक खाना इसका कारण है तो इसका समाधान कम खाना ही है। अगर अनहेल्‍दी डाइट इसका कारण है तो आपको अपनी डाइट में बदलाव करने के लिए डाइ‍टीशियन की जरूरत है। लेकिन अगर तनाव या हाईटस हर्निया अपच का कारण है तो एक्यूपंक्चर में इसका ट्रीटमेंट है। कई शोधों से यह भी पता चला है कि एक्यूपंक्चर पेट में एसिड के लेवल को कम कर सकता है और पेट के अल्सर का इलाज कर सकता है। यह मल के माध्यम से पित्त की पथरी को निकाल सकता है, यह गॉल ब्‍लैडर निकालने की आवश्यकता को खत्‍म करता है। हालांकि, अब तक प्रकाशित अध्ययनों से मान्य निष्कर्ष निकालना जल्‍दबाजी होगी। कब्ज में एक्यूपंक्चर बहुत प्रभावी है और इसके पर्याप्त सबूत हैं। यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि संक्रामक रोगों, विशेष रूप से आंत्र संक्रमणों के मामले में एक्यूपंक्चर हमारे शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा में सुधार करने में मदद कर सकता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि को बदल देता है और इम्युनोग्लोबुलिन (प्रतिरक्षा प्रोटीन) के उत्पादन को उत्तेजित करता है, जो हमलावर बैक्टीरिया को मारता है। 

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मस्कुलोस्केलेटल की समस्‍या

इस सिस्‍टम में होने वाली तीन सबसे आम प्रकार के डैमेज में मोच, ऑस्टियोअर्थराइटिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस शामिल हैं। मोच एक्यूपंक्चर के लिए काफी अच्छी तरह से प्रतिक्रिया करता है। जो तीन-चौथाई से अधिक मरीज एक्यूपंक्चर के विकल्प का चुनाव करते हैं, उनको इसके कुछ ही सेशंस में दर्द से राहत मिल जाती है। यद्यपि एक्यूपंक्चर ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द के इलाज में प्रभावी है, लेकिन इससे मिली राहत हमेशा के लिए प्रभावी नहीं रहती है और आपको छह महीने के बाद दोबारा उपचार की जरूरत पड़ सकती है। चूंकि स्थिति आंतरिक असुविधा और दर्द का कारण बनती है जो अलग-अलग रोगी में भिन्न भी हो सकती है, ऐसे में उपचार सेशंस अक्सर जरूरतों के अनुसार तय किए जाते हैं, इसलिए रूमेटाइड अर्थराइटिस के लिए एक्यूपंक्चर थोड़ा अधिक जटिल है। रोग के तीव्रता, सूजन की स्थिति के दौरान, यह सुझाव दिया जाता है कि एक्यूपंक्चर दर्द को बदतर बना सकता है। हालांकि, एक बार सूजन कम हो जाने पर, शेष जोड़ों की क्षति अक्सर माध्यमिक ऑस्टियोआर्थराइटिस की तरफ लेे जाती है, जो एक्यूपंक्चर उपचारों के दौरान अच्छी तरह से प्रतिक्रिया करता है।

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रेस्पिरेटरी सिस्‍टम से जुड़ी समस्‍याएं

अस्थमा से पीड़ित रोगियों में एक्‍यूपंक्‍चर श्वांस नलिका की मसल्‍स की दीवारों को पतला करने में मदद करता है। यद्यपि सटीक उपायों का पता लगाना अभी बाकी है, चीन में हाल ही में किए गए नैदानिक परीक्षण से पता चला है कि 70 प्रतिशत से अधिक अस्‍थमा रोगियों को एक वर्ष में एक बार एक्यूपंक्चर और मोक्सीबस्टन के कोर्स करने से राहत का अनुभव हुआ। एक्‍यूपंचर से उपचार अस्थमा के अटैक की तीव्रता और आवृत्ति को नीचे लाने में सक्षम था, यहां तक कि अस्थमा के तीव्र दौरे के दौरान सीने पर पीठ पर कुछ पॉइंट्स पर सुई के इस्‍तेमाल से अटैक की तीव्रता को कम किया जा सकता है। एक्यूपंक्चर श्वांस नलियों को खोलकर ब्रोंकाइटिस में अस्‍थमा का इलाज करने में भी मदद कर सकता है ताकि बिना रुकावट के फेफड़े के टिश्यु को कुशलता से क्रियाशील बनाया जा सके। राहत का अनुभव करने वाले ब्रोंकाइटिस रोगियों को इसके प्रभाव को बनाए रखने के लिए उपचार को दोहराने की सलाह दी जाती है।

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सर्कुलेटरी सिस्‍टम से जुड़ी समस्‍याएं

हार्ट की मसल्‍स में ऐंठन के ट्रीटमेंट में एक्यूपंक्चर की प्रभावशीलता पर कई परीक्षण किए गए हैं, जिन्हें एंजाइना भी कहा जाता है। शोधकर्ताओं ने ट्रीटमेंट के बाद हार्ट की मसल्‍स की दक्षता और कार्यात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी। यह नैदानिक परीक्षण द्वारा समर्थित है जो यह दिखाता है कि एंजाइना से पीड़ित 80 प्रतिशत रोगियों में नियमित एक्यूपंक्चर सेशन के बाद सुधार हुआ। यह एरिथमिया को ठीक करने में भी प्रभावी है। एट्रियल फिब्रिलेशन के स्थापित मामलों में, एक्यूपंक्चर 1.5 प्रतिशत से अधिक मामलों को प्रभावित नहीं करता है। हालांकि, हाल ही में सामने आए एरिथमिया के 70 प्रतिशत से अधिक मामलों में सकारात्मक परिणाम दिखे हैं। एक्यूपंक्चर हाइपरटेंशन और डिस्लिपिडेमिया के ट्रीटमेंट में भी सहायक है।

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अगर आप इनमें से किसी भी समस्‍या से परेशान हैं और एक्यूपंक्चर के माध्‍यम से ट्रीटमेंट कराना चाहती हैं, तो आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें। यह सुनिश्चित कर लें कि आप खुद को अनुचित प्रैक्टिस के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए एक योग्य और अनुभवी एक्यूपंक्चर चिकित्सक से ही संपर्क करें। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

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