सुंदर सुगंधित फूलों वाला पारिजात, जिसे हरसिंगार या रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है, ज्यादातर झाड़ी या छोटे पेड़ के रूप में उगाया जाता है। इसकी खुशबू बहुत ज्यादा पसंद की जाती है और इसका इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में किया जाता है जो विभिन्न उपचारों में मदद करती है। 

अगर आप भी इस पौधे को घर पर लगाना चाहती हैं तो यहां कुछ स्‍टेप्‍स बताए गए हैं। साथ ही इस पौधे की देखभाल कैसे करें और इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभों को प्राप्त करने के लिए इसका इस्‍तेमाल कैसे करें? इसके बारे में बताया गया है।

पारिजात का पौधा घर पर गमले में कैसे लगाएं?

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आम धारणा यह है कि पारिजात एक बाहरी पौधा है जिसे बहुत अधिक जगह की जरूरत होती है लेकिन यह बिल्कुल सच नहीं है। लेकिन कुछ नियम और टिप्स को ध्यान में रखकर आप इसे घर पर भी उगा सकते हैं।

  • मिट्टी के बर्तन में 16 इंच का डायमीटर होना चाहिए जिसमें तल पर तीन जल निकासी छेद हों क्योंकि यह बर्तन से अतिरिक्त पानी से छुटकारा पाने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • स्प्रिंग सीजन में बीज या कटे हुए तने के साथ इसे रोपें।
  • सर्दी के मौसम में पारिजात लगाने से बचें और बीजों को अंकुरित होने से बचाएं।
  • पोटिंग मिक्स 50% सामान्य गॉर्डन की मिट्टी और 50% किसी भी आर्गेनिक खाद जैसे वर्मीकम्पोस्ट का होना चाहिए। अच्छी तरह मिला लें और ट्रे को भर दें।
  • प्रत्येक सेक्‍शन में एक बीज होना चाहिए और 2 सेमी गहराई बनाए रखना याद रखें।
  • पौधे में नमी को बनाए रखें लेकिन अधिक पानी न डालें।

पारिजात के पौधे की देखभाल कैसे करें?

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  • रोजाना इसे लगभग 6 घंटे तक सूर्य की रोशनी में रखने की जरूरत होती है।
  • तापमान बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। सुनिश्चित करें कि यह आंशिक छाया में हो।
  • कभी भी पानी जमा न होने दें क्योंकि इससे पौधे को नुकसान पहुंचता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  • जब मिट्टी की ऊपरी परत सूखी लगे, तब इसमें एक बार सुबह और दूसरी बार शाम को तभी पानी देना चाहिए। 
  • ठंड के मौसम में इसे नियमित रूप से पानी देने से बचें।

पारिजात के उपयोग

  • पीलीभीत के सलोनी हॉस्पिटल के जाने माने डॉक्टर वी. के.श्रीवास्तव (एम डी ,आयुर्वेद, पी.एच. डी.) का कहना है कि पौधे में चिकनगुनिया और डेंगू को ठीक करने की शक्ति होती है।
  • इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो बदलते मौसम के दौरान खांसी और जुकाम पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। 
  • पत्तियों को टॉनिक बनाया जा सकता है जो जोड़ों के दर्द और पेट से जुड़ी समस्‍याओं को कम करने में मदद करता है।
  • इसके पत्ते इम्यूनिटी के लिए बेहतरीन होते हैं। 
  • हरसिंगार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण किसी भी अन्य एंटीसेप्टिक की तरह त्वचा के घाव को भरने में भी मदद करते हैं और स्किन में होने वाली खुजली और रैशेज से छुटकारा भी दिलाते हैं।
  • पारिजात के 25 पत्ते और फूल 1 गिलास पानी के साथ पीस लें। इसे आधा उबाल कर 3 भाग कर लें। प्रत्येक भाग का सेवन सुबह, दोपहर और शाम को करना चाहिए और ऐसा 2 महीने तक करना चाहिए। हालांकि, किसी भी एलर्जी से बचने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे अच्छा रहता है।

पारिजात का आध्यात्मिक महत्व

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  • पौराणिक कथाओं के अनुसार इस पौधे से कई लगाव हैं। इसका उल्लेख कई बार किया गया है और यहां इस सुगंधित पौधे से जुड़ी कुछ कहानियां हैं।
  • इस पौधे के पीछे की कहानी यह है कि भगवान इंदिरा इस पौधे को अपने बगीचे में उगाती थीं और अप्सरा उर्वशी तनाव से राहत के लिए इस पेड़ की छाया के नीचे बैठती थीं।
  • यहां तक कि भगवान कृष्ण को भी यह पौधा भगवान इंदिरा ने नरकासुर को हराने और मारने के लिए उपहार में दिया था। तब भगवान कृष्ण ने इसे अपनी पत्नी रुक्मिणी को दे दिया।

तो, इस सुगंधित पौधे को घर में लगाएं और इसकी सुखद सुगंध को अपने घर में आने दें। इसके पत्तों और फूलों का भरपूर इस्‍तेमाल करें लेकिन किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। विभिन्न उपयोगी पौधों के बारे में अधिक जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें।