किडनी को शरीर का फिल्टर माना जाता हैं, क्योंकि ये हमारे शरीर में मौजूद टॉक्सिन को बाहर निकालने का काम करती है और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। किडनी का मुख्य काम शरीर में मौजूद ब्‍लड की सफाई करना है। हमारी दोनों किडनी में छोटे-छोटे लाखों फिल्टर होते हैं जिन्हें मेडिकल भाषा में नेफ्रोंस कहा जाता है। नेफ्रोंस हमारे ब्‍लड को साफ करते हैं, साथ ही ब्‍लड में मौजूद हानिकारक तत्व यूरिन के ज़रिये शरीर से बाहर कर देते हैं। किडनी के अन्य कामों में रेड ब्‍लड सेल्‍स का बनना और फायदेमंद हार्मोंस रिलीज करना शामिल हैं। किडनी द्वारा रिलीज किए गए हार्मोंस द्वारा ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है। साथ ही किडनी हमारे शरीर में मौजूद हड्डियों को विटामिन डी पहुंचाने का काम भी करती है। इसके अलावा शरीर में पानी और अन्य जरूरी तत्व जैसे मिनरल्स, सोडियम, पोटेशियम और फॉस्फोरस का ब्‍लड में बैलेंस बनाए रखने में किडनी का जरूरी योगदान होता है। इसलिए किडनी की अच्‍छे से देखभाल करनी चाहिए। 

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लेकिन आज किडनी की बीमारी बड़ी समस्या बन चुकी है। पिछले कुछ सालों में इस समस्या में तेजी से इजाफा हुआ है। हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार, देशभर में करीब 14 प्रतिश महिलाएं और 12 प्रतिशत पुरूष किडनी की समस्या जूझ रहे हैं। किडनी की बीमारी इतना विकराल रूप ले चुकी है, बावजूद इसके लोग किडनी से जुड़ी समस्याओं के लक्षण समझ नहीं पाते और डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जबतक काफी ज्यादा समय निकल जाता है। लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं क्‍योंकि आयुर्वेद में किडनी की बीमारी का असरदार इलाज संभव है। आयुर्वेद की दवा किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले घातक तत्वों को भी बेअसर करती है। जी हां कोलकात्ता में चल रहे भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेले में पहली बार आयुर्वेद दवाओं पर एक विशेष सेशन का आयोजन किया गया जिसमें किडनी के ट्रीटमेंट  में इसके प्रभाव पर चर्चा की गई।

इस सेशन के दौरान एमिल फार्मास्युटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट में प्रभावी दवा नीरी केएफटी के बारे में अब तक हुए शोधों का ब्यौरा पेश करते हुए कहा कि नीरी केएफटी किडनी में टीएनएफ अल्फा के लेवल को नियंत्रित करती है। टीनएफ एल्फा परीक्षण से ही किडनी में हो रही गड़बड़ियों का पता चलता है तथा यह सूजन आदि की स्थिति को भी दर्शाता है। टीएनएफ अल्फा सेल सिग्नलिंग प्रोटीन है।

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संचित शर्मा ने अपने प्रजेंटेशन में कहा कि नीरी के एफटी को लेकर अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में शोध प्रकाशित हो चुका है। इस शोध में पाया गया कि जिन समूहों को रेगुलर नीरी केएफटी दवा दी जा रही थी उनकी किडनी सही तरीके से काम कर रही थी। उनमें भारी तत्वों, मेटाबोलिक बाई प्रोडक्ट जैसे क्रिएटिनिन, यूरिया, प्रोटीन आदि की मात्रा कंट्रोल पाई गई। जिस समूह को दवा नहीं दी गई, उनमें इन तत्वों का प्रतिशत बेहद ऊंचा था। यह पांच बूटियों पुनर्नवा, गोखरू, वरुण, पत्थरपूरा तथा पाषाणभेद से तैयार की गई है।

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उन्होंने कहा कि ''जिन लोगों के किडनी खराब हो चुकी हैं लेकिन अभी डायलिसिस पर नहीं हैं, उन्हें इसे लेने से बहुत फायदा मिलता है। उन्हें डायलिसिस पर जाने की नौबत नहीं आती है।''

उन्होंने यह भी कहा कि "आयुर्वेद में कई उपयोगी दवाएं हैं। आयुर्वेद में उन बीमारियों का उपचार है जिनका एलोपैथी में नहीं है। लेकिन उन्हें आधुनिक चिकित्सा की कसौटी पर परखे जाने और प्रमाणित किये जाने की जरूरत है। इस दिशा में डीआरडीओ और सीएसआईआर ने काम किया है इस पर और ध्यान दिये जाने की जरूरत है।"

Source: IANS