जब भी बात पानी की होती है तो ये फैक्ट सबसे पहले कहा जाता है कि इंसान 60% पानी का बना है और इसी पानी की वजह से ही हमें ताकत भी मिलती है और इसी पानी की वजह से हमारे सारे सिस्टम सही चलते हैं। ये शरीर का सबसे जरूरी न्यूट्रिएंट होता है जो सही मात्रा में पानी पीने से ही पूरा होता है। अधिकतर लोग हाइड्रेशन को बहुत जरूरी मानते हैं, लेकिन अगर हाइड्रेशन ज्यादा हो जाए तो?

वाटर वेट और ब्लोटिंग के लिए भी शरीर में वाटर रिटेंशन को जिम्मेदार ठहराया जाता है और साथ ही साथ ओवर हाइड्रेशन को तो बहुत सारी समस्याओं का जिम्मेदार माना जाता है। तो सही मात्रा में पानी कितना जरूरी है, वाटर वेट कम करने के लिए क्या किया जाए, शरीर में ब्लोटिंग को कम करने के लिए क्या किया जाए इन सभी चीज़ों को जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बात की। 

डायटीशियन और होलिस्टिक न्यूट्रिशनिस्ट और डाइट पोडियम की फाउंडर शिखा महाजन से हमने बात की और इस बारे में और जानने की कोशिश की। उन्होंने हमें विस्तार से इसके बारे में बताया। 

इसके बारे में आगे जानने से पहले हम कुछ बातों पर ध्यान देते हैं और ये जान लेते हैं कि इन सभी चीज़ों का मतलब क्या है। 

bloating and water weight issues

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डिहाइड्रेशन-

ये वो स्थित है जब शरीर जरूरत से ज्यादा फ्लूइड लूज कर देता है और इससे शरीर सही तरह से फंक्शन नहीं कर पाता है। ये बच्चों में, बूढ़े लोगों में ज्यादा कॉमन है और ये भी कम से लेकर ज्यादा तक किसी भी इंटेंसिटी में हो सकता है। आंसू, पसीना, यूरिन, थूक के जरिए शरीर से पानी निकलता रहता है। 

ओवरहाइड्रेशन-

शरीर में अगर पानी की बहुतायत हो गई तो ये केस हो जाता है। ओवरहाइड्रेशन किसी मेडिकल कंडीशन की वजह से हो सकता है और ये ब्लड स्ट्रीम में हाइपोनेट्रिमिया जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। ये बहुत गंभीर स्थिति है। शरीर में बहुत ज्यादा पानी पेट फूलना, थकान, भूख की कमी, सिरदर्द आदि समस्याएं भी पैदा कर सकता है। 

loose bloating

वाटर वेट-

वाटर वेट शरीर का वो वजन है जो वाटर रिटेंशन की वजह से आता है जहां आपके अंगों में फ्लूइड इकट्ठा होता है। ये नॉर्मल प्रोसेस है और इसे आसान भाषा में ब्लोटिंग भी कहा जाता है। वाटर वेट अगर लगातार बना रहता है तो ये किडनी संबंधित समस्या हो सकती है, लेकिन अगर आप एक ही रात में दो किलो वजन बढ़ा रहे हैं तो इसकी गुंजाइश बहुत ज्यादा है कि ये एक्स्ट्रा ब्लोटिंग और पफीनेस की वजह से हुआ है। 

तो अब आपको ये पता है कि ओवर हाइड्रेशन, अंडर हाइड्रेशन और वाटर वेट के बीच कोई भी कनेक्शन नहीं है और साथ ही साथ जहां पहले दो के लिए मेडिकल हेल्प लेनी जरूरी है वहीं नॉर्मल ब्लोटिंग को कुछ टिप्स की मदद से कम किया जा सकता है।  

कैसे कम करें वाटर वेट? 

वाटर वेट कम करने के लिए कुछ खास टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं जैसे- 

ज्यादा पानी पिएं- 

अगर आपका वाटर वेट बढ़ रहा है तो ये कम पानी पीने की वजह से भी हो सकता है। हमें कम से कम 8 कप पानी हर दिन पीना चाहिए और ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी किडनी बायोलॉजिकल फ्लूइड्स को डाइल्यूट करने के लिए पानी को होल्ड करती है और अगर शरीर में ज्यादा नमक है तो किडनी में लगातार डिहाइड्रेशन जैसी स्थिति उत्पन्न होगी और अगर आप अपना दैनिक पानी का कंजम्पशन बरकरार रखेंगे तो वाटर रिटेंशन नहीं होगा और किडनी सही तरह से ऑपरेट कर पाएगी।  

एक्सरसाइज जरूर करें- 

वाटर वेट को कम करने के लिए भी फिजिकल मेहनत जरूरी होती है और आप थोड़ा सा पानी ना सिर्फ पसीने से लूज करेंगे बल्कि इससे आपको प्यास भी लगेगी और जो एक्स्ट्रा पानी की जरूरत शरीर को होगी वो बैलेंस हो जाएगी। ये ना सिर्फ वजन को कम करने में मदद करती है बल्कि ये पफीनेस को भी खत्म करती है।  

हाइड्रेटिंग फूड खाएं- 

वाटर रिटेंशन, ब्लोटिंग, पफीनेस को कम करने के लिए भी हाइड्रेशन की जरूरत है और आप ऐसे फलों और सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें जो पानी से भरपूर हों और ब्लोटिंग ना होने दें। स्ट्रॉबेरी, तरबूज, पत्ता गोभी, सेलेरी, पालक, खीरा आदि फूड्स आपके लिए लाभकारी होंगे।  

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नमक कम लें- 

शरीर से पानी की कमी को दूर करने के लिए आपको नमक का सेवन भी कम करना होगा। डाइट में अगर ज्यादा सोडियम होगा तो शरीर में नमक की मात्रा और बढ़ती जाएगी और किडनी में डिहाइड्रेशन जैसी स्थिति होती जाएगी। ज्यादा जंक फूड्स सोडियम को बढ़ाते हैं और ऐसे में वाटर रिटेंशन होता है और वाटर वेट भी बढ़ता है।  

आपको अपनी डाइट में पोटेशियम से भरपूर फूड्स लेने चाहिए जो इसमें आपकी मदद कर सकते हैं। अगर आपकी समस्या बड़ी है और आपको लगता है कि इन टिप्स से समस्या का हल नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। कई बार लंबे समय तक बनी हुई ब्लोटिंग बहुत बड़ी बीमारी का संकेत दे सकती है।  

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