योग हमारे शरीर पर काम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। चाहे वह शारीरिक फिटनेस हो या मानसिक स्वास्थ्य, योग हर चीज का ख्याल रखता है। आप दूसरे शब्‍दों में कह सकती हैं कि योग तन और मन को दुरुस्‍त रखने के साथ ही आपको सुंदर बनाने में भी मदद करता है। योग का अभ्यास करने वाले सभी लोग इसके विभिन्न लाभों के बारे में जानते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि योगा बट्ट नाम की भी कोई चीज़ होती है? जब हम हनुमान आसन जैसे आसन का अभ्यास करने का प्रयास करते हैं तो हमें जो दर्द होता है, वह योग बट्ट नहीं है। योगा बट्ट अधिक दर्दनाक होता है और लंबे समय तक टिका रहता है। 

योग बट्ट तब होता है जब हम अपने हैमस्ट्रिंग को बहुत ज्यादा फैलाते हैं। यह तब भी हो सकता है जब हम हैमस्ट्रिंग के आसपास की मांसपेशियों में बहुत अधिक प्रेशर डालते हैं। जब हम चलने की कोशिश करते हैं या जब हम बैठते हैं तो यह बेचैनी और दर्द पैदा करता है। ऐसे में मन में सवाल आता है कि हमें योगा बट्ट को ठीक करने के लिए क्या करना होगा?

तो हम आपको बात दें कि सबसे पहले, हमें इन आसनों अधोमुख स्वानासन, हनुमान आसन, त्रिकोणासन इत्यादि को करने से बचना चाहिए। एक योग बट्ट को ठीक करने के लिए इन सूक्ष्म आसनों को रोजाना करना चाहिए। इन योगासन के बारे में हमें योगा मास्टर, फिलांथ्रोपिस्ट, धार्मिक गुरू और लाइफस्टाइल कोच ग्रैंड मास्टर अक्षर जी बता रहे हैं। आइए इन 2 योगासन के बारे में विस्‍तार से जानें।

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शलभासन

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  • पेट के बल लेटकर शुरुआत करें। इन चरणों में इसका एक-एक करके अभ्यास करें। सांस छोड़ें और
  • दोनों हाथों को अलग-अलग उठाएं।
  • दोनों हाथों को एक साथ उठाएं।
  • दोनों पैरों को अलग-अलग उठाएं।
  • दोनों पैरों को एक साथ उठाएं।
  • दोनों पैरों और हाथों को इस तरह ऊपर उठाएं कि केवल आपकी नाभि फर्श पर हो। 
  • फिर वापस पुरानी पोजीशन में आ जाएं।
 

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वीरभद्रासन

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  • इसे करने के लिए सीधी खड़ी हो जाएं। 
  • सांस छोड़ें और आगे की ओर झुकें जैसे कि आपकी पीठ फर्श के समानांतर हो। 
  • अपनी बाहों को दोनों तरफ फैलाएं और अपने दाहिने पैर को फर्श के समानांतर उठाएं। 
  • आसन जारी करें और अपने बाएं पैर के साथ दोहराएं।

यह सच है कि योगा बट्ट दर्दनाक हो सकता है लेकिन इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। जब तक योग के प्रति हमारा प्रेम बरकरार रहेगा, हम लगन से काम कर सकते हैं और इस समस्या से छुटकारा पा सकती हैं। भले ही ये आसन आसान हों, लेकिन इन स्थितियों में, यह उचित है कि योग्य योग गुरु से उचित मार्गदर्शन प्राप्त किया जाए।

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