कोरोना वायरस जो अब पूरी दुनिया के लिए सिर दर्द बनता जा रहा है वो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। जहां सऊदी अरब में हज यात्रा भी खतरे में पड़ गई है उस देश में 200 से भी ज्यादा कोरोना वायरस के केस सामने आ गए हैं वहीं साउथ कोरिया में तो ये संख्या 3000 तक पहुंच गई है। चीन में तो इस बीमारी का सबसे खतरनाक प्रकोप सामने आया है। चीन में 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 82000 से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। अब चीन में इस बीमारी पर एक नई रिसर्च की गई है और इस रिसर्च में कुछ अहम जानकारी सामने आया है।  

Chinese Center for Disease Control and Prevention ने इस स्टडी को किया है और इसमें 44,672 कोरोना ग्रस्त लोगों पर संक्रमण को एनालाइज कर इस स्टडी के नतीजे निकाले गए हैं।  

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क्या नतीजे आए स्टडी में? 

इस रिसर्च के मुताबिक 11 फरवरी तक जो 44,672 कोरोना वायरस केस कंफर्म हुए हैं उनमें से 81 प्रतिशत लोगों का इन्फेक्शन जानलेवा नहीं है और माइल्ड केस है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कोरोना वायरस खतरनाक नहीं है।  

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ये है राहत की खबर- 

इस स्टडी से एक बात जाहिर हो गया है कि कोरोना वायरस होने के बाद भी लोग पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। उन्हें जानलेवा खतरा नहीं होता। जिन लोगों को माइल्ड इन्फेक्शन है उन्हें कम खतरा है और जिनका इन्फेक्शन निमोनिया तक नहीं पहुंचा है उन्हें आराम मिल सकता है।  

इस स्टडी के अनुसार माइल्ड केस निमोनिया, या लंग इंफेक्शन तक नहीं पहुंचे हैं। अगर बीमारी आपके फेंफड़ों तक पहुंच रही है तो ये बहुत घातक है, लेकिन अगर ये नहीं हुआ है तो इसके पूरी तरह से ठीक होने की उम्मीद ज्यादा है।  

इन लक्ष्णों को न करें इग्नोर- 

इस स्टडी में सामने आया है कि क्योंकि इसके लक्ष्ण नॉर्मल फ्लू जैसे होते हैं इसलिए कई लोग डॉक्टरी सलाह नहीं लेते हैं। स्टडी में साफ किया गया है कि ये लक्ष्ण असल में घातक भी हो सकते हैं क्योंकि कई लोग इसे नॉर्मल सर्दी-बुखार समझ कर डॉक्टर की सलाह नहीं लेते हैं या खुद ही दवा करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में वो खुद को भी खतरे में डालते हैं और दूसरों को भी। इससे कोरोना वायरस उन लोगों में भी फैल सकता है जिनकी इम्यूनिटी उतनी अच्छी नहीं है और ये उनके लिए घातक साबित हो सकता है।  

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स्टडी के अनुसार उन मामलों में इस वायरस का असर सबसे ज्यादा बढ़ा है जिन्हें पहले ही सांस या लंग्स से जुड़ी कोई भी समस्या हुई है। उनके लिए ये जानलेवा साबित हो सकता है।  

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इसलिए अगर किसी को भी इस तरह के लक्ष्ण दिख रहे हैं उन्हें तुरंत ही डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए।  

WHO की तरफ से भी चेतावनी- 

WHO ने भी इसे लेकर चेतावनी जारी कर दी है। आप इसे बाकायदा WHO की वेबसाइट पर भी पढ़ सकती हैं। इस वायरस को SARS (severe acute respiratory syndrome) और MERS (Middle East respiratory syndrome) से जोड़ा गया है। WHO के मुताबिक ये बहुत सीरियस वायरस है जो न सिर्फ इंसानों में बल्कि ये जानवरों में भी फैल सकता है। चीन के हुबेई प्रांत से फैला ये वायरस अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता जा रहा है।  

इसके लक्ष्ण नॉर्मल सर्दी-जुकाम से लेकर निमोनिया तक हो सकते हैं और इसका असर किडनी फेलियर से लेकर फेफड़ों में पानी भर जाने तक कुछ भी हो सकता है।  

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सबसे आसानी से फैल सकता है ये वायरस-

इस वायरस को SARS से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि सार्स भी बहुत खतरनाक था और जिन लोगों को सार्स हुआ था उनमें से 10 प्रतिशत लोगों की मौत हो गई थी। कोरोना असल में उससे भी ज्यादा जल्दी फैलता है। एक अन्य रिपोर्ट में सामने आया था कि कोरोना वायरस को फैलने में 10 सेकंड का समय लगता है और अगर किसी की इम्युनिटी कमजोर है तो उसे और जल्दी ये वायरस अपनी चपेट में ले सकता है।