आज बदलते दौर में भी जब मेंस्ट्रुअल हाइजीन की बात होती है, तो लोग दबी जुबान से इस बारे में बात करते हैं। महिलाएं भी इसे लेकर अब तक शर्माती हैं। हालांकि, ऐसे कुछ चेंजमेकर्स हमारे साथ मौजूद हैं, जो महिलाओं को इसके बारे में समझा रहे हैं। पीरियड्स के दौरान वे सहज महसूस कर सकें, इस बारे में उनको बताते हैं। जहां एक तरह इन चीजों को लेकर हश-हश आवाज में बातें होती हैं, वहीं ऐसी कुछ महिला उद्मी हैं, जो इस स्टिग्मा को तोड़ रही हैं और लोगों के इसके प्रति जागरूक कर रही हैं।

साची मल्होत्रा

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साची को बचपन से पीसीओएस सिंड्रोम की समस्या है। आज लगभग 15 सालों से भी ज्यादा वह इस समस्या को झेल रही हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि महिलाओं और उनके शरीर के बारे में खुली चर्चाएं होना बहुत जरूरी है। जरूरी है यह जानना कि वो कैसा महसूस करती हैं और किन हालातों से गुजरती हैं। उन्होंने दिसंबर 2020 में अपने ब्रैंड ‘द सैसी थिंग्स’ को लॉन्च किया।

ईरा गुहा

ईरा हार्वड-केनेडी स्कूल से मास्टर कर रही थीं, जब वह अपने माता-पिता से मिलने बेंगलुरु पहुंचीं। उन्होंने पाया कि उनकी मेड बीमार होने की वजह से कई दिनों से छुट्टी पर हैं। मेड की वापसी पर उन्हें मेड ने बताया कि वह अपनी पीरियड्स की वजह से छुट्टी पर थीं। उन्होंने ईरा को यह भी बताया कि 2 रुपये में मिलने वाले पैड्स असहज होते हैं और उनसे रैशेज और यूटीआई जैसा इंफेक्शन हो जाता है। एक पब्लिक पॉलिसी स्टूडेंट होने के नाते उन्हें मेंस्ट्रुअल कप लॉन्च करने का विचार सही लगा। ईरा ने रिमूवल रिंग के साथ एक बेहतरीन मेंसट्रुअल कप डिजाइन किया। इसी साल जनवरी में उन्होंने ‘आसान’ की स्थापना की। यह मेंस्ट्रुअल कप हार्वर्ड इनोवेशन लैब में डिजाइन किए गए हैं। इन्हें मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बनाया गया है, जिन्हें 10 सालों तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

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इरफाना जरगर

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आपने 28 वर्षीया इरफाना का नाम तो सुना होगा? अगर नहीं, तो अब सुनिए। इरफाना कश्मीर में एक जाना-पहचाना नाम है। उन्हें कश्मीर की पैडवुमन के नाम से जाना जाता है। पिछले छह सालों से उन्होंने कश्मीर की हर महिला को मुफ्त सैनिटरी पैड्स मुहैया करवाए हैं। वहीं श्रीनगर में दर्जन भर टॉयलेट्स में सैनिटरी किट्स सप्लाई किए हैं। उन्होंने ‘ईवा सेफ्टी डोर’ की स्थापना अपने पिता के निधन के बाद की थी। नाम के बारे में पूछे जाने पर, वह बताती हैं, ‘ईवा का अर्थ है 'महिलाएं' और सेफ्टी डोर का अर्थ है कि यह पहल एक दरवाजा है, जो उनकी सुरक्षा के लिए खुलता है। अब तक, वह पिछले सात महीनों में 10,000 से अधिक सैनिटरी पैड्स के साथ-साथ श्रीनगर में 15 पब्लिक टॉयलेट में किट वितरित की हैं।

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गौरी सिंघल

विजिनारी के अंडर बना ब्रैंड फ्लो टैम्पोन को लॉन्च करने वाली 25 वर्षीया गौरी सिंघल हैं। उन्होंने महिलाओं की जरूरतों को समझते हुए इस ब्रैंड को लॉन्च किया। उनके मुताबिक, टैम्पोन्स उन महिलाओं के लिए बेहतर विकल्प है, जिनकी बहुत ही एक्टिव लाइफस्टाइल है। बस एक साल में, उन्होंने लगभग 50000 से ज्यादा ग्राहकों को तक अपनी पहुंच बढ़ाई। उन्होंने एक वीडियो कैंपेन को भी लॉन्च किया था, जिसका नाम ‘मिलेनियल्स एट युअर सर्विक्स’ था, जिसमें दोनों महिलाओं और पुरुषों ने हिस्सा लिया और मेंस्ट्रुअल हाइजीन पर अपनी राय दी।

दीपांजलि कनोरिया

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दिल्ली में पली-बढ़ी दीपांजलि, मैनहैटन की एक कंपनी में काम कर रही थी, जब उन्होंने अपने बिजनेस के बारे में सोचा। उनका ब्रैंड ‘हेडे’ साल 2017 में लॉन्च हुआ था और उन्हें फोर्ब्स की 30 अंडर 30 में जगह भी मिली है। उनका स्टार्टअप जैविक और बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड, पैंटी लाइनर, मेंस्ट्रुअल कप और बेबी डायपर बनाता है। सिर्फ डेढ़ साल में ही उन्होंने तीन गुना की ग्रोथ देखी। आज इंडस्ट्री में नुआ वुमन, पीसेफ जैसे कई कॉम्पीटिटर्स हैं, जिसे लेकर दीपांजलि कहती हैं कि बढ़ते प्रतिभागी यह दिखाता है कि नए और इनोवेटिव पर्सनल केयर की भारत में कितनी जरूरत है।

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