इन दिनों लोग खुद को अधिक फिट रखने के लिए तरह-तरह की डाइट को फॉलो करते हैं और कुछ डाइट बेहद ही पॉपुलर हैं, जो पूरे विश्व में लोगों द्वारा फॉलो की जाती हैं। इन्हीं में से एक है इंटरमिंटेट फास्टिंग। इस तरह की डाइट में कुछ घंटों की फास्टिंग की जाती है, मसलन उस दौरान कुछ नहीं खाया जाता है, जबकि कुछ घंटे लोग ईटिंग करते हैं। मसलन, वह अपने पांच मील उन्हीं घंटों के बीच में प्लॉन करते हैं। वेट लॉस करने में इस डाइट को बेहद ही कारगर माना जाता है और इसलिए अधिकतर व्यक्ति बिना सोचे-समझे इसे फॉलो करने लग जाते हैं।

लेकिन यहां आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि इंटरमिंटेट फास्टिंग में खाने और फास्टिंग का अपना एक सेट पैटर्न होता है और इसलिए यह डाइट हर किसी के लिए सही नहीं मानी जाती। ऐसे कई लोग होते हैं, जो अगर इंटरमिंटेट फास्टिंग को बिना डायटीशियन की सलाह के फॉलो करने लग जाते हैं तो उन्हें लाभ की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिसके बारे में आज सेंट्रल गवर्नमेंट हॉस्पिटल के ईएसआईसी अस्पताल की डायटीशियन रितु पुरी आपको इस लेख के जरिए बता रही हैं-

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प्रेग्नेंट वुमन

प्रेग्नेंट वुमन को कभी भी इंटरमिंटेट फास्टिंग करने की सलाह नहीं दी जाती है। दरअसल, गर्भावस्था में महिला को अपने गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए हर थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाने की जरूरत होती है। ऐसे में अगर वह इंटरमिंटेट फास्टिंग करती हैं तो इससे आपके बच्चे के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है। इसके अलावा, इस अवस्था में महिला के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं और इसलिए भी इंटरमिंटेट फास्टिंग करने से महिला को समस्या हो सकती है।

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ब्रेस्टफीडिंग मदर

अगर आप एक ब्रेस्टफीडिंग मदर हैं तो भी आपके लिए इंटरमिंटेट फास्टिंग करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। दरअसल, एक ब्रेस्टफीडिंग मदर को अपेक्षाकृत अधिक कैलोरी की जरूरत होती है और इंटरमिंटेट फास्टिंग करने से उनका कैलोरी काउंट रेस्ट्रिक्ट हो जाता है। जिसका विपरीत असर बच्चे पर पड़ता है। इसके अलावा, इस अवस्था में भी महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं और उस लिहाज से भी इंटरमिंटेट फास्टिंग करना सही नहीं होता। वहीं, बच्चे के जन्म के बाद महिला का शेड्यूल काफी गड़बड़ा जाता है। दरअसल, बच्चे के सोने व जागने का कोई समय नहीं होता है, जिसके कारण भी महिला इंटरमिंटेट फास्टिंग को सही तरह से फॉलो नहीं कर पाती है और फिर उसे कोई लाभ नहीं होता है।

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टाइप 1 डायबिटीज

अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज है तो ऐसे मे भी आपको इंटरमिंटेट फास्टिंग से बचना चाहिए। अगर आप इंसुलिन पर हैं तो ऐसे में अगर आप इंटरमिंटेट फास्टिंग करते हैं तो इससे भी आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को अपना ब्लड शुगर लेवल मेंटेन करने के लिए हर थोड़ी देर में कुछ ना कुछ खाने की आवश्यकता होती है और इसलिए, अगर आप इंटरमिंटेट फास्टिंग करते हैं तो आपको परेशानी हो सकती है।

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एथलेटिक्स के लिए सही नहीं मानी जाती

अगर आप एक एथलेटिक्स हैं और किसी तरह की स्पोर्ट्स एक्टिविटीज आदि से जुड़े हैं तो भी इंटरमिंटेट फास्टिंग को अवॉयड करने की सलाह दी जाती है। दरअसल, एथलेटिक्स को आमतौर पर अधिक कैलोरी की जरूरत होती है। साथ ही स्पोर्ट्स या वर्कआउट से पहले और बाद में मसल्स रिकवरी के लिए उन्हें कुछ ना  कुछ खाना होता है। ऐसे में अगर वह इंटरमिंटेट फास्टिंग करते हैं तो वह बेहतर परफार्म नहीं कर पाते हैं।

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