कैल्शियम एक ऐसा पोषक तत्व है, जो सिर्फ मजबूत हड्डियों के लिए ही आवश्यक नहीं है। बल्कि यह शरीर में अन्य कई तरह के फंक्शन के लिए भी जरूरी है। इसके अलावा, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से लेकर ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी यह बेहद मददगार है। इसकी महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जीवन के शुरूआती चरणों से लेकर अंतिम चरणों तक कैल्शियम रिच फूड्स को डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। दूध, पनीर, दही, अंडे, बादाम, पिस्ता, चुकंदर सहित पालक व अन्य कई फल, सब्जियों व नट्स आदि में कैल्शियम पाया जाता है।

वैसे अगर महिलाओं की हेल्थ की बात हो तो उन्हें मेनोपॉज के बाद विशेष रूप से अपने कैल्शियम इनटेक पर खासतौर पर ध्यान देना चाहिए। दरअसल, मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, अगर इस दौरान महिला का कैल्शियम इनटेक कम होता है तो इससे अन्य भी कई समस्याएं हो सकती हैं। तो चलिए आज इस लेख में सेंट्रल गवर्नमेंट हॉस्पिटल के ईएसआईसी अस्पताल की डायटीशियन डॉ रितु पुरी आपको बता रही हैं मेनोपॉज के बाद महिलाओं को कैल्शियम अधिक क्यों लेना चाहिए-

एस्ट्रोजन का उत्पादन होता है कम

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जब एक महिला को मेनोपॉज होता है तो उनके शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन बनना काफी कम हो जाता है। एस्ट्रोजन पीरियड्स को रेग्युलेट करता है, लेकिन जब आपको मेनोपॉज के दौरान पीरियड्स नहीं होते है तो एस्ट्रोजन का उत्पादन भी कम होता है। एस्ट्रोजन का एक काम यह भी होता है कि वह कैल्शियम को शरीर में बाइंड करने या रिटेन करने में मददगार साबित होता है। लेकिन जब महिला के शरीर में मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन कम उत्पादित होता है तो इससे महिला की कैल्शियम को बनाए रखने की क्षमता भी कम हो जाती है और फिर कैल्शियम लेने के बाद भी उसका पूरा पर्याप्त लाभ महिला को नहीं मिल पाता। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि मेनोपॉज के दौरान महिला को अधिक मात्रा में कैल्शियम का सेवन करना चाहिए।

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आस्टियोपोरोसिस का रिस्क

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मेनोपॉज के बाद महिला को आस्टियोपोरोसिस होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यहां तक कि, मेनोपॉज के बाद पहले पांच वर्षों में औसतन महिलाओं की हड्डियों का 10 प्रतिशत तक वजन कम हो जाता है। जिससे महिला को आसानी से फ्रैक्चर हो जाता है व हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, ऑस्टियोपोरोसिस के अपने जोखिम को कम करने के लिए आपको कैल्शियम से भरपूर आहार लेना चाहिए। 

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विटामिन-डी पर भी करें फोकस

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मेनोपॉज के बाद महिला का शरीर नेचुरली कैल्शियम को रीटेन नहीं कर पाता, इसलिए शरीर में कैल्शियम का अब्जॉर्बशन बढ़ाने के लिए आपको विटामिन-डी भी पर्याप्त मात्रा में लेना चाहिए। बेहतर होगा कि आप विटामिन-डी को भी कैल्शियम के साथ लें। विटामिन-डी के कारण शरी में कैल्शियम का अब्जॉर्बशन अच्छा होता है। अगर आपके शरीर में विटामिन-डी इनटेक अच्छा होता है, तो इससे शरीर में कैल्शियम की मात्रा भी सही रहती है। विटामिन-डी के सोर्सेज में आप सनलाइट के अलावा मशरूम, अंडे, नॉन-वेज आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकती हैं।

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कितना लें कैल्शियम?

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एक महिला को प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम कैल्शियम डायटरी सोर्सेस से लेना चाहिए। लेकिन अगर आप मेनोपॉज की स्थिति में हैं तो आपको 1200 मिलीग्राम कैल्शियम प्रतिदिन अवश्य लेना चाहिए। हालांकि, इस बात का भी ख्याल रखें कि आप प्रतिदिन 2000 मिलीग्राम से अधिक कैल्शियम डायटरी सोर्स से ना लें। शरीर में कैल्शियम की बहुत अधिकता भी टॉक्सिसिटी को बढ़ा सकता है। वैसे, अगर कैल्शियम रिच फूड की बात हों तो आप स्किम्ड या टोन्ड दूध, लो-फैट दही या पनीर, लो सोडियम चीज़, हरी पत्तेदार सब्जियां, काबुली चना, राजमा, सोयाबीन, अंडा, केला, किशमिश आदि का सेवन कर सकती हैं।

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