आपने अपने घर में बड़े-बूढ़ों को जोड़ों के दर्द से करहाते होते देखा ही होगा। यह दर्द सर्दियों के दौरान और भी बढ़ जाता है। जी हां बदलते मौसम, हवा में हल्की-हल्‍की ठंडक, सुबह में थोड़ी सी ठिठुरन रात में जकड़ता बदन से पता चल जाता है कि बस सर्दी आ ही गई। ये सभी ठंड के अहसास हमें मौसम के बदलते मिजाज के बारे में बताते हैं लेकिन कुछ महिलाओं को इनकी जरूरत नहीं क्‍योंकि मौसम का बदलता रुख उनके दर्द का पहले ही आगाह कर देता हैं। किसी जोड़ों के दर्द से पीड़ित महिलाओं से पूछिए कि कैसे उनका दर्द बढ़ते ही बदलते मौसम की आहट दे देता है।

डॉक्टरों के मुताबिक तापमान में उतार चढ़ाव होने पर जोड़ों के आस-पास की नसों में सूजन हो जाती है जिससे दर्द बढ़ता है। इस वजह से कुछ महिलाओं के जोड़ों में अकड़न भी हो जाती है। जोड़ों के दर्द से परेशान महिलाओं के लिए भी बदलता मौसम बुरी खबर लाता है।

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मैं भी थी जोड़ों के दर्द से बेहद परेशान

यह परेशानी हमारी बड़े-बुर्जुगों को ही नहीं होती है बल्कि आज इस समस्‍या से मैं भी बहुत परेशान हूं। मेरी उम्र 38 है और इस समस्‍या के चलते मैं पिछले एक साल से बेहद परेशान हूं। सुबह के समय उठने के बाद मेरे हाथों के जोड़ों मे दर्द और सूजन महसूस होती है। बहुत सारे टिप्‍स अपनाने के बावजूद भी मुझे कोई आराम नहीं मिल रहा था। लेकिन एक दिन अचानक मेरी पड़ोस में रहने वाली आंटी एक फरिश्‍ते की तरह मेरे सामने आई और मेरी परेशानी का हल बता गई। अगर आप भी जोड़ों के दर्द से परेशान रहती हैं तो इस जादुई नुस्‍खे के बारे में आप भी जान लें।

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आज के समय ज्यादातर लोग खासतौर पर महिलाओं को जोड़ों के दर्द की शिकायत ज्‍यादा रहती है। यूं तो यह समस्या एक उम्र के बाद जोड़ों में लुब्रीकेशन और कैल्शियम की कमी के कारण होती है। लेकिन आजकल की खराब लाइफस्‍टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना और खान-पान की गलत आदतों के कारण यह समस्‍या कम उम्र की महिलाओं को भी परेशान कर रही है। जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाने पर पूरी लाइफस्टाइल अस्त-व्यस्त हो जाती है। यहां तक कि महिलाएं अपना रोजाना का काम भी नहीं कर पाती हैं।

 

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बबूल के फायदे

बबूल को भारत में कीकर के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ की मुलायम टहनियों को घरों में दातुन बना कर भी प्रयोग किया जाता है। बबूल को महिलाएं दांतों के लिए अच्‍छा मानती हैं। बबूल से ना केवल दांत ही हेल्‍दी रहते हैं बल्कि कई तरह की बीमारियों में भी यह फायदेमंद होती है। बबूल कफ-पित्त नाशक होता है। इसकी फलियां कच्ची और लाभकारी होती हैं। मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटी ने भी मुझे इसी जादुई उपाय के बारे में बताया था। जी हां बबूल की फली दांतों के साथ-साथ आपके जोड़ों के लिए अच्‍छी होती हैं। अत: कच्ची फलियों को तोड़कर छाया में सुखाकर किसी डिब्बे में बंद कर सुरक्षित रखा जा सकता है। इसे आप एक साल तक रख सकती हैं। इस बारे में हमने स्‍वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्‍सालय योग एवं अनुसंधान केन्‍द्र की आयुर्वेदिक Dr. Durga Arod (RMO) से बात की, तब उन्‍होंने हमें बताया कि इस हर्ब की भौतिक गुणों में संभावित एंटी-माइक्रोबिल और एंटी-ऑक्‍सीडेंट गुण होते हैं जो दर्द से राहत देते हैं।

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बबूल का कैसे करें इस्‍तेमाल?

  • बबूल के पेड़ की फली को लेकर उसे अच्‍छी तरह से सूखा लें।
  • सूखने के बाद इसका पाउडर बना लें। फिर इसमें उतनी ही मात्रा में मेथी दाने का पाउडर बना लें।
  • अब दोनों चीजों को आपस में अच्छी तरह मिला लें।
  • इस पाउडर को सुबह- शाम लगभग 1 चम्मच गुनगुने पानी खाएं। 2-3 महीने लगातार लेने से आपका जोड़ों के र्द  दूर सकते हैं।

इस हर्ब के कोई ज्ञात साइड इफेक्‍ट नहीं हैं लेकिन कब्ज के दौरान इस हर्ब को खाने से बचना अच्छा रहता है।