खराब लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज की कमी और खान-पान की गलत आदतों के चलते डायबिटीज आज के समय में सबसे बड़ी समस्या बनी गई हैं। इस समस्या से लगभग हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल इतना बढ़ जाता है, जिससे बॉडी की इंसुलिन प्रोडक्शन पर असर होने लगता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बॉडी एक्टिव रूप से इंसुलिन का इस्तेमाल ही नहीं कर पाती हैं। डायबिटीज को कंट्रोल करने के उपायों के बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। नहीं तो यह बीमारी बॉडी के अन्य अंगों पर अपना असर दिखाने लगती है। जी हां डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिस पर अगर कंट्रोल ना किया जाए, तो यह कई बीमारियों और हेल्थ प्रॉब्लम्स जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट और किडनी रोग, स्ट्रोक, आंखों में समस्याएं, पैरों में अल्सर आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।

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डायबिटीज मेटाबॉलिज्म संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर का लेवल होता है। हाई ब्लड शुगर के लक्षणों में अक्सर यूरीन आना, प्यास और भूख बढ़ना शामिल है। लेकिन क्या आप जानती है कि डायबिटीज दो तरह की होती हैं, जिसमें पहला है टाइप 1 और दूसरा है टाइप 2 और दोनों तरह के डायबिटीज में काफी अंतर होता है।

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इसे बारे में अधिक जानकारी के लिए हर जिंदगी ने सर गंगा राम हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर कर्नल सुधीर त्रिपाठी से बात की तब उन्होंने हमें टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के बीच के अंतर के बारे में बताया।

लेकिन सबसे पहले हम जान लेते हैं कि डायबिटीज क्‍या है?  

डायबिटीज क्या है? 

हम जो खाते है उससे शरीर को एनर्जी मिलती है। हमारा शरीर भोजन को पचाकर उससे निकली शुगर को एनर्जी में बदलती है। इस पूरी प्रक्रिया में इंसुलिन का बहुत योगदान होता है। इंसुलिन शरीर में बनने वाला एक ऐसा हॉर्मोन है जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। यह हमारे शरीर में पैंक्रियाज नामक एक ग्लैंड में बनता है। इसके असर से ब्लड में मौजूद शुगर हमारे शरीर के सेल्स में स्टोर हो जाती है। डायबिटीज में या तो हमारी बॉडी में इंसुलिन बनता ही नहीं है या हमारी बॉडी के सेल्स इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जाते है और शुगर उनमें स्टोर न होकर ब्लड में मौजूद रहती है। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और घर पर ही अपना शुगर चेक करना चाहते हैं तो डायबिटीज चेक करने वाले मशीन जिसका मार्केट प्राइस 550 रुपये है, लेकिन इसे आप यहां से 380 रुपये में खरीद सकती हैं

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टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में अंतर

टाइप 1 डायबिटीज ऑटोइम्यून डिजीज है। इस प्रकार के डायबिटीज में पैन्क्रियाज की बीटा सेल्‍स पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं और इस तरह इंसु‍लिन का बनना सम्भव नहीं होता है। इसके परिणामस्वरूप हाई ब्लड शुगर लेवल होता है। यह महत्वपूर्ण है कि टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को दैनिक इंसुलिन लेना होता है।

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टाइप 2 डायबिटीज लंबे समय तक इंसुलिन प्रतिरोध और अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन के परिणामस्वरूप विकसित होता है। यह कई मामलों में, मोटापे और जीवनशैली से जुड़े कारकों जैसे कि निष्क्रियता से जुड़ा हुआ है। दोनों प्रकार के डायबिटीज के संकेत और लक्षण एक जैसे होते हैं, हालांकि टाइप-1 डायबिटीज के होने की संभावना बच्चों और युवाओं में अधिक होती है।

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