पिछले कुछ वर्षों में, दूध की खपत और इससे होने वाले लाभों के बारे में कई तरह की चर्चाएं होती आ रही हैं। भारत भर में लाखों लोग अपनी दैनिक पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नियमित रूप से दूध का सेवन करते हैं। भारत वर्तमान में विश्व स्तर पर दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। वैसे दूध के सेवन के साथ-साथ लोग इससे जुड़े कई तरह के मिथ्स पर भी भरोसा करते हैं। हालांकि उन्हें उस सोच के पीछे के कारण या फिर उसकी सच्चाई के बारे में कुछ पता नहीं होता। हमने किसी से कुछ सुना और फिर उसे बिना सोचे-समझे ही सच मान लिया। ऐसा हम सभी के साथ होता है और यही कारण है कि दूध से संबंधित कई तरह के मिथ्स फैलने लगते हैं। लेकिन आज हम आपको ऐसे ही कुछ मिथ्स के बारे में बता रहे हैं, जिन पर लोग भरोसा तो करते हैं, लेकिन उसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। इन लेख को पढ़ने के बाद यकीनन आपकी सोच भी बदल जाएगी-

मिथ 1- दूध को सुपरफूड्स से बदल सकते हैं

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कई बार लोग सोचते हैं कि पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूध को सुपरफूड्स से बदला जा सकता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार, भारतीयों को अपनी दैनिक पोषण संबंधी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए एक दिन में लगभग 300 ग्राम दूध का सेवन करना पड़ता है। हालाँकि, प्रति व्यक्ति औसत भारतीय खपत लगभग आधी ही है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय आहार कार्बोहाइड्रेट और संतृप्त वसा में समृद्ध है, जबकि दूध को एक संपूर्ण आहार माना जाता है। फोर्टिफाइड दूध का एक गिलास हमारी दैनिक पोषण आवश्यकताओं का लगभग 30 प्रतिशत प्रदान करता है जो अन्य सुपरफूड हमें प्रदान करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।

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मिथ 2- दूध का सेवन करने से वजन बढ़ सकता है

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लोगों के बीच में दूध से संबंधित यह मिथ बेहद पापुलर है कि दूध का सेवन करने से वजन बढ़ सकता है और इसलिए जब कोई व्यक्ति अपना वजन बढ़ाना चाहता है तो दूध के सेवन की मात्रा भी बढ़ाता है। हालांकि, इस तथ्य को साबित करने के लिए वर्तमान में कोई निर्णायक अध्ययन नहीं है कि वयस्क या बचपन के मोटापे का सीधा संबंध दूध के सेवन से जुड़ा है। एक गिलास सादे दूध में प्राकृतिक रूप से शक्कर होती है। दूध अपने आप में एक संपूर्ण भोजन है और वास्तव में, हमारे शरीर को भूख के दर्द को नियंत्रित करने में मदद करता है जो वजन बढ़ाने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। जहां फ्रूट जूस व शुगरी ड्रिंक में 9 चम्मच ऐडेड शुगर होती है, जबकि एक गिलास दूध में लगभग 3 चम्मच प्राकृतिक शर्करा होती है।

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मिथ 3- दूध को उबालने से उसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं

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जबकि डेयरी फार्मों से सीधे खरीदे जाने वाले कच्चे दूध को बैक्टीरिया को हटाने के लिए उबालना चाहिए। हालांकि, आप यह तय कर सकती हैं कि आप पहले से पास्चुरीकृत किए गए पैक दूध को उबालना चाहती हैं या नहीं। यहां तक कि अगर आप ऐसा करती हैं, तो यह दूध में पोषक तत्वों की गुणवत्ता को प्रभावित नहीं करेगा। दूध को बार-बार उबालने के कोई हानिकारक प्रभाव नहीं हैं। यह अपने पोषण मूल्य को नहीं खोएगा।

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