Expert Tips : क्या आप जानती हैं तुलसी की चाय के सेहत से जुड़े ये अद्भुत फायदे

तुलसी के पौधे को हिन्दू धर्म में बेहद पवित्र बताया गया है। प्रत्येक पूजा -पाठ से लेकर पवित्र भोजन की शुद्धि के लिए तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी, एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका व्यापक रूप से चिकित्सीय हर्बल चाय और अन्य उपयोग किया जाता है. इसे एक सर्वोत्तम जड़ी बूटी के रूप में भी देखा जा सकता है।
वजन नियंत्रण से लेकर डिप्रेशन कम करने तक तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल एक औषधि के रूप में किया जाता है। खासतौर पर तुलसी की चाय कई तरह से लाभकारी है। आइए फैट टू स्लिम ग्रुप की सेलिब्रिटी इंटरनेशनल डाइटीशियन और न्यूट्रिशनिष्ट शिखा ए शर्मा से जानें कि तुलसी की पत्तियों से किस तरह चाय तैयार की जा सकती है और इसके क्या फायदे हैं।
तुलसी की चाय के स्वास्थ्य लाभ

तुलसी का उपयोग सदियों से विभिन्न रोगों और बीमारियों के लक्षणों को ठीक करने के लिए किया जाता रहा है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसकी प्रभावकारिता को एक एंटी इन्फ्लमेटरी, चिंता उपचार और एंटीऑक्सिडेंट के रूप में दिखायाजाता है। इसकी चाय कई तरह से सेहत के लिए रामबाण साबित होती है और विभिन्न बीमारियों से बचाव करती है।
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श्वसन संबंधी बीमारियोंमें लाभकारी
तुलसी अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सर्दी, खांसी, फ्लू, साइनसाइटिस, गले में खराश और इसी तरह की बीमारियों के लक्षणों से राहत दिला सकती है। साइनस और श्वसन संबंधी किसी समस्या को कम करने के लिए तुलसी की चाय एक बेहतर विकल्प है। तुलसी की चाय में यूजेनॉल, कैम्फीन और सिनेओल जैसे फाइटोकेमिकल यौगिकों की अच्छाई एक एक्सपेक्टोरेंट के रूप में अद्भुत काम करती है जो कफ और बलगम को बाहर निकालने में मदद करती है। नियमित रूप से गर्म तुलसी की चाय पीने से श्वसन स्वास्थ्य में सुधार होता है और सर्दी को गंभीर श्वसन विकारों में बिगड़ने से रोकता है।
तनाव और चिंता को कम करे

तनाव वर्तमान स्थिति में लोगों के बीच सबसे आम मुद्दों में से एक बन गया है जो स्वास्थ्य पर भारी पड़ता है। यह अक्सर अवसाद, चिंता और अनिद्रा से जुड़ा होता है। फ्लेवोनोइड्स के विशाल भंडार वाली तुलसी की चाय एंटीडिप्रेसेंट के रूप में कार्य करती है और न्यूरोट्रांसमीटर के उत्पादन को उत्तेजित करती है जो चिंता को कम कर सकती है और आपको आराम और शांत रख सकती है। इसके अलावा, तुलसी की चाय का नियमित सेवन हृदय की लय, नींद के चक्र, याददाश्त और अनुभूति को नियंत्रित करने और अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों को रोकने में भी मदद करता है।
वजन नियंत्रित करे

तुलसी की चाय गैस्ट्रिक जूस के स्राव को बढ़ाकर पाचन सहायता के रूप में कार्य कर सकती है जो पाचन तंत्र के सुचारू कामकाज में सहायता करता है। मजबूत एंटी-अल्सरोजेनिक गुण पेप्सिन स्राव और लिपिड पेरोक्सीडेशन को रोकते हैं और गैस्ट्रिक म्यूसिन और श्लेष्म कोशिकाओं के उत्पादन में वृद्धि करते हैं जो एसिड और रोगजनक हमले के खिलाफ जठरांत्र संबंधी मार्ग की रक्षा करते हैं। प्रतिदिन तुलसी की चाय पीने से कार्ब्स और प्रोटीन का त्वरित अवशोषण होता है, वसा धीरे-धीरे टूटती है जिससे भूख नियंत्रित होती है और आप तृप्त रहते हैं और अतिरिक्त वसा शरीर से बाहर निकलता है।
ह्रदय को स्वस्थ रखे

तुलसी के पत्तों में उर्सोलिक एसिड और अन्य फाइटोकेमिकल्स की भारी मात्रा में शक्तिशाली कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं। तुलसी की चाय में मौजूद फाइटोकेमिकल्स रक्त में मुक्त कणों को नष्ट करते हैं, रक्त की दीवारों पर कोलेस्ट्रॉल के जमाव को रोकते हैं और सभी महत्वपूर्ण अंगों में रक्त के प्रवाह को उत्तेजित करते हैं और इस प्रकार रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं। इसके अलावा, तुलसी की चाय में पोटेशियम और कैल्शियम जैसे खनिज हृदय को रोधगलन, दिल के दौरे और ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं।
बेबी कन्सीव करने में सहायक
जिन लोगों को इनफर्टिलिटी की समस्या है उन्हें तुलसी की चाय का सेवन जरूर करना चाहिए। ये चाय बेबी कंसीव करने में मदद करती है। इसके अलावा जिन लोगों को सिस्ट और PCOD की समस्या है उनके लिए भी तुलसी की चाय का सेवन बेहद लाभदायक होता है।
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कैसे बनाएं तुलसी की चाय

- एक बर्तन में एक कप पानी लें और उसमें 3-4 तुलसी के पत्ते डालकर उबाल लें।
- पानी को तुलसी के पत्तों के रंग और स्वाद को पूरी तरह से सोख लेने दें।
- कुछ मिनट बाद चाय को एक कप में छान लें।
- स्वाद और लाभ बढ़ाने के लिए आप इसमें एक चम्मच शहद या नींबू का रस मिलाएं और इसका सेवन करें।
- आप अपनी दूध वाली चाय में भी तुलसी की पत्तियां डालकर तुलसी की चाय बना सकती हैं।
- इसके लिए आपको दूध वाली चाय बनानी है और इसमें उबाल आने पर तुलसी की पत्तियां कुचलकर मिला दें।
- कुछ देर के लिए धीमी गैस पर चाय पहने दें।
- 5 मिनट बाद गैस बंद करें और इसे छानकर इस्तेमाल करें।
- इस चाय में चीनी की जगह स्टीविया का इस्तेमाल करें।
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Image Credit: freepik
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