एक सामान्‍य मेनोपॉज के लक्षणों में शामिल, झनझनाहट बहुत ज्‍यादा अस्थिर और अनकंफर्टेबल हो सकता है। आमतौर पर यह हाथ, बाजुओं, पैरों और टांगों को प्रभावित करता है लेकिन झनझनाहट संवेदनाओं को शरीर के किसी भी हिस्से में अनुभव किया जा सकता है। हालांकि यह लक्षण किसी भी गंभीर अंतर्निहित स्थिति की ओर इशारा नहीं करते है, लेकिन ये निश्चित रूप से रोजाना के कामों में बाधा उत्‍पन्‍न करते हैं। यह लक्षण पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज पीरियड के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण होता है। इस लक्षण के कारणों को समझना प्रभावी रूप से इस समस्‍या से निपटने में मदद करेगा।

हाथ-पैरों में झनझनाहट क्या हैं?

चिकित्सकीय रूप से इसे ‘पेरेस्टेसिया’ के रूप में जाना जाता है, जब आप एक विशेष स्थिति या मुद्रा में बैठते हैं, तो झनझनाहट होने लगती है और ये किसी भी समय हो सकती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विशिष्ट स्थिति नर्वस को कचोटती हैं या धमनी प्रेस होती हैं जिससे एक विशिष्ट अंग "सो जाता है" या अस्थायी रूप से सुन्न हो जाता है। इससे राहत मिलने के तुरंत बाद, आपका अंग वापस सामान्य हो जाता है, और झनझनाहट महसूस होना कम हो जाता है।

झनझनाहट के लक्षण

  • खतरनाक क्रॉलिंग फीलिंग
  • सुन्न होना
  • अस्थायी समय के लिए किसी एक अंग में कम या कोई सनसनी नहीं होना 
  • जलन का अहसास
  • चुभन की संवेदना
  • पिंस और सुई की तरह किसी एक निश्चित अंग में चुभन की तरह महसूस होना
  • संवेदना में परिवर्तन
  • संवेदनशीलता में बढ़ना

कुछ महिलाओं को इस समय ऐसा लग सकता है कि जैसे त्वचा पर कुछ कीट रेंग रहे हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है। इसे फॉर्मेशन के रूप में जाना जाता है।

tingling extremities during menopause INSIDE

मेनोपॉज के दौरान झनझनाहट के क्‍या कारण है?

इस झनझनाहट की भावना का पहला कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव है। एस्ट्रोजन सेंट्रल नर्वस सिस्टम के कार्यों को विनियमित करने में एक जटिल भूमिका निभाता है। जब शरीर को इस हार्मोन की पर्याप्त मात्रा प्राप्त नहीं होती है, तो नियमित कामकाज प्रभावित होता है। यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम के सुचारू संचालन को प्रभावित करता है जो शरीर में झनझनाहट को जन्म देता है।

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हालांकि, हार्मोनल परिवर्तनों के अलावा, कुछ अन्य समस्याएं भी झनझनाहट को जन्म दे सकती हैं। उनमें से कुछ हैं:

  • थायरॉयड समस्याएं
  • स्‍ट्रोक 
  • आघात
  • चिंता
  • हाइपर वेंटिलेशन
  • रीढ़ की हड्डी में चोट
  • कार्पल टनल सिंड्रोम
  • डायबिटिक न्यूरोपैथी
  • विटामिन बी 12 की कमी
  • नशीली दवाओं की विषाक्तता

हालांकि यह एक मामूली लक्षण है, लेकिन अगर झनझनाहट बहुत लंबे समय तक रहती है या अक्सर होती है, तो बिना किसी देरी के डॉक्टर से परामर्श करना उचित रहता है। झनझनाहट के लंबे समय तक रहने से कुछ दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी समस्‍याएं हो सकती हैं जैसे - स्लेड स्‍पीच, गर्दन, पीठ या सिर पर चोट, चेतना का नुकसान, चलने में परेशानी, कमजोरी, अंगों में सनसनी का नुकसान आदि।

मेनोपॉज के दौरान झनझनाहट से निपटने के उपाय

झनझनाहट की समस्‍या से अपनी दिनचर्या में निश्चित आहार और जीवनशैली में बदलाव लाकर आसानी से निपटा जा सकता है। हाइड्रेटेड रहना, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद का समय, बुनियादी आवश्यकताएं हैं जो किसी भी मेनोपॉज संबंधी समस्या को दूर रख सकती हैं। अगर हेल्‍दी डाइट, भरपूर नींद और एक्‍सरसाइज रूटीन अपनाने के बाद भी संवेदनाएं बंद नहीं होती हैं, तो डॉक्टर वैकल्पिक चिकित्सा या काउंटर दवाओं की सिफारिश कर सकते हैं। इसमें एप्सम साल्ट बाथ, एक्यूपंक्चर, मसाज, और विटामिन बी 12 सप्लीमेंट मददगार हो सकते हैं।

एक्‍सपर्ट की सलाह के लिए डॉक्‍टर प्रीति देशपांडे एम.एस. (OBGY), FICOG, एंडोस्कोपी प्रशिक्षण IRCAD (फ्रांस) का विशेष धन्यवाद।

Source, Reference and Recommended Reading:

https://www.menopausenow.com/tingling-extremities

https://www.menopausecentre.com.au/information-centre/articles/tingling-extremities-during-menopause/

http://www.healthline.com/health/menopause/menopausal itching

http://www.megsmenopause.com/2018/09/21/tingling-exttremities