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वेजाइना को हेल्दी रखते हैं ये 3 योग, महिलाएं जरूर करें

अगर महिलाएं यीस्‍ट इंफेक्‍शन और यूटीआई जैसी समस्‍याओं से खुद को बचाकर रखना चाहती हैं तो योनि हेल्‍थ के लिए रोजाना ये 3 योग करें। 
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Published -20 Apr 2022, 18:14 ISTUpdated -21 Apr 2022, 10:47 IST
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yoga for vagina health

जब आप अपने शरीर की अच्छी देखभाल करने की बात करती हैं, तो आप हमेशा अपनी वेजाइना/योनि के बारे में नहीं सोचती हैं। लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि योनि की अच्‍छी हेल्‍थ आपको यीस्‍ट इंफेक्‍शन, यूटीआई और बेहतर सेक्‍सुअल रिलेशनशीप में मदद कर सकती है। 

जी हां, वेजाइना हेल्‍थ एक महिला के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह किसी की जीवनशैली और यौन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इस प्रकार, योनि से संबंधित कोई भी कमजोरी या समस्या शारीरिक और मानसिक परेशानी का कारण बन सकती है।

दूसरे शब्‍दों में, एक हेल्‍दी वेजाइना एक महिला की संपूर्ण भलाई में योगदान करती है। हेल्‍दी खाने की आदतों, अच्‍छी लाइफस्‍टाइल और सही अंतरंग-हाइजीन की आदतों के अलावा, योग एक महिला के योनि स्वास्थ्य को भी बढ़ावा दे सकता है।

Expert yoga for vagina

इसलिए आज हम आपको कुछ योगासन के बारे में बता रहे हैं जो असरदार तरीके  से काम करते हैं और आपके योनि स्वास्थ्य के लिएचमत्कार कर सकते हैं। इन योगासन को करने के तरीके और फायदों के बारे योग गुरू नेहा जी रही हैं। योगा गुरु नेहा, द योग गुरु तथा वुमेन हेल्‍थ रिसर्च फाउंडेशन (ट्रस्‍ट) की संस्‍थापक हैं।

इसे जरूर पढ़ें:वेजाइना को हेल्‍दी रखने के लिए इन 4 चीजों से बचाना है जरूरी

मूलबंध आसन

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वेजाइना की हेल्‍थ के लिए मूलबंध बहुत असरदार योग है। इसे करते समय सांसों को लेते और छोड़ते समय वेजाइनल मसल्‍स को अंदर होल्‍ड किया जाता है। इसे आप 5 से 6 मिनट तक अपनी क्षमतानुसार होल्‍ड कर सकती हैं। 

विधि

  • इसे करने के लिए बाएं पांव की एड़ी को हिप्‍स के नीचे दबाएं। 
  • फिर दाएं पैर को बाएं थाइज पर रखकर सिद्धासन में बैठें।
  • ऐसा करते हुए दोनों घुटने जमीन को छूते हुए और हथेलियां घुटनों पर टिकी होनी चाहिए। 
  • फिर गहरी सांस लेकर वायु को अंदर ही रोक लें। 
  • इसके बाद गुदाद्वार को पूरी तरह से सिकोड़ लें। 
  • अब सांसों को रोककर रखने के साथ आरामदायक समयावधि तक बंध को बनाए रखें। 
  • धीरे से सांसों को बाहर छोड़ दें। इस अभ्यास को 4 से 5 बार करें।

अश्विनी मुद्रा

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सांसों को अंदर की ओर भरते हुए वेजाइनल और एनल मसल्‍स को पुल किया जाता है और सांसों को छोड़ते हुए फैलाया जाता है। ऐसा करने से जिन महिलाओं की स्फिंक्चर्स मसल्‍स ढीली हो जाती हैं, वह एकदम स्‍ट्रॉग हो जाती है। इससे यूटीआई जैसी समस्‍याओं की संभावना कम होती है। (स्फिंक्चर्स गोलाकार मसल्‍स हैं जो शरीर के कुछ हिस्सों को खोलने और बंद करने के लिए वाल्व का काम करती हैं। उदाहरण के लिए, डाइजेस्टिव सिस्टम में कई स्फिंक्टर होते हैं जो मुंह से पेट तक, आंतों के माध्यम से और गुदा से लिक्विड और भोजन के मार्ग को नियंत्रित करते हैं।)

विधि

  • इसे करने के लिए आराम से किसी ध्यानात्मक आसन में आंख बंद करके बैठ जाएं। 
  • दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें। 
  • सांस की गति को सामान्य करें। 
  • अब सांस को बाहर निकालें और पेट को अंदर की ओर खींचकर ध्यान को एनल मसल्स को ऊपर की ओर खींचे व ढीला छोड़े। 
  • यह प्रक्रिया लगातार करती रहें।

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बद्ध कोणासन

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इसे कुछ महिलाएं तितली आसन के नाम से भी जानते हैं। इसे करने से जब पैरों की मूवमेंट होती है तो पेल्विक फ्लोर की मसल्‍स में खिंचाव आता है और ब्‍लड की सप्‍लाई पूरी तरह से रिप्रोडक्टिव सिस्‍टम में बढ़ जाती है। इससे रिप्रोडक्टिव सिस्‍टम में मजबूती आती है और फ्लेक्सिबिलटी आती है। 

जब वेजाइना एरिया में ब्‍लड सप्‍लाई सही तरीके से नहीं होती है तब इंफेक्‍शन, मसल्‍स का ढीला और कई तरह की समस्‍याएं होने लगती हैं। लेकिन बद्धकोण आसन को रेगुलर 1 हजार बार या उससे ज्‍यादा रेपेटिशन के साथ करने से बहुत ज्‍यादा फायदा होने लगता है।   

विधि

  • अपने पैरों को सीधा सामने फैलाकर बैठ जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़कर अपने पैरों के तलवों को एक साथ लेकर आएं। 
  • अपनी एड़ी को अपने पेल्विक के करीब करें और धीरे-धीरे अपने घुटनों को नीचे दबाएं।
  • अब अपने दोनों पैरों के अंगूठों को हाथों से पकड़ें।
  • फिर अपने पैरों को तितली की तरह ऊपर-नीचे करें। 

इन 3 योग की मदद से आप भी अपनी वेजाइना को हेल्‍दी रखकर कई तरह की समस्‍याओं से बच सकती हैं। लेकिन अगर आप पहली बार योग कर रही हैं तो एक्‍सपर्ट की निगरानी में ही करें। योग से जुड़ी ऐसी ही और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

Image Credit: Shutterstock & Freepik

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