आज के समय में सीमित परिवार महिलाओं की सेहत और परिवार की खुशहाली दोनों के लिए बहुत जरूरी हो गया है। अच्छी बात ये है कि अब कॉन्ट्रासेप्टिव्स के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जिनके जरिए बर्थ कंट्रोल किया जा सकता है। कपल्स अपनी जरूरत के हिसाब से कॉन्ट्रासेप्टिव का चुनाव कर सकते हैं। बर्थ कंट्रोल या कॉन्ट्रासेप्शन को आमतौर पर दो कैटेगरी में बांटा गया है- रिवर्सिबल और इररिवर्सिबल या परमानेंट मेथड। रिवर्सिबल मेथड्स में बैरियड मैथड, इंट्रायूटेराइन डिवाइस और हार्मोनल मेथड आते हैं। 

how to use contraceptives

बैरियर मैथड

बैरियर मैथड के जरिए स्पर्म को एग तक पहुंचने से रोका जाता है। इसके लिए या तो बैरियर बनाया जाता है या फिर स्पर्म का एग तक प्रवाह रोका जाता है। बैरियर कॉन्ट्रासेप्टिप्स के तहत कंडोम्स का उदाहरण लिया जा सकता है। बैरियर मैथड से सेक्शुअल ट्रांसमिटेड डिजीज से भी सुरक्षा संभव होती है, जबकि दूसरे तरीके से ऐसा संभव नहीं है। युवा कपल्स कंडोम्स का इस्तेमाल काफी ज्यादा करते हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी रोकने में ये दूसरे तरीकों की तुलना में उतना असरदार नहीं है। 

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इंट्रायूटेराइन डिवाइसेस (आईयूडी)

ये छोटे डिवाइस होते हैं, जिन्हें ट्रेंड प्रोफेशनल्स के जरिए यूट्रस के भीतर डाला जाता है। ये डिवाइस यूट्रस में एग के फर्टिलाइजेशन होने की प्रक्रिया को रोक देते हैं। जो महिलाएं अपनी प्रेग्नेंसी डिले करना चाहती हैं या फिर जो महिलाएं अपने बच्चों के बीच पर्याप्त अंतर चाहती हैं, उनके लिए यह तरीका बहुत उपयुक्त है। इस तरीके में डिवाइस पर कॉपर या हार्मोन हो सकता है। कॉपर टी (जो टी शेप का होता है), महिलाओं में काफी ज्यादा लोकप्रिय है। यह कॉन्ट्रासेप्शन का प्रभावी तरीका है, इसे लगवाने के बाद महिलाएं कई साल के लिए निश्चिंत हो जाती हैं। जब महिलाएं अपना परिवार आगे बढ़ाना चाहती हैं तो वे आईयूडी हटवा सकती हैं। 

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हार्मोनल बर्थ कंट्रोल मेथड

कॉन्ट्रासेप्शन के इस तरीके में या तो ओव्यूलेशन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाती है या फिर एग का फर्टिलाइजेशन रोका जाता है। इसके लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स ली जाती हैं। गर्भनिरोध की इन गोलियों में हार्मोन्स का कॉम्बिनेशन होता है। हालांकि इन गोलियों को लेकर कई तरह के मिथ भी प्रचलित हैं, लेकिन इन्हें लेना सेफ होता है और ये प्रेग्नेंसी रोकने में बहुत असरदार होते हैं। गर्भनिरोधक गोलियां लेने से कई दूसरे फायदे भी होते हैं जैसे कि मेंस्ट्रुअल साइकिल रेगुलर बनी रहती है, पीरियड्स के दौरान दर्द नहीं होता, पीसीओस की समस्या में राहत रहती है। हार्मोनल मेथड दवाओं से भिन्न भी हो सकते हैं। इनमें इंजेक्शन, इंप्लांट और हार्मोनल आईयूडीज भी शामिल हैं। 

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लंबी अवधि के रिवर्सिबल कॉन्ट्रासेप्शन

रिवर्सिबल कॉन्ट्रासेप्टिव्स के तहत कई तरह के गर्भनिरोध के तरीके अपनाए जा सकते हैं और ये तरीके भी प्रेग्नेंसी रोकने में काफी असरदार होते हैं। गोलियों की तुलना में इन्हें रोजाना लेने की जरूरत नहीं होती। इनमें इंट्रायूटेराइन डिवाइस, जिनमें कॉपर और हार्मोनल, हर तीन महीने पर इंजेक्शन से ली जाने वाली दवाएं, सबडर्मल इंप्लांट, जिन्हें स्किन के भीतर लगाया जाता है, शामिल हैं। जब आप प्रेग्नेंट होना चाहें तो इन डिवाइसेस को हटवा सकती हैं। 

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्शन

अगर असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाते हैं, तो उसके बाद अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी से बचाव के लिए इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इसका दुरुपयोग बहुत ज्यादा होता है और अगर इसे नियमित रूप से और लंबे समय तक लिया जाए तो इससे कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। इसे सिर्फ इमरजेंसी की स्थितियों में लेना चाहिए। अगर असुरक्षित यौन संबंध बनाए गए हैं तो उसके 72 घंटों के भीतर ये दवा ले लेनी चाहिए, क्योंकि शरीर में इस अवधि में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अगर यह दवा देरी से ली जाए तो यह बेसअर साबित होती है। 

गर्भनिरोध के स्थाई तरीके

जो महिलाएं एक या दो बच्चे हो जाने के बाद भविष्य में प्रेग्नेंट नहीं होना चाहतीं, वे परमानेंट कॉन्ट्रासेप्शन के तरीके भी अपना सकती हैं। 

स्टर्लाइजेशन

स्टर्लजाइजेशन के बाद महिलाएं हमेशा के लिए निश्चिंत हो जाती हैं, क्योंकि यह गर्भनिरोध का स्थाई तरीका ( इररिवर्सिबल कॉन्ट्रासेप्शन ) है। स्टर्लाइजेशन के लिए सर्जरी की जाती है। महिलाओं की फेलोपियन ट्यूब्स को बांध दिया जाता है और पुरुषों में vasectomy की प्रक्रिया अपनाई जाती है। 

कई तरह के ऑप्शन्स उपलब्ध होने की वजह से कपल्स को पूरी स्वतंत्रता होती है कि वे गर्भनिरोध का कौन सा तरीका अपनाना चाहते हैं। महिलाएं अपने जीवनकाल के अलग-अलग चरणों में अपनी जरूरत के अनुसार गर्भनिरोध के अलग-अलग तरीके अपना सकती हैं। इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि जो तरीके यंग महिलाओं में कॉन्ट्रासेप्शन के लिए बेहतर रहते हैं, वे फैमिली पूरी हो जाने और मेनोपॉज के करीब पहुंचने के समय में उतने बेहतर नहीं होते। हर महिला का शरीर अलग होता है, खासतौर पर अगर उन्हें किसी तरह की हेल्थ प्रॉब्लम है, तो उसके लिए गर्भनिरोध का जो तरीका बेहतर हो, वह दूसरी महिला के लिए शायद उतना कारगर सिद्ध ना हो। इसीलिए महिलाओं को यह सलाह दी जाती है कि वे ट्रेंड मेडिकल प्रोफेशनल से बर्थ कंट्रोल के हर तरीके के फायदे और नुकसान के बारे में समझ लें। इसके लिए डॉक्टर महिलाओं के शरीर की जांच करते हैं, उनकी मेडिकल हिस्ट्री की पड़ताल करते हैं और महिलाओं की प्रिफरेंस के आधार पर उन्हें गर्भनिरोध के सबसे उपयुक्त तरीके का सुझाव देते हैं। रीप्रोडक्टिव और सेक्शुअल हेल्थ हर महिला का बेसिक ह्यूमन राइट है और महिलाओं को अपनी सेहत से जुड़ी हर जानकारी रखते हुए अपने अधिकारों के उपयोग का हक है। 

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Reference:

https://www.nichd.nih.gov/health/topics/contraception/conditioninfo/types

https://www.medicinenet.com/birth_control_methods/article.htm