हर महिला चाहती है कि उसके घर में पॉजिटिविटी रहे और घर में हमेशा खुशियों का वास हो। इसके लिए महिलाएं घर को वास्तु सम्मत बनाने का भी ध्यान रखती हैं। इसके लिए एक आसान तरीका है घर में शुभ चिह्नों को लगाना। दरअसल शुभ चिह्न घर में सुख-समृद्धि लाने के साथ-साथ परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य भी बनाए रखते हैं। इनके घर में होने से निर्माण में हुए वास्तु दोषों का प्रभाव कम हो जाता है। सौभाग्य प्राप्ति के लिए अनादि काल से ओम और स्वास्तिक का प्रयोग किया जा रहा है। वास्तु एक्सपर्ट नरेश सिंगल आज हमें शुभ चिह्नों से जुड़े कुछ वास्तु टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जिनके जरिए घर में सुख-समृद्धि लाई जा सकती है। वास्तु के ये शुभ प्रतीक हैं -1. ओम, 2. स्वास्तिक, 3. मंगल कलश, 4. पंचसूलक (पांच तत्वों की प्रतीक खुली हथेली की छाप), और 5. मीन। 

1. ओम 

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वास्तु में ‘ॐ’ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ओम सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा का प्रतीक है। संपूर्ण ब्रह्मांड इस शब्‍द में समाया है। इस पवित्र शब्द का आस्था के साथ उच्चारण करने से न सिर्फ मन में शांति का संचार होता है, बल्कि कई मानसिक रोगों में भी यह चमत्कारी औषधि का काम करता है। इस पवित्र प्रतीक को किसी भी परिसर में लगाने मात्र से दिव्य आशीषों की प्राप्ति होती है। 

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2. स्वास्तिक

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इस अत्यंत पावन प्रतीक का प्रयोग प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। परिसर में किसी भी प्रकार का वास्तु दोष होने की स्थिति में मुख्य द्वार के दोनों ओर एक-एक स्वास्तिक पिरामिड रखने से लाभ होता है। वहीं तिजोरी पर स्वाास्तिक का चिह्न बना देने से व्यापार में बढ़ोत्तरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। 

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3. मंगल कलश 

मंगल कलश भी भारतीय परंपरा का एक अनिवार्य अंग है, जिसमें शुभ प्रतीकों के माध्यम से सौभाग्य को आमंत्रित किया जाता है। मिट्टी के इस पात्र में शुद्ध जल भरा होता है। यह आम या अशोक की पत्तियों और मौली (पवित्र लाला धागा) आदि से सुसज्जित होता है और इसकी पूजा की जाती है। मंगल कलश को स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण का सूचक माना जाता है। सभी शुभ संसकारों में इसकी उपस्थिति अनिवार्य होती है। नए घर में जाते हुए (गृह प्रवेश) के समय इसकी महत्वपूर्ण और सार्थक भूमिका होती है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। 

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4. पंचसूलक

यह खुली हथेली की छाप होती है, जो पांच तत्वों  की प्रतीक है। हमारा शरीर और हमारे आस-पास जो कुछ भी है, वह पांच तत्वों (भूमि, आकाश, हवा, पानी और अग्नि) से बने हैं। सौभाग्य के लिए इस प्रतीक के इस्तेमाल का महत्व स्पष्ट होता है। जैन धर्म में इसे बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। हिंदू धर्म में गृह प्रवेश, जन्म संस्कार और विवाह आदि के अवसरों पर हल्दी वाली हथेली छापी जाती है। माना जाता है कि मुख्य प्रवेश द्वार पर लगी पंचसूलक की छाप सुख-समृद्धि लाती है। 

5. मीन 

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प्राचीन काल से ही, मीन (मछली) का संबंध खुशहाली से माना गया है। मछली के जोड़े का प्रतीक घर में प्रेम बढ़ाता है। उत्तर दिशा में मछली का प्रतीक या प्रतिमा रखने से धन बढ़ता है। बताई गई दिशा में मछलीघर (फिश एक्वेीरियम) रखने से सौभाग्य की स्थिति बनती है। घर से निकलने से पहले, मछली के दर्शन करना शुभ माना जाता है। अगर मछली घर में कोई मछली स्वाभाविक मृत्यु को प्राप्त होती है तो कहते हेा कि यह अपने साथ उस स्थान की नकारात्मक ऊर्जा लेकर चली जाती है। कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि एक्वेरियम में मछली की मौत होना घर से किसी सदस्य की लंबी बीमारी के जाने का सूचक है।  

इन आसान वास्तु टिप्स को फॉलो करके आप भी अपने घर में सदैव सुख-शांति बनाए रख सकती हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे जरूर शेयर करें। घर को बेहतर बनाने से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए विजिट करती रहें हरजिंदगी।