हमारे आसपास ऐसे कई पेड़ और पौधे मौजूद रहते हैं, जिनको लंबे समय से भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा में इस्तेमाल किया जाता रहा है। जैसे-नीम, अदरक, गिलोय, एलोवेरा आदि पेड़-पौधों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक औषधी के रूप में होता है। इसी तरह का एक और पौधा है, जिसका इस्तेमाल भी कई आयुर्वेदिक औषधी के लिए किया जाता है। जी हां, इस पौधा का नाम है 'कालमेघ का पौधा'। जिसे कई लोग बिटर के राजा के नाम से भी जानते हैं। इसका इस्तेमाल जलन-सूजन कम करने, बुखार कम करने आदि कई घरेलू उपचारों में भी किया जाता है। अगर आप इस पौधे और इसके फायदे के बारे में नहीं जानते हैं, तो चलिए इस लेख में पौधे और इसके फायदे के बारे में जानते हैं।

क्या है कालमेघ का पौधा?

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यह एक ऐसा पौधा है जो ज्यादातर जंगली इलाकों में पाया जाया है। यह पौधा हरे रंग को होता है और इसकी पत्तियां मिर्च के पौधों के सामान दिखाई देती है। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम Andrographis Paniculata है, जिसे Green chiretta के नाम से भी जाना जाता है। कई लोग इसे आम बोलचाल की भाषा में बिटर का राजा के नाम से भी जानते हैं। आइये जानते हैं इसके फायदे के बारें।

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वायरल बीमारी के लिए 

कई लोगों का मानना है कि कालमेघ के नियमित सेवन से वायरल बीमारी या संक्रमण से बचा जा सकता है। कहा जाता है कि कालमेघ के पौधे में एंटी-वायरल तत्व पाए जाते हैं, जो किसी भी वायरल बीमारी या वायरल संक्रमण को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग संक्रमण से बचने के लिए इस पौधे के अर्क का भी इस्तेमाल करते हैं।

तनाव दूर करने के लिए  

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आज के समय में लगभग हर कोई नींद न पूरी होने की वजह से, अधिक काम की वजह से और आदि कारणों की वजह से कुछ अधिक ही तनाव महसूस करते हैं। ऐसे में तनाव को दूर करने के लिए कालमेघ का सेवन करना सेहत के लिए बेस्ट आयुर्वेदिक औषधी माना जाता है। कहा जाता है कि यह पौधा शरीर में एक एंटी-स्ट्रेस एजेंट की तरह काम करता है, जो तनाव के साथ अनिद्रा की समस्या को दूर कर सकता है।

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बुखार के लिए बेस्ट 

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कहा जाता है साधरण बुखार को दूर करने के लिए कालमेघ के पौधे का इस्तेमाल किया जा सकता है। कई लोग मामूली बुखार में इसके चूर्ण से काढ़ा बनकर सेवन करते हैं। बुखार के साथ-साथ सर्दी-जुकाम में भी इसका सेवन किया जा सकता है। इसके लिए आप काढ़ा में मिश्री और नींबू का रस भी डालकर इस्तेमाल कर सकती हैं। कई लोग कॉमन कोल्ड से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

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पेट के लिए सही 

कहा जाता है कालमेघ, आंवला और मुलेठी के चूर्ण को उबालकर उसके पानी को पीने से पेट की समस्या के साथ-साथ कब्ज की समस्या को भी दूर किया जा सकता है। इसके सेवन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी ठीक किया जा सकता है। यहीं नहीं, पौधे के बारे में कहा जाता है कि इसके सेवन से शरीर में मौजूद घाव को बहुत जल्दी भरा जा सकता है। 

अन्य जानकारी 

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हालांकि, इस पौधे को लेकर ये भी धारण है कि जिस इंसान को भी एलर्जी, लीवर की समस्या या स्किन की परेशानी है, उन्हें इसका सेवन करने से बचना चाहिए। खासकर, गर्भावस्था के दौरान भी इसका इस्तेमाल करने के बचना चाहिए। 

नोट: यह लेख सिर्फ आपकी जानकारी बढ़ाने के लिए हैं। इसके लिए आप डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं। 

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Image Credit:(@ndnr.com)