गैस और एसिडिटी से छुटकारा पाने के लिए ये 5 आयुर्वेदिक उपचार आजमाएं

आयुर्वेदिक कैलेंडर में तीन ऋतुएं होती हैं, जिनमें से प्रत्येक तीन दोषों, वात, पित्त और कफ से संबंधित होती हैं। वात का मौसम अक्टूबर से फरवरी तक होता है, पित्त का मौसम जुलाई से अक्टूबर के बीच रहता है और कफ का मौसम वसंत से लेकर गर्मियों की शुरुआत यानि मार्च से जून तक रहता है। यह माना जाता है कि इन तीनों मौसम में होने वाले संक्रमण के दौरान शरीर प्रणाली में असंतुलन के आधार पर कई बदलाव आते हैं।
आयुर्वेद में शरीर के असंतुलन और समस्याओं को तीन दोषों के संदर्भ में समझाया जाता है। गैस, एसिडिटी या सूजन वात दोष का एक लक्षण है और वात वायु और स्पेस-आधारित दोष है। गैस के दौरान जिसे हवा संबंधी समस्या माना जाता है, वात कोलन से छोटी आंत में जाता है और गैस्ट्रिक समस्याओं जैसे कब्ज, एसिडिटी, या सूजन के कारण शरीर में असहज स्थिति पैदा हो जाती है। लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस आर्टिकल में दिए आयुर्वेदिक उपायों की मदद से आप गैस्ट्रिक समस्याओं से आसानी से लड़ सकती हैं।
घी और अंजीर

1/4 कप गर्म पानी, 1 चम्मच घी और 1/2 चम्मच नमक मिलाएं और तुरंत इसका सेवन करें। घी आंतों की दीवारों को चिकनाई देने में मदद करता है जो मल त्याग को आसान बनाता है। इस घोल में मौजूद ब्यूटिरेट एसिड में एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव होते हैं और नमक एक स्वच्छ आंत प्रदान करने वाले बैक्टीरिया को मार सकता है। इसके अलावा फाइबर से भरपूर फूड्स जैसे भीगे हुए अंजीर, बेल फल, त्रिफला आदि खाएं। फाइबर मल त्याग को आसान बनाने और कब्ज को दूर करने में मदद करता है।
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गर्म पका हुआ भोजन खाएं
वात के बढ़ने से शरीर में होने वाली गैस्ट्रिक परेशानियों को कम करने के लिए आपको गर्म पका हुआ भोजन खाना चाहिए, जो पचाने में आसान होता है। वात का ठंडा और ड्राई प्रभाव माना जाता है इसलिए गर्म भोजन आपको इन समस्याओं से निपटने में मदद करता है। नाश्ते के लिए साबुत दलिया, उपमा आदि लेना उचित रहता है। दोपहर के भोजन या रात के खाने के लिए आप सब्जी सूप, दाल और चावल के साथ करी ले सकती हैं।
च्यवनप्राश का सेवन करें

च्यवनप्राश को आयुर्वेद में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक जैम की तरह गहरे रंग का पेस्ट है जो बेहद फायदेमंद जड़ी-बूटियों और पोषक तत्वों से भरपूर होता है और यह अपने कई फायदों के लिए जाना जाता है। च्यवनप्राश आपके पाचन संबंधी सभी समस्याओं को दूर करने के लिए विशेष रूप से बढ़िया होता है। इसमें अग्नि तत्व होते हैं या इसे पाचन अग्नि के रूप में जाना जाता है।
रेगुलर आयुर्वेदिक चाय पीएं
आयुर्वेदिक चाय बनाने के लिए आपको 1/2 चम्मच धनिये के बीज, 1/2 जीरा और 1/2 चम्मच सौंफ के बीज की जरूरत होती है। उबलते पानी में तीन चीजों को मिलाएं। इसे 15 मिनट के लिए उबलने दें, ताकि पोषक तत्व पानी के साथ मिल जाएं। आपकी आयुर्वेदिक चाय तैयार है। इसे पूरे दिन में हर एक घंटे के अंतराल में पीएं। यह वात के असंतुलन को संतुलित करेगा और सूजन, कब्ज या एसिडिटीको भी ठीक करेगा।
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अन्य टिप्स को फॉलो करें

इन सभी टिप्स के अलावा आयुर्वेद सुझाव देता है कि शांत वातावरण में खाने से आपको अपने भोजन से सही पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद मिलती है। धीरे-धीरे भोजन करना, भोजन को ठीक से चबाना और भोजन पर ध्यान केंद्रित करना कुछ अन्य चीजें हैं जो स्वस्थ जीवन शैली बनाने और स्वस्थ रहने के लिए जरूरी हैं।
आप भी इन टिप्स को अपनाकर गैस और एसिडिटी की समस्या से आसानी से बच सकती हैं। इस तरह के और आर्टिकल पढ़ने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।
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