गर्भाशय या यूटरस हर महिला के शरीर का एक सबसे महत्वपूर्ण अंग है। इससे ही जीवन की उत्पत्ति होती है, तो जब हम दूसरा जीवन किसी को दे रहे हैं, तो अपने जीवन का ख्याल क्यों नहीं रख पातीं? हम अपनी जीवनशैली सही रखेंगी, खानपान सही होगा, तो इससे प्रजनन प्रणाली भी मजबूत होगा। आज के समय में कई महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या को देखा गया है। खराब लाइफस्टाइल वजन बढ़ाने में सहायक होती है, जिसकी वजह से आज बड़ी संख्या में महिलाएं पीसीओडी/पीसीओएस से पीड़ित हैं। जब आप अपने बढ़ते वजन के प्रति काम करेंगी, तो उससे पीसीओएस जैसी समस्या में कमी की जा सकती है। और जब आपके आहार स्वस्थ होगा, रिप्रोडक्शन सिस्टम भी स्वस्थ हो। विटामिन्स, मिनरल्स और तमाम पोषक तत्वों से भरपूर आहार ही हमारे स्वस्थ शरीर का करता है। वसंत कुंज स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल की चीफ क्लीनिकल न्यूट्रीशनिस्ट एंड लाइफस्टाइल कंसलटेंट सीमा सिंह कहती हैं हमारा लाइफस्टाइल इतना खराब है। हम जंक फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड के आदि हो चुके हैं, जिससे वजन बढ़ने के साथ-साथ अन्य समस्याएं पैदा होती हैं। जो महिलाएं कंसीव करना चाहती हैं, उन्हें इन चीजों से खासतौर पर दूर रहना चाहिए। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इस समय फोलिक एसिड की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें ऐसे फूड्स को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। उन्होंने और क्या राय दी आइए जानें।

सही भोजन यानी स्वस्थ शरीर 

डॉ. सीमा सिंह का कहना है कि वह हमेशा फूड ग्रुप की पहले बात करती हैं और फिर न्यूट्रीशिन की। अगर हमने सभी तरह के फूड ग्रुप्स को अपने आहार में शामिल किया है, तो हमें अपने आप ही सभी जरूरी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिल जाते हैं। इसके साथ ही जितना खाना हमारे लिए जरूरी है उतना ही जरूरी है सही एक्सरसाइज करना। हालांकि आजकल के समय में बाहर जाकर एक्सरसाइज नहीं की जा सकती, तो आप घर पर ही एक्सरसाइज करें। रस्सी कूद, स्पॉट रंनिंग, स्पॉट जॉगिंग, योग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज जैसे व्यायाम करें। और जब हम डाइट की बात करते हैं, तो उसमें सिर्फ प्रोटीन ही जिम्मेदार नहीं होता। हमें इसके लिए सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल्स, आयरन सभी चीजों की जरूरत होती है। पीरियड्स के दौरान, अधिकतर महिलाओं में खून की कमी देखी जाती है, इसलिए आयरन और फोलिक एसिड रिच फूड का सेवन करें। इसके लिए हरी सब्जियां, दालें, मीट, सीड्स, तिल, गुड़, प्रून्स, मुन्नका, जैसी चीजों का सेवन करें। 

फैटी फिश

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साल्मन जैसी फिश में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड जैसे हेल्थी फैट्स होते हैं। यह विटामिन-बी और डी, प्रोटीन, फोलिक एसिड का अच्छा स्रोत है। जिंक, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम आदि मिनरल पाए जाते हैं। वहीं इसके अलावा, थकान, चिड़चिड़ापन, वजन बढ़ना, पीएमएस, गठिया, उच्च रक्तचाप,और बालों के झड़ने में भी फिश खाना फायदेमंद हो सकता है। वसायुक्त फिश न केवल हमारी सेल मेम्ब्रेन में सुधार कर सकती हैं, यह हमें स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाने में भी मदद कर सकती हैं।

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कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट

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साबुत अनाज फर्टिलिटी बढ़ाने वाले पोषक तत्वों जैसे जिंक, सेलेनियम और कई बी विटामिन से भरपूर होते हैं। ऐसे सुपरफूड्स हार्मोन-बैलेंसिंग और फर्टिलिटी क्षमता बढ़ाने वाले आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं, रिफाइन्ड कार्बोहाइड्रेट्स हमारे लिए नुकसानदायक होते हैं। व्हाइट फ्लार और शुगर स्वीट्स, केकस, ब्राउनीज और पेस्ट्री आदि में उपयोग किया जाता है, तो प्रजनन प्रणाली के लिए सही नहीं है।  ये खाद्य पदार्थ रक्त शर्करा में अचानक वृद्धि का कारण बन सकते हैं, जिससे हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। जितना हो सके उनके सेवन से बचना या कम करना सबसे अच्छा है।

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बेरीज

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बेरीज वास्तव में उन महिलाओं के लिए उत्कृष्ट स्रोत हैं जो गर्भ धारण करने की कोशिश कर रही हैं। एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर, रास्पबेरी और ब्लूबेरी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। वे उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं जो गर्भ धारण करने की कोशिश कर रही हैं क्योंकि उनमें फोलेट और विटामिन सी होता है, जो भ्रूण के विकास के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। बेरीज वेट मैनेजमेंट में भी मदद करती हैं। इन्हें स्मूदीज, फ्रूट बाउल्स आदि के साथ अपने आहार में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, डॉ. सीमा का कहना है कि हमें ध्यान रखना चाहिए इनमें काफी स्वीटनर होता है। पैकेज्ड आइट्म्स में एक बार कैलोरी की मात्रा जरूर देख लें। 

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दही और डेरी 

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डेयरी सैचुरेटेड फैट से भरपूर होती है, जो प्रजनन क्षमता के लिए फायदेमंद है। इसमें विटामिन-ए, ई, डी, के और के2 जैसे फैट सॉल्युबल विटामिन्स का अच्छा स्त्रोत है। एक अध्ययन में भी पाया गया है कि जो महिलाएं फुल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करती हैं उन्हें ऑव्युलेशन की समस्या से कम ही गुजरना पड़ता है। दही आदि पेट के अल्सर और वेजाइनल संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

ड्राई फ्रूट्स और नट्स

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ड्राई फ्रूट्स और नट्स, प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स का एक अच्छा और बड़ा स्रोत हैं। ड्राई फ्रूट्स और नट्स जैसे बादाम, काजू, तिल, बीज, ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन-ई, एंटीऑक्सीडेंट्स, मैग्नीशियम, कॉपर जैसे आवश्यक खनिजों का अच्छा स्रोत होते हैं। ड्राई फ्रूटस में मौजूद आयरन, खून की कमी को पूरा करता है और जो महिलाएं खून की कमी से गुजर रही हैं, उन्हें इनका सेवन जरूर करना चाहिए।

कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल सकती हैं जैसे कैफीन का सेवन, प्रोसेस्ड फूड्स जैसे फास्ट फूड, डेली मीट,फ्राइड फूड और पैकेज्ड फूड में अक्सर ट्रांस-फैट पाया जाता है, जो आपके शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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