आयुर्वेद भारत में चिकित्सा के सबसे पुराने रूपों में से एक है जो लगभग 5000 साल से भी अधिक पुराना है। भारत की चिकित्सा प्रणाली होते हुए भी लोग एलोपैथी या होम्योपैथी की तरफ अधिक झुकाव रखते हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय में लोगों का रूझान आयुर्वेद की तरफ बढ़ा है और अब लोग अपनी शारीरिक समस्या के समाधान के लिए आयुर्वेदिक उपचारों पर विश्वास करने लगे हैं। पर फिर भी अभी भी आयुर्वेद व आयुर्वेदिक इलाज को लेकर लोगों के मन में कई तरह की अनिश्चितताएं हैं और सही जानकारी ना होने के कारण लोग इन गलतफहमियों या मिथ्स पर आंख मूंदकर भरोसा करने लग जाते हैं। 

तो चलिए आज इस लेख में वुमन हेल्थ रिसर्च फाउंडेशन की फाउंडर व प्रेसिडेंट और योगा गुरू नेहा वशिष्ट कार्की भारत की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद से संबंधित कुछ मिथ्स व उनकी वास्तविक सच्चाई पर प्रकाश डाल रही हैं-

मिथ 1- शरीर में गर्मी पैदा करती हैं आयुर्वेदिक दवाएं 

सच्चाई- आमतौर पर लोग मानते हैं कि आयुर्वेदिक दवाएं गर्म होती हैं और इसलिए उससे उन्हें नुकसान हो सकता है। जबकि वास्तविकता यह है कि आयुर्वेदिक उपचार त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ पर आधारित होता है और हर व्यक्ति में यह तीनों पाए जाते हैं। ऐसे में उपचार करते समय इन तीनों को बैलेंस किया जाता है। इसलिए यह कहना कि आयुर्वेदिक दवाएं गर्म होती हैं, उचित नहीं है।

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मिथ 2- आयुर्वेदिक दवाएं नहीं होंती एक्सपायर

सच्चाई- यह भी एक आयुर्वेदिक उपचार को लेकर एक पॉपुलर मिथ है। लोगों का मानना होता है कि आयुर्वेदिक दवाओं की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। यह सच होकर भी पूरी तरह से सच नहीं है। आयुर्वेदिक उपचार में काम आने वाली कुछ चीजें जैसे घी, हल्दी और काली मिर्च आदि कभी खराब नहीं होतीं। लेकिन कुछ दवाओं को कुछ जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। ऐसी दवाओं के असर का एक समय तक ही होता है और फिर उसके बाद उनके सेवन से कोई लाभ नहीं होता। इसलिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं की भी अपनी एक एक्सपायरी डेट होती है।

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मिथ 3- आयुर्वेद एक अवैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली है

सच्चाई- यह पूरी तरह से एक मिथ है। वास्तविकता यह है कि यह पूर्ण रूप से वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली है, जो मॉडर्न मेडिकल साइंस और प्राचीन चिकित्सा प्रणाली दोनों का सम्मिश्रण है। जब एक व्यक्ति आयुर्वेद चिकित्सा की जानकारी प्राप्त करता है तो उसमें शरीर की पूरी जानकारी साइंटिफिक तरीके से दी जाती है। ऐसे व्यक्ति को एमबीबीएस के साथ-साथ पूरा आयुर्वेद भी पढ़ना होता है। 

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मिथ 4- आयुर्वेदिक दवाईयों को असर करने में लम्बा समय लगता है

सच्चाई- कुछ लोग आयुर्वेदिक उपचार इसलिए नहीं करना चाहते, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसमें काफी वक्त लगता है। हालांकि यह भी सच नहीं है। वास्तविकता यह है कि आयुर्वेद किसी भी समस्या या बीमारी की जड़ पर काम करता है और इसलिए किसी-किसी मामले में पूर्ण रूप से राहत मिलने में समय लगता है। मसलन, अगर आपको बुखार है तो एलोपैथी उपचार केवल उसके लक्षणों पर काम करते हैं, जैसे शरीर में कंपन या तापमान बढ़ना आदि को दूर करता है। लेकिन आयुर्वेद इस थ्योरी पर काम करता है कि शरीर में बुखार क्यों हुआ। इस तरह वह जड़ पर काम करता है, जिससे आपको थोड़ा वक्त लग सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में आयुर्वेदिक उपचार भी एलोपैथी दवाओं की तरह तेजी से काम कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति कब्ज से पीड़ित है, तो आयुर्वेदिक उपचार बेहद तेजी से काम करता है। 

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